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आर्थिक प्रणालियों के प्रकार

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Indian Economy on the Eve of Independence and after"

आर्थिक प्रणालियों के प्रकार

आर्थिक प्रणाली वह व्यवस्था है जिससे कोई देश तय करता है कि क्या उत्पादन हो, कैसे हो और किसके लिए हो। तीन व्यापक प्रणालियां हैं: पूंजीवादी या बाजार अर्थव्यवस्था, समाजवादी या केंद्रीय नियोजित अर्थव्यवस्था, तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था, जो दोनों के लक्षण जोड़ती है।

पूंजीवादी और समाजवादी प्रणाली

  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधन निजी स्वामित्व में हैं और निर्णय कीमत तंत्र तथा लाभ की प्रेरणा से निर्देशित होते हैं।
  • इसकी शक्ति कार्यकुशलता, नवाचार और उपभोक्ता चयन है; कमजोरी यह है कि यह उन लोगों की उपेक्षा कर सकती है जो भुगतान नहीं कर सकते।
  • जिन वस्तुओं में लाभ नहीं, जैसे अत्यंत निर्धनों के लिए सेवाएं, उनका उत्पादन ही नहीं हो पाता।
  • समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधन राज्य के पास हैं और केंद्रीय प्राधिकरण उत्पादन तथा वितरण की योजना बनाता है।
  • इसकी शक्ति समानता और मूल आवश्यकताओं का लक्ष्य है; कमजोरी कमजोर प्रोत्साहन, धीमे निर्णय और सीमित चयन है।
  • व्यवहार में कोई देश इनमें से किसी का शुद्ध रूप नहीं चलाता।

मिश्रित अर्थव्यवस्था और भारत

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र राज्य विनियमन के ढांचे में साथ-साथ काम करते हैं।
  • भारत ने स्वतंत्रता के बाद यही मॉडल अपनाया ताकि राज्य भारी उद्योग और बुनियादी ढांचा बनाए जबकि निजी उद्यम उपभोक्ता वस्तुएं और व्यापार संभाले।
  • राज्य ने सामाजिक न्याय, मूल आवश्यकताओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास का उत्तरदायित्व लिया।
  • लक्ष्य तय करने और संसाधन आवंटन के लिए पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक नियोजन का साधन अपनाया गया।
  • 1991 से नीति उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की ओर मुड़ी, जिससे निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ी।
  • सार्वजनिक क्षेत्र आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत सेवाओं और जन कल्याण से जुड़े क्षेत्र रखता है।
  • मिश्रित प्रणाली का उद्देश्य बाजार की कार्यकुशलता और राज्य के सामाजिक दायित्व दोनों को जोड़ना है।
  • इसकी कठिनाई यह है कि विनियमन अधिक हो तो कुशलता घटती है और कम हो तो असमानता बढ़ती है।
प्रणालीस्वामित्वनिर्णय किससे
पूंजीवादीनिजीकीमत तंत्र और लाभ
समाजवादीराज्यकेंद्रीय नियोजन प्राधिकरण
मिश्रितसार्वजनिक और निजी दोनोंबाजार के साथ राज्य विनियमन

मिश्रित अर्थव्यवस्था — वह आर्थिक प्रणाली जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र काम करते हैं और राज्य समग्र ढांचा तय करता है।

Exam me kaise aata hai

  • भारत किस आर्थिक प्रणाली का अनुसरण करता है — मिश्रित अर्थव्यवस्था
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में निर्णय किससे होते हैं — कीमत तंत्र
  • समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधन किसके हैं — राज्य के
  • 1991 के सुधार किन तीन शब्दों से जाने जाते हैं — उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण

UPSC/State PSC ke liye

  • कीमत तंत्र वहां विफल होता है जहां सार्वजनिक वस्तुएं और बाह्यताएं हों, और यही बाजार अर्थव्यवस्था में भी राज्य की भूमिका का मानक तर्क है।
  • भारत का मिश्रित मॉडल वृद्धि और समता को जोड़ने के लिए बना था, पर दोनों के बीच संतुलन हर नीति चरण में बदलता रहा है।

Yahan confuse hote hain

मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र नहीं होता | इसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र होते हैं  |  

पूंजीवाद में राज्य उत्पादन तय करता है | कीमत तंत्र और लाभ इसे तय करते हैं  |  

समाजवाद में नियोजन नहीं होता | समाजवाद केंद्रीय नियोजन पर बहुत निर्भर है  |  

Ek nazar me

  • तीन प्रणालियां: पूंजीवादी, समाजवादी और मिश्रित।
  • पूंजीवाद कीमत तंत्र से; समाजवाद केंद्रीय नियोजन से चलता है।
  • भारत ने स्वतंत्रता के बाद नियोजन के साथ मिश्रित अर्थव्यवस्था चुनी।
  • 1991 से सुधारों के तहत निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ी।

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