जैव विविधता पर संकट
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Biodiversity and Conservation" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Forest and Wildlife Resources"
जैव विविधता पर संकट
प्रजातियां सदैव विलुप्त होती रही हैं, पर वर्तमान दर प्राकृतिक पृष्ठभूमि दर से कहीं अधिक है, और उसका लगभग पूरा भाग मानवीय गतिविधि से जुड़ता है। चार कारण अधिकांश हानि के लिए उत्तरदायी हैं, जिन्हें प्रायः दुष्ट चौकड़ी कहा जाता है।
चार मुख्य कारण
- आवास हानि और विखंडन सबसे बड़ा एकल कारण है, क्योंकि जिस प्रजाति के पास रहने को स्थान न हो वह कितनी भी संरक्षित हो, बच नहीं सकती।
- कृषि, खनन, बांध, सड़क और बसाव के लिए वन साफ करने ने बड़े आवासों को छोटे अलग-थलग टुकड़ों में तोड़ दिया है।
- विखंडन इसलिए हानिकारक है कि बड़े क्षेत्र वाले जंतु छोटे टुकड़े में नहीं रह सकते, और छोटी अलग-थलग समष्टियां आनुवंशिक विविधता खो देती हैं।
- अति दोहन का अर्थ है किसी संसाधन को उसके पुनर्जनन से तेज गति से लेना, जैसे अति मत्स्यन और अत्यधिक शिकार।
- बाहरी प्रजातियों का आक्रमण लाई गई प्रजातियों को बेरोक बढ़कर देशी प्रजातियों को हटाने देता है।
- सह विलुप्ति तब होती है जब कोई प्रजाति समाप्त होकर उन प्रजातियों को भी ले जाए जो उस पर निर्भर थीं, जैसे कोई विशेषीकृत परजीवी या परागणकर्ता।
- प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन अब इन चारों के ऊपर दबाव की एक और परत जोड़ते हैं।
संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणियां
- विलुप्त का अर्थ है कि कहीं कोई व्यक्ति नहीं बचा, जैसे डोडो।
- वन में विलुप्त का अर्थ है कि प्रजाति केवल बंदी अवस्था या संवर्धन में बची है।
- अति संकटग्रस्त का अर्थ है कि उसे निकट भविष्य में विलुप्ति का अत्यंत ऊंचा जोखिम है।
- संकटग्रस्त का अर्थ बहुत ऊंचा जोखिम, और सुभेद्य का अर्थ लंबी अवधि में ऊंचा जोखिम है।
- दुर्लभ प्रजातियों की समष्टियां छोटी हैं और स्थानिक प्रजातियां केवल किसी एक क्षेत्र में मिलती हैं।
- भारत के संकटग्रस्त वन्य जीवों के उदाहरणों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, गंगा नदी डॉल्फिन, हिम तेंदुआ और एक सींग वाला गैंडा आते हैं।
- रेड लिस्ट वह अंतरराष्ट्रीय अभिलेख है जो हर प्रजाति को इन्हीं में से किसी श्रेणी में रखता है।
| कारण | क्या होता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| आवास हानि | रहने का स्थान नष्ट या बंट जाता है | खेती के लिए वन कटाई |
| अति दोहन | संसाधन पुनर्जनन से तेज लिया जाता है | अति मत्स्यन |
| बाहरी प्रजाति | लाई गई प्रजाति देशी को हटा देती है | झीलों में आक्रामक खरपतवार |
| सह विलुप्ति | निर्भर प्रजाति पोषी के साथ समाप्त | कोई विशेषीकृत परागणकर्ता |
स्थानिक प्रजाति — वह प्रजाति जो प्राकृतिक रूप से केवल किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में मिलती है, अन्यत्र कहीं नहीं।
Hindi me samjhein
आवास हानि सबसे बड़ा कारण है क्योंकि रहने का स्थान ही न बचे तो संरक्षण के अन्य उपाय भी काम नहीं करते। स्थानिक प्रजातियां सबसे अधिक असुरक्षित हैं क्योंकि उनका पूरा अस्तित्व एक ही क्षेत्र पर टिका है।
Exam me kaise aata hai
- जैव विविधता हानि का सबसे बड़ा कारण — आवास हानि
- केवल एक क्षेत्र में मिलने वाली प्रजाति कहलाती है — स्थानिक
- पोषी के साथ निर्भर प्रजाति का समाप्त होना — सह विलुप्ति
- संकटग्रस्त प्रजातियों का अंतरराष्ट्रीय अभिलेख — रेड लिस्ट
UPSC/State PSC ke liye
- विखंडन की हानि खोए क्षेत्रफल से कहीं अधिक है, क्योंकि किनारा प्रभाव और छोटी समष्टियों का अलगाव बचे हुए भाग को भी लगातार क्षीण करते रहते हैं।
- स्थानिक प्रजातियां सर्वाधिक असुरक्षित हैं, क्योंकि उनके एकमात्र आवास पर संकट पूरी प्रजाति पर एक साथ संकट है।
Yahan confuse hote hain
✗ विलुप्त और वन में विलुप्त एक ही हैं | वन में विलुप्त प्रजाति बंदी अवस्था में बची रहती है | ✓
✗ आज विलुप्ति का मुख्य कारण शिकार है | सबसे बड़ा कारण आवास हानि है | ✓
✗ स्थानिक प्रजातियां सदैव प्रचुर होती हैं | स्थानिक का अर्थ सीमित क्षेत्र है, जो उन्हें असुरक्षित बनाता है | ✓
Ek nazar me
- आवास हानि, अति दोहन, बाहरी प्रजातियां और सह विलुप्ति मुख्य कारण हैं।
- विखंडन समष्टियों को अलग करता और आनुवंशिक विविधता घटाता है।
- श्रेणियां सुभेद्य से संकटग्रस्त, अति संकटग्रस्त और विलुप्त तक चलती हैं।
- स्थानिक प्रजातियां सीमित क्षेत्र के कारण सर्वाधिक जोखिम में हैं।
