ध्वनि और उसके गुण
NCERT कक्षा 9 • Science • अध्याय "Sound" | NCERT कक्षा 8 • Science • अध्याय "Sound"
ध्वनि और उसके गुण
ध्वनि किसी कंपित वस्तु से उत्पन्न होती है और भौतिक माध्यम से तरंग के रूप में चलती है। यह निर्वात से नहीं जा सकती, इसीलिए बाह्य अंतरिक्ष से हम तक कोई ध्वनि नहीं आती, और यही एक तथ्य ध्वनि को प्रकाश से तुरंत अलग कर देता है।
प्रकृति और अभिलक्षण
- ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग के रूप में चलती है, जिसमें कण संपीडन और विरलन के माध्यम से तरंग की दिशा में ही कंपन करते हैं।
- आवृत्ति प्रति सेकंड कंपनों की संख्या है और हर्ट्ज में मापी जाती है; यह ध्वनि का तारत्व तय करती है।
- अधिक आवृत्ति तीखी ऊंचे तारत्व की ध्वनि देती है और कम आवृत्ति गहरी नीचे तारत्व की।
- आयाम किसी कण का अधिकतम विस्थापन है और प्रबलता तय करता है, जो डेसिबल में मापी जाती है।
- गुणता या तान वह है जिससे हम दो वाद्यों को उसी स्वर और उसी प्रबलता पर भी अलग पहचान लेते हैं।
- ध्वनि की चाल ठोसों में सर्वाधिक, द्रवों में कम और गैसों में न्यूनतम है, क्योंकि ठोसों में कण अधिक पास होते हैं।
- वायु में ध्वनि की चाल ताप और आर्द्रता बढ़ने पर बढ़ती है।
प्रतिध्वनि, अनुरणन और पराश्रव्य
- प्रतिध्वनि दूर की सतह से परावर्तन के कारण ध्वनि का दोहराव है।
- स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह इतनी दूर होनी चाहिए कि परावर्तित ध्वनि लगभग 0.1 सेकंड बाद पहुंचे।
- अनुरणन बार-बार परावर्तन से हॉल में ध्वनि का बना रहना है, जिसे परदे, कालीन और खुरदरी सतहों से घटाया जाता है।
- सामान्य मानव कान की श्रव्य परास लगभग 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज है।
- अवश्रव्य इस परास से नीचे और पराश्रव्य इससे ऊपर है।
- पराश्रव्य ध्वनि पुर्जे साफ करने, धातु में दरार पकड़ने, तथा सोनोग्राफी और इकोकार्डियोग्राफी जैसी चिकित्सा इमेजिंग में काम आती है।
- सोनार समुद्र की गहराई नापने और पानी के भीतर वस्तुएं पकड़ने के लिए पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग करता है।
- चमगादड़ और डॉल्फिन भी पराश्रव्य ध्वनि से रास्ता खोजते और शिकार पकड़ते हैं।
| गुण | किस पर निर्भर | कैसा अनुभव |
|---|---|---|
| तारत्व | आवृत्ति | तीखा या गहरा |
| प्रबलता | आयाम | मंद या तेज |
| गुणता | तरंग रूप | अलग-अलग वाद्य |
प्रतिध्वनि — दूर की सतह से परावर्तन के कारण ध्वनि का दोहराव, जो लगभग दसवें सेकंड बाद सुनाई देता है।
Exam me kaise aata hai
- मनुष्य की श्रव्य परास लगभग — 20 Hz से 20000 Hz
- ध्वनि का तारत्व किस पर निर्भर है — आवृत्ति
- ध्वनि की प्रबलता किस पर निर्भर है — आयाम
- समुद्र की गहराई किससे मापी जाती है — सोनार
UPSC/State PSC ke liye
- ध्वनि को माध्यम इसलिए चाहिए कि वह कणों के कंपन से चलती है, और निर्वात में ठीक यही नहीं होता।
- ठोसों में ध्वनि की चाल सर्वाधिक है क्योंकि पास-पास कणों के बीच प्रत्यास्थ बल विक्षोभ को तेजी से आगे बढ़ाता है।
Yahan confuse hote hain
✗ ध्वनि वायु में जल से तेज चलती है | ध्वनि ठोस में सबसे तेज, फिर द्रव, फिर गैस | ✓
✗ तारत्व आयाम पर निर्भर है | तारत्व आवृत्ति पर; आयाम प्रबलता देता है | ✓
✗ ध्वनि निर्वात से जा सकती है | ध्वनि को भौतिक माध्यम चाहिए | ✓
Ek nazar me
- ध्वनि कंपन से बनती है और माध्यम मांगती है।
- आवृत्ति तारत्व, आयाम प्रबलता और तरंग रूप गुणता देता है।
- चाल ठोसों में सर्वाधिक और गैसों में न्यूनतम है।
- श्रव्य परास 20 Hz से 20000 Hz; पराश्रव्य सोनार और इमेजिंग में काम आती है।
