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भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 11 • Geography • सुदूर संवेदन के अध्याय | NCERT कक्षा 8 • Science • अध्याय "Stars and the Solar System"

भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक सरल विचार पर बना: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग धरती की समस्याएं सुलझाने में हो। इसीलिए उसने केवल प्रतिष्ठा के बजाय संचार, मौसम पूर्वानुमान, सुदूर संवेदन और नौवहन पर ध्यान केंद्रित किया।

उपग्रह, प्रक्षेपण यान और कक्षाएं

  • उपग्रह वह वस्तु है जो किसी ग्रह के चारों ओर कक्षा में रखी जाए; चंद्रमा प्राकृतिक उपग्रह है और शेष कृत्रिम।
  • संचार उपग्रह टेलीफोन, टेलीविजन, इंटरनेट और प्रसारण संकेत दूर तक पहुंचाते हैं।
  • सुदूर संवेदन उपग्रह पृथ्वी की सतह के चित्र लेते हैं, जो मानचित्रण, फसल आकलन, वन आवरण, खनिज सर्वेक्षण और आपदा प्रबंधन में काम आते हैं।
  • मौसम उपग्रह बादल, चक्रवात और वर्षा पर दृष्टि रखते हैं तथा पूर्व चेतावनी संभव बनाते हैं।
  • नौवहन उपग्रह स्थिति की जानकारी देते हैं, जो परिवहन, मत्स्यन, सर्वेक्षण और मोबाइल अनुप्रयोगों में काम आती है।
  • भूस्थिर कक्षा भूमध्य रेखा के ऊपर उस ऊंचाई पर है जहां उपग्रह ठीक एक दिन में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, इसलिए वह एक ही स्थान पर ठहरा दिखता है।
  • ध्रुवीय या सूर्य तुल्यकालिक कक्षा बहुत नीची है और ध्रुवों के ऊपर से गुजरती है, जिससे उपग्रह पूरी पृथ्वी पट्टी दर पट्टी ढक लेता है।

उपयोग और लाभ

  • मौसम उपग्रहों से मिली चक्रवात चेतावनी ने पूर्वी तट पर जनहानि तेजी से घटाई है।
  • फसल पूर्वानुमान कटाई से बहुत पहले खरीद, भंडारण और आयात के निर्णय की योजना बनाने में सहायक है।
  • टेली शिक्षा और टेलीमेडिसिन दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षण और चिकित्सा परामर्श पहुंचाते हैं।
  • आपदा प्रबंधन में बाढ़, भूकंप और भूस्खलन के बाद राहत की योजना उपग्रह चित्रों से बनती है।
  • भूमि, जल निकायों, वनों और खनिजों का मानचित्रण और सर्वेक्षण अब लगभग पूरी तरह उपग्रह आंकड़ों पर निर्भर है।
  • प्रक्षेपण यान उपग्रहों को कई चरणों से कक्षा तक ले जाते हैं, जिनमें से हर चरण ईंधन समाप्त होते ही अलग हो जाता है।
  • भारत ने चंद्रमा और मंगल तक के अभियान भी चलाए हैं, जिन्होंने उसकी क्षमता गहरे अंतरिक्ष तक बढ़ाई।
उपग्रह प्रकारमुख्य उपयोगसामान्य कक्षा
संचारटेलीविजन, टेलीफोन, इंटरनेटभूस्थिर
सुदूर संवेदनमानचित्रण और संसाधन सर्वेक्षणध्रुवीय या सूर्य तुल्यकालिक
मौसमचक्रवात और वर्षा निगरानीभूस्थिर
नौवहनस्थिति की जानकारीविशेष कक्षा

भूस्थिर कक्षा — भूमध्य रेखा के ऊपर की वह कक्षा जिसमें उपग्रह ठीक एक दिन में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, इसलिए वह धरती से स्थिर दिखता है।

Exam me kaise aata hai

  • एक ही स्थान पर ठहरा दिखने वाला उपग्रह किस कक्षा में है — भूस्थिर कक्षा
  • पृथ्वी की सतह के चित्र लेने वाले उपग्रह — सुदूर संवेदन उपग्रह
  • चक्रवात चेतावनी किन उपग्रहों से मिलती है — मौसम उपग्रह
  • चंद्रमा किस प्रकार का उपग्रह है — प्राकृतिक उपग्रह

UPSC/State PSC ke liye

  • भूस्थिर उपग्रह का भूमध्य रेखा के ऊपर होना अनिवार्य है, क्योंकि केवल वहीं एक दिन की कक्षा उसे धरती के उसी बिंदु के ऊपर रख पाती है।
  • सुदूर संवेदन को विभेदन के लिए नीची ध्रुवीय कक्षा और संचार को कवरेज के लिए ऊंची भूमध्यरेखीय कक्षा चाहिए, इसीलिए दोनों अलग कक्षाएं लेते हैं।

Yahan confuse hote hain

सभी उपग्रह कृत्रिम होते हैं | चंद्रमा प्राकृतिक उपग्रह है  |  

भूस्थिर उपग्रह चलता नहीं है | वह पृथ्वी के साथ चलता है, इसलिए ठहरा दिखता है  |  

सुदूर संवेदन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में रखे जाते हैं | ये ध्रुवीय या सूर्य तुल्यकालिक कक्षा लेते हैं  |  

Ek nazar me

  • उपग्रह संचार, सुदूर संवेदन, मौसम या नौवहन प्रकार के होते हैं।
  • भूस्थिर कक्षा भूमध्य रेखा के ऊपर; ध्रुवीय कक्षा पूरी पृथ्वी ढकती है।
  • उपयोग में चक्रवात चेतावनी, फसल पूर्वानुमान, टेलीमेडिसिन और आपदा राहत आते हैं।
  • प्रक्षेपण यान कई चरणों से कक्षा तक पहुंचते हैं।

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