राज्य विधानमंडल और दल-बदल कानून
State Legislatures and Anti-Defection
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 5
राज्य विधानमंडल और दल-बदल कानून
हर राज्य में विधान सभा होती है। कुछ राज्यों में विधान परिषद भी होती है, जिससे वे द्विसदनीय बन जाते हैं। परिषद वाले राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।
विधान सभा
- सदस्य क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से जनता द्वारा सीधे निर्वाचित होते हैं; संख्या अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 के बीच तय होती है, कुछ छोटे राज्यों के लिए विशेष निचली सीमा है।
- सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष है; राज्यपाल इसे पहले भंग कर सकते हैं और आपात स्थिति में यह बढ़ाया जा सकता है।
- पीठासीन अधिकारी अध्यक्ष होते हैं, जिनकी सहायता उपाध्यक्ष करते हैं।
- सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
- राज्य मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव केवल विधान सभा पारित कर सकती है, और धन विधेयक भी यहीं से आते हैं।
विधान परिषद
- इसकी संख्या विधान सभा की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती और 40 से कम नहीं हो सकती।
- यह राज्यसभा की तरह स्थायी सदन है; हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और हर सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष है।
- सदस्य पांच स्रोतों से आते हैं - एक-तिहाई स्थानीय निकायों के सदस्यों द्वारा, एक-तिहाई विधान सभा सदस्यों द्वारा, एक-बटा-बारह स्नातकों द्वारा, एक-बटा-बारह शिक्षकों द्वारा, और शेष साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता तथा समाज सेवा में विशिष्टता के लिए राज्यपाल द्वारा मनोनीत।
- इसकी शक्तियां राज्यसभा से कमजोर हैं। यह साधारण विधेयक को सीमित अवधि तक ही टाल सकती है, और अंततः विधान सभा की इच्छा चलती है; राज्यों में संयुक्त बैठक नहीं होती।
- अनुच्छेद 169 के अनुसार यदि राज्य विधान सभा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करे तो संसद परिषद बना या समाप्त कर सकती है।
| बिंदु | विधान सभा | विधान परिषद |
|---|---|---|
| निर्वाचन | जनता द्वारा प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष, साथ में राज्यपाल द्वारा मनोनयन |
| संख्या | अधिकतम 500, न्यूनतम 60 | सभा की एक-तिहाई, न्यूनतम 40 |
| कार्यकाल | पांच वर्ष, भंग हो सकती है | स्थायी, हर दो वर्ष में एक-तिहाई सेवानिवृत्त |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| विधेयक पर शक्ति | अंतिम निर्णय | केवल विलंब; संयुक्त बैठक नहीं |
दल-बदल विरोधी कानून
- यह 1985 के 52वें संशोधन से आया, जिसने संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी।
- सदस्य अयोग्य हो जाता है यदि वह अपने दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दे, या अनुमति के बिना दल के व्हिप के विरुद्ध मतदान करे या अनुपस्थित रहे।
- मनोनीत सदस्य तब अयोग्य होता है जब वह सीट लेने के छह माह बाद किसी दल में शामिल हो; निर्दलीय सदस्य किसी भी दल में शामिल होने पर अयोग्य हो जाता है।
- 2003 के 91वें संशोधन ने एक-तिहाई सदस्यों के विभाजन वाला पुराना अपवाद हटा दिया, इसलिए अब केवल विधायक दल के दो-तिहाई समर्थन वाला विलय ही संरक्षित है।
- निर्णय सदन के पीठासीन अधिकारी करते हैं, और उच्चतम न्यायालय ने माना है कि यह निर्णय न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन है।
- इस कानून की आलोचना यह है कि यह विधायक के स्वतंत्र विवेक को कमजोर करता है, और बचाव यह कि सदस्यों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए यह आवश्यक है।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न विधान सभा की अधिकतम-न्यूनतम संख्या, परिषद बनाने वाला अनुच्छेद, और दल-बदल कानून लाने वाला संशोधन पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में परिषद सदस्यों के स्रोत और उनका हिस्सा जुड़ता है। कथन-आधारित प्रश्न परिषद की शक्तियां जांचते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
ध्यान दें कि परिषद वैकल्पिक और प्रतिवर्ती है - राज्य अनुच्छेद 169 के अंतर्गत इसे बना या समाप्त कर सकता है, जिससे यह भारत का सबसे कमजोर विधायी सदन बन जाता है। दल-बदल पर दोनों पक्ष रखिए और यह जीवंत बहस भी लिखिए कि निर्णय पीठासीन अधिकारी के पास रहे, जो प्रायः सत्ताधारी दल से होता है, या किसी स्वतंत्र प्राधिकरण के पास।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ विधान परिषद की शक्तियां राज्यसभा जितनी हैं | ✓ इसकी शक्तियां बहुत कमजोर हैं; यह विधेयक केवल टाल सकती है
✗ राज्य अपनी परिषद स्वयं समाप्त कर सकता है | ✓ सभा प्रस्ताव पारित करती है, पर कानून संसद अनुच्छेद 169 के अंतर्गत बनाती है
✗ दल-बदल कानून 91वें संशोधन से आया | ✓ यह 1985 के 52वें संशोधन से आया; 91वें ने 2003 में इसे कड़ा किया
एक नजर में
- हर राज्य में विधान सभा; बिहार सहित कुछ राज्यों में विधान परिषद भी।
- सभा की संख्या 500 और 60 के बीच, प्रत्यक्ष निर्वाचन, पांच वर्ष, न्यूनतम आयु 25।
- परिषद की संख्या सभा की एक-तिहाई, न्यूनतम 40, और यह स्थायी है।
- परिषद सदस्य स्थानीय निकाय, सभा, स्नातक, शिक्षक और मनोनयन से आते हैं।
- अनुच्छेद 169 से सभा के प्रस्ताव पर संसद परिषद बना या समाप्त कर सकती है।
- दल-बदल कानून 1985 के 52वें संशोधन और दसवीं अनुसूची से आया।
- 2003 के 91वें संशोधन ने विभाजन का अपवाद हटाकर केवल विलय रखा।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
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