आपदाओं के प्रकार
NCERT कक्षा 11 • Geography • अध्याय "Natural Hazards and Disasters" | NCERT कक्षा 9 • Science • अध्याय "Natural Resources"
आपदाओं के प्रकार
संकट (hazard) वह घटना है जो हानि पहुंचा सकती है; वह आपदा तभी बनती है जब किसी असुरक्षित आबादी पर पड़कर उनकी सहन क्षमता से अधिक हानि करे। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वही भूकंप एक स्थान पर छोटी घटना और दूसरे पर भारी विपत्ति बन जाता है।
प्राकृतिक आपदाएं
- भूकंप किसी भ्रंश पर ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से आते हैं; भारत के भूकंपीय क्षेत्र अपेक्षित तीव्रता से मानचित्रित हैं, जिनमें हिमालय और पूर्वोत्तर सर्वाधिक जोखिम में हैं।
- भूकंप में अधिकांश मृत्यु गिरती इमारतों से होती है, कंपन से नहीं, इसीलिए भवन संहिताएं इतनी महत्वपूर्ण हैं।
- बाढ़ तब आती है जब नदियां तट पार कर जाएं, और उत्तर बिहार, असम, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा तटीय ओडिशा सर्वाधिक प्रभावित हैं।
- चक्रवात पश्चिमी तट की तुलना में पूर्वी तट पर कहीं अधिक आते हैं, और तेज पवन, भारी वर्षा तथा तूफानी लहर लाते हैं।
- सूखा मानसून की विफलता से धीरे-धीरे बनता है और सबसे अधिक लोगों को प्रभावित करता है, यद्यपि मृत्यु कम होती हैं।
- भूस्खलन हिमालय और पश्चिमी घाट में आम हैं, और वनोन्मूलन, सड़क कटाई तथा भारी वर्षा उन्हें और बढ़ा देते हैं।
- सुनामी, हिमस्खलन, बादल फटना, लू और शीत लहर भारत को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक संकटों की सूची पूरी करते हैं।
मानव जनित आपदाएं और असुरक्षा
- मानव जनित आपदाओं में औद्योगिक दुर्घटना, गैस रिसाव, रासायनिक फैलाव, आग, भवन गिरना, भगदड़ तथा सड़क और रेल दुर्घटनाएं आती हैं।
- भोपाल गैस त्रासदी ने दिखाया कि औद्योगिक दुर्घटना प्राकृतिक आपदा के पैमाने पर मृत्यु और क्षति कर सकती है।
- असुरक्षा (vulnerability) ही संकट को आपदा में बदलती है, और वह निर्धनता, आवास की गुणवत्ता, जागरूकता, चेतावनी तंत्र तथा तैयारी पर निर्भर है।
- निर्धन परिवार सर्वाधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि वे कमजोर ढांचों में अधिक खुली भूमि पर रहते हैं और उबरने की क्षमता उनमें सबसे कम है।
- कुछ आपदाएं तीव्र आरंभ की होती हैं, जैसे भूकंप, और कुछ धीमे आरंभ की, जैसे सूखा।
- मानवीय गतिविधि वनोन्मूलन, बाढ़ मैदान पर निर्माण, प्राकृतिक जल निकासी रोकना और अनियोजित पहाड़ी विकास से जोखिम बढ़ाती है।
- इसलिए असुरक्षा घटाना संकट का पूर्वानुमान लगाने जितना ही महत्वपूर्ण है।
| आपदा | आरंभ | भारत में सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| भूकंप | अचानक | हिमालय और पूर्वोत्तर |
| बाढ़ | अपेक्षाकृत तीव्र | उत्तर बिहार, असम, तटीय ओडिशा |
| चक्रवात | चेतावनी के साथ तीव्र | पूर्वी तट |
| सूखा | धीमा | वर्षा आधारित और शुष्क क्षेत्र |
असुरक्षा — वह मात्रा जिस हद तक कोई समुदाय किसी संकट से हानि झेल सकता है, जो उसकी दशा और तैयारी से तय होती है।
Exam me kaise aata hai
- कौन सी आपदा धीमे आरंभ की है — सूखा
- भूकंप में अधिकांश मृत्यु किससे होती है — गिरती इमारतों से
- भारत के किस तट पर अधिक चक्रवात आते हैं — पूर्वी तट
- संकट को आपदा कौन बनाता है — असुरक्षा
UPSC/State PSC ke liye
- आपदा जोखिम संकट और असुरक्षा का गुणनफल है, और चूंकि संकट रोका नहीं जा सकता, हर व्यावहारिक जोखिम न्यूनीकरण असुरक्षा पर ही काम करता है।
- सूखा सबसे अधिक लोगों को प्रभावित करता पर सबसे कम मृत्यु देता है, इसीलिए उसे उसकी वास्तविक आर्थिक लागत से कम ध्यान मिलता है।
Yahan confuse hote hain
✗ संकट और आपदा का अर्थ एक है | संकट तभी आपदा बनता है जब वह गंभीर हानि करे | ✓
✗ भूकंप कंपन से सीधे मारता है | अधिकांश मृत्यु गिरते ढांचों से होती है | ✓
✗ भारत के पश्चिमी तट पर अधिक चक्रवात आते हैं | पूर्वी तट पर कहीं अधिक आते हैं | ✓
Ek nazar me
- संकट असुरक्षित आबादी से मिलने पर आपदा बन जाता है।
- प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सूखा और भूस्खलन आते हैं।
- मानव जनित आपदाओं में औद्योगिक दुर्घटना, आग और भगदड़ आती हैं।
- असुरक्षा निर्धनता, आवास, जागरूकता और तैयारी पर निर्भर है।
