संधारणीय जीवन और नागरिक कार्रवाई
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Management of Natural Resources" | NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues"
संधारणीय जीवन और नागरिक कार्रवाई
पर्यावरण नीति सरकारें लिखती हैं, पर पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाला अधिकांश काम साधारण दैनिक जीवन में होता है: हम क्या खरीदते हैं, कितना बर्बाद करते हैं और कैसे यात्रा करते हैं। संधारणीय जीवन उसी हानि को ऐसे चुनावों से घटाने का अभ्यास है जो कोई भी कर सकता है।
तीन R का दृष्टिकोण
- कम करो का अर्थ है पहले से ही कम उपयोग करना, और तीनों में यही सर्वाधिक प्रभावी है क्योंकि अप्रयुक्त संसाधन को कोई संसाधन प्रक्रिया चाहिए ही नहीं।
- व्यावहारिक कदमों में बदलने के बजाय मरम्मत करना, केवल आवश्यक खरीदना और एक बार उपयोग की वस्तुओं से बचना आते हैं।
- फिर उपयोग करो का अर्थ है किसी वस्तु को उसी या दूसरे रूप में फिर काम में लाना, जो पुनर्चक्रण में लगने वाली ऊर्जा बचा देता है।
- पुनर्चक्रण करो का अर्थ है अपशिष्ट पदार्थ को नए उत्पादों में बदलना, जो तभी चलता है जब कचरे का ठीक पृथक्करण हो।
- गीला कचरा जैसे रसोई और बगीचे का कचरा घर पर ही कंपोस्ट बनाकर खाद में बदला जा सकता है।
- सूखा कचरा जैसे कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु साफ और अलग रखने पर पुनर्चक्रित हो सकता है।
- संकटमय कचरा जैसे बैटरी, दवाएं, रंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान साधारण कचरे से पूरी तरह अलग रखना चाहिए।
दैनिक कार्रवाई और नागरिक भूमिका
- जल बचाना रिसाव ठीक करके, चलते नल के बजाय बाल्टी लेकर और घर पर वर्षा जल संचयन करके।
- ऊर्जा बचाना दक्ष बत्तियों और उपकरणों से, अप्रयुक्त उपकरण बंद करके तथा दिन के प्रकाश और प्राकृतिक हवा का उपयोग करके।
- संधारणीय परिवहन का अर्थ है जहां संभव हो पैदल चलना, साइकिल, साझा यात्रा और सार्वजनिक परिवहन।
- संधारणीय उपभोग का अर्थ है स्थानीय और मौसमी उपज को वरीयता, भोजन की बर्बादी घटाना और अपना थैला साथ रखना।
- वृक्ष लगाना और उनकी देखभाल, रसोई बगीचा रखना और स्थानीय जलाशयों की रक्षा सीधे योगदान हैं।
- नागरिक सूचना का अधिकार, जन सुनवाई, प्रदूषण बोर्ड को शिकायत और जनहित याचिका से भी कार्रवाई करते हैं।
- न्यायालयों ने स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के अधिकार का भाग माना है, जिससे नागरिक कार्रवाई को विधिक बल मिलता है।
| कार्रवाई | क्यों काम करती है |
|---|---|
| कम करो | कुछ बनाना, ढोना या निपटाना ही नहीं पड़ता |
| फिर उपयोग करो | पुनर्चक्रण में लगने वाली ऊर्जा बचती है |
| पुनर्चक्रण करो | पदार्थ भराव क्षेत्र के बजाय उपयोग में लौटता है |
| कंपोस्ट | गीले कचरे को स्रोत पर ही खाद बना देता है |
पृथक्करण — कचरे को स्रोत पर ही गीले, सूखे और संकटमय वर्गों में अलग करना ताकि हर एक का ठीक निपटान हो सके।
Exam me kaise aata hai
- तीन R में सर्वाधिक प्रभावी कौन सा है — कम करो
- रसोई और बगीचे का कचरा किसमें बदला जा सकता है — कंपोस्ट
- स्रोत पर कचरा अलग करना कहलाता है — पृथक्करण
- स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार किसका भाग माना जाता है — जीवन का अधिकार
UPSC/State PSC ke liye
- स्रोत पर पृथक्करण ही पूरी अपशिष्ट व्यवस्था को चलाता है, क्योंकि मिला हुआ कचरा एक बार मिल जाने पर आर्थिक रूप से न कंपोस्ट हो पाता है न पुनर्चक्रित।
- स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के अधिकार में पढ़ना पर्यावरण संरक्षण को नीतिगत वरीयता से प्रवर्तनीय अधिकार बना देता है।
Yahan confuse hote hain
✗ तीन R में पुनर्चक्रण सर्वोत्तम है | कम करना सर्वाधिक प्रभावी है; पुनर्चक्रण अंत में आता है | ✓
✗ कचरा बाद में डंप पर अलग किया जा सकता है | मिला हुआ कचरा उपयोगी रूप में अलग करना बहुत कठिन है | ✓
✗ व्यक्तिगत कार्रवाई से कोई अंतर नहीं पड़ता | कुल संसाधन उपयोग का बड़ा भाग घरेलू चुनाव ही तय करते हैं | ✓
Ek nazar me
- कम करो, फिर उपयोग करो और पुनर्चक्रण करो, इसी प्रभावशीलता क्रम में।
- गीला, सूखा और संकटमय कचरा स्रोत पर ही अलग करें।
- जल और ऊर्जा बचाएं तथा संधारणीय परिवहन और उपभोग चुनें।
- नागरिक सूचना, सुनवाई, शिकायत और न्यायालय के माध्यम से कार्रवाई करते हैं।
Ab practice karein
Disaster management aur environment se har exam me questions aate hain. Poori NCERT gist ke baad ExamAtlas ke mock test se apni taiyari abhi jaanchein.
