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शुंग, कण्व और सातवाहन शासन

Shunga, Kanva and Satavahana Rule

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NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2

शुंग, कण्व और सातवाहन शासन

मौर्यों के बाद उत्तर भारत शुंगों और कुछ समय कण्वों के पास गया, जबकि दक्कन पर सातवाहनों का शासन रहा। यह उत्तर में ब्राह्मण परंपरा के पुनरुत्थान और दक्षिण में समृद्ध समुद्री व्यापार का युग है।

शुंग वंश

  • पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या के बाद लगभग 185 ईसा पूर्व में वंश की स्थापना की। राजधानी पाटलिपुत्र रही और विदिशा महत्वपूर्ण केंद्र बना।
  • उसे ब्राह्मण परंपरा के पुनरुत्थान से जोड़ा जाता है, और धनदेव के अयोध्या अभिलेख में दर्ज है कि उसने अश्वमेध यज्ञ किया।
  • पाणिनि की व्याकरण पर महाभाष्य लिखने वाले वैयाकरण पतंजलि को इसी काल में रखा जाता है।
  • ब्राह्मण पुनरुत्थान के बावजूद बौद्ध कला फली-फूली - भरहुत की वेदिका और तोरण तथा सांची की वेदिका शुंग काल की हैं।
  • अंतिम शुंग देवभूति की हत्या उसके मंत्री वासुदेव ने की, जिसने कण्व वंश चलाया। कण्वों ने चार राजाओं के साथ लगभग पैंतालीस वर्ष शासन किया।

सातवाहन वंश

  • पुराणों में इन्हें आंध्र भी कहा गया है; इन्होंने दक्कन पर गोदावरी तट के प्रतिष्ठान (पैठण) से शासन किया।
  • वंश का संस्थापक सिमुक बताया जाता है।
  • इनके राजा मातृनाम वाले थे - गौतमीपुत्र, वासिष्ठीपुत्र - यानी माता का नाम लेते थे, जो भारतीय वंश परंपरा में असामान्य है।
  • गौतमीपुत्र सातकर्णि सबसे महान शासक है। उसकी माता गौतमी बलश्री द्वारा जारी नासिक अभिलेख कहता है कि उसने शक, पह्लव और यवनों को नष्ट किया, और उसे एकब्राह्मण तथा क्षत्रिय दर्प का नाशक कहता है।
  • उसके बाद वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी आया, और यज्ञश्री सातकर्णि ने जहाज वाले सिक्के चलाए, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण हैं।

सातवाहन समाज और अर्थव्यवस्था

  • ये भूमि दान देने वाले पहले ज्ञात शासक थे, जिन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर मुक्त गांव तक दिए - यह नासिक अभिलेखों में दर्ज है।
  • सिक्के अधिकतर सीसे के थे, कुछ पोटीन, तांबे और चांदी के; सीसा स्वयं आयात होता था।
  • व्यापार पश्चिमी बंदरगाहों से चलता था, और कपास, मसालों तथा मनकों के बदले रोमन स्वर्ण आता था।
  • इन्होंने कार्ले, नासिक, भाजा और नानाघाट की शैलकृत गुफाओं और चैत्यों को बनवाया और संरक्षण दिया।
  • ब्राह्मण वंश के शासक होते हुए भी इन्होंने बौद्ध विहारों को उदारता से दान दिया, जो दिखाता है कि संरक्षण संप्रदाय की सीमा से बंधा नहीं था।
वंशसंस्थापकराजधानीकिसके लिए याद
शुंगपुष्यमित्र शुंगपाटलिपुत्र, विदिशाअश्वमेध, पतंजलि, भरहुत वेदिका
कण्ववासुदेवपाटलिपुत्रचार राजाओं का छोटा शासन
सातवाहनसिमुकप्रतिष्ठान (पैठण)गौतमीपुत्र सातकर्णि, कार्ले गुफाएं, समुद्री व्यापार

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि किस वंश की स्थापना किसने की, नासिक अभिलेख क्या कहता है, और सातवाहन सिक्के किस धातु के थे। सुमेलित कीजिए में वंश और राजधानी या शासक और उपलब्धि जोड़े जाते हैं। कथन-आधारित प्रश्न यह दावा जांचते हैं कि शुंगों ने बौद्ध धर्म का दमन किया, जिसे कला के प्रमाण जटिल बना देते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

सातवाहन भूमि दान का महत्व समझिए - एक बार भूमि और राजस्व अधिकार राज्य के हाथ से निकलते हैं तो आगे की सामंती व्यवस्था की नींव पड़ जाती है। मातृनाम को इस प्रमाण के रूप में देखिए कि राजपरिवार की स्त्रियों का वास्तविक दर्जा था, भले उत्तराधिकार पितृवंशीय ही रहा।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ कण्व वंश की स्थापना देवभूति ने की  |  ✓ देवभूति अंतिम शुंग था; कण्व वंश वासुदेव ने चलाया

✗ सातवाहन राजधानी अमरावती थी  |  ✓ राजधानी गोदावरी तट पर प्रतिष्ठान यानी पैठण थी

✗ सातवाहन सिक्के मुख्यतः सोने के थे  |  ✓ इनके सिक्के मुख्यतः सीसे के थे

एक नजर में

  • पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ की हत्या के बाद लगभग 185 ईसा पूर्व शुंग वंश चलाया।
  • पतंजलि का महाभाष्य इसी युग का; भरहुत और सांची की वेदिकाएं शुंग कालीन।
  • अंतिम शुंग देवभूति की हत्या वासुदेव ने की, जिसने कण्व वंश चलाया।
  • सातवाहनों ने प्रतिष्ठान से दक्कन पर शासन किया; संस्थापक सिमुक।
  • गौतमीपुत्र सातकर्णि की प्रशंसा गौतमी बलश्री के नासिक अभिलेख में है।
  • मातृनाम, सीसे के सिक्के, भूमि दान और कार्ले-नासिक गुफाओं का संरक्षण।

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