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मृदा अपरदन और संरक्षण

Soil Erosion and Conservation

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NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Resources and Development" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Soils"

मृदा अपरदन और संरक्षण

मृदा अपरदन का अर्थ है ऊपरी मृदा परत का पवन या बहते जल द्वारा उतनी तेजी से हटना कि वह बन ही न सके। चूंकि एक सेंटीमीटर मृदा बनने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं, अपरदन गंभीर संसाधन हानि माना जाता है। इसके कारण प्राकृतिक भी हैं और मानवीय भी।

अपरदन के कारण और प्रकार

  • वनोन्मूलन उस जड़ जाल को हटा देता है जो मृदा को बांधता है, और मृदा ढीली तथा खुली रह जाती है।
  • पशुओं का अतिचारण घास आवरण हटा देता है और भूमि को कठोर बना देता है।
  • स्थानांतरी कृषि, जिसे पूर्वोत्तर में झूम कहते हैं, वन आवरण जलाकर पहाड़ी ढाल खोल देती है।
  • ढाल के आर-पार के बजाय ढाल के साथ की गलत जुताई जल को राह देकर मृदा बहा ले जाती है।
  • परत अपरदन ऊपरी मृदा की पतली एक समान परत हटाता है, इसलिए यह प्रायः उपज घटने पर ही पता चलता है।
  • अवनालिका अपरदन भूमि में गहरी नालियां काटता है; ऐसी कटी भूमि बीहड़ बन जाती है, जैसे मध्य प्रदेश के चंबल बीहड़।
  • पवन अपरदन पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में ढीली बलुई मृदा उड़ा ले जाता है।

संरक्षण के उपाय

  • समोच्च जुताई का अर्थ है ढाल के आर-पार जुताई, जिससे हर कूंड जल रोक लेता है।
  • सीढ़ीदार खेती पहाड़ी ढालों में सीढ़ियां काटती है, जो पश्चिमी और मध्य हिमालय में व्यापक है।
  • पट्टी कृषि में फसल पंक्तियों के बीच घास की पट्टियां पवन का वेग तोड़ती हैं।
  • रक्षक मेखला (shelter belt) पवन के आर-पार लगाई वृक्ष पंक्तियां हैं, जिन्होंने पश्चिमी भारत में बालू टीले स्थिर करने में सहायता की।
  • अवनालिका भराव और चेक डैम बीहड़ों को फैलने से रोकते हैं।
  • जैविक खाद और फसल चक्र मृदा की संरचना और उर्वरता बनाए रखते हैं।
  • बंजर ढालों पर वनरोपण पवन और जल दोनों के अपरदन से सबसे सस्ता दीर्घकालिक बचाव है।
  • नियंत्रित चराई और चारा क्षेत्र सामुदायिक चरागाह पर दबाव घटाते हैं।
  • जलग्रहण विकास पूरे ढाल को शिखर से घाटी तक एक इकाई मानकर उपचार करता है।
समस्याउपायप्रयोग क्षेत्र
ढाल पर जल बहावसमोच्च जुताईपहाड़ी कृषि भूमि
तीव्र ढालसीढ़ीदार खेतीहिमालयी ढाल
पवन अपरदनरक्षक मेखलापश्चिमी राजस्थान
अवनालिकाएंचेक डैम और भरावचंबल बीहड़

बीहड़ (Badland) — इतनी गहरी नालियों से कटी भूमि जो कृषि के अयोग्य हो जाए।

Exam me kaise aata hai

  • चंबल क्षेत्र की कटी भूमि को क्या कहते हैं — बीहड़
  • ढाल के आर-पार जुताई को क्या कहते हैं — समोच्च जुताई
  • पूर्वोत्तर की स्थानांतरी कृषि कहलाती है — झूम
  • पवन के विरुद्ध लगाई वृक्ष पंक्तियां कहलाती हैं — रक्षक मेखला

UPSC/State PSC ke liye

  • परत अपरदन दीर्घकाल में सबसे हानिकारक इसीलिए है कि वह धीमा है और उपज घटने तक अनदेखा रह जाता है।
  • मृदा संरक्षण तब सर्वोत्तम काम करता है जब चेक डैम जैसे अभियांत्रिक उपाय और वृक्ष आवरण जैसे जैविक उपाय साथ चलें।

Yahan confuse hote hain

✗ अवनालिका अपरदन परत अपरदन से कम दिखता है | अवनालिका अपरदन बहुत दिखता है; परत अपरदन छिपा रहता है  |  ✓

✗ समोच्च जुताई का अर्थ ढाल के साथ जुताई है | इसका अर्थ ढाल के आर-पार जुताई है  |  ✓

✗ सीढ़ीदार खेती मैदानों में होती है | यह पहाड़ी ढालों पर होती है  |  ✓

Ek nazar me

  • अपरदन के कारण: वनोन्मूलन, अतिचारण, झूम, गलत जुताई।
  • प्रकार: परत, अवनालिका, पवन; चंबल बीहड़ इसका उदाहरण।
  • संरक्षण: समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, पट्टी कृषि, रक्षक मेखला।
  • अभियांत्रिक और जैविक उपाय साथ मिलकर सर्वोत्तम हैं।

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