विजयनगर की स्थापना और शासक
NCERT Class 7 - Our Pasts II • NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II, Chapter 7
विजयनगर की स्थापना और शासक
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का भाइयों ने तुंगभद्रा के दक्षिणी तट पर की। यह दो शताब्दियों से अधिक चला और 1565 के तालीकोटा युद्ध से एक शक्ति के रूप में टूट गया।
स्थापना और चार वंश
- परंपरा भाइयों को प्रेरित करने का श्रेय संत विद्यारण्य को देती है, इसीलिए राजधानी को विद्यानगर यानी विद्या का नगर भी कहा गया।
- स्थान सुरक्षा के लिए चुना गया - यह ग्रेनाइट पहाड़ियों से घिरा है और एक ओर तुंगभद्रा रक्षा करती है।
| वंश | काल | प्रमुख शासक |
|---|---|---|
| संगम | 1336-1485 | देवराय द्वितीय |
| सालुव | 1485-1505 | सालुव नरसिंह |
| तुलुव | 1505-1570 | कृष्णदेवराय |
| अरवीडु | 1570-1650 | रामराय के उत्तराधिकारी |
- संगम वंश के देवराय द्वितीय ने अपनी सेना में मुस्लिम धनुर्धर और घुड़सवार भर्ती किए, जो दिखाता है कि बहमनियों से संघर्ष राजनीतिक था, धार्मिक नहीं।
- शासक राय उपाधि प्रयोग करते थे, और अपने अभिलेखों में साम्राज्य को प्रायः कर्णाट साम्राज्य कहा गया है।
कृष्णदेवराय
- उसने 1509 से 1529 तक शासन किया और साम्राज्य का सबसे महान शासक है।
- उसने बहमनी उत्तराधिकारियों को हराया, कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच दोआब में रायचूर लिया, और ओडिशा में गजपतियों के विरुद्ध सफल अभियान किए।
- उसने तेलुगु में आमुक्तमाल्यद लिखी, जो राजनीति और भक्ति का ग्रंथ है।
- उसके दरबार में अष्टदिग्गज यानी आठ प्रसिद्ध तेलुगु कवि थे, जिनमें अल्लसानी पेद्दन सर्वोपरि थे और उन्हें आंध्रकवितापितामह कहा गया।
- उसने विट्ठलस्वामी और हजारा राम मंदिर बनवाए, पुराने मंदिरों में विशाल रायगोपुरम जोड़े, और माता की स्मृति में नागलपुरम उपनगर बसाया।
- पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस और फर्नाओ नुनिज उसके शासन का विस्तृत वर्णन करते हैं।
तालीकोटा और उसके बाद
- आगे चलकर सत्ता आलिया रामराय के हाथ आई, जिसने दक्कनी सल्तनतों के झगड़ों में हस्तक्षेप किया और एक को दूसरे के विरुद्ध खड़ा किया।
- बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की सल्तनतों ने मिलकर 1565 में तालीकोटा, जिसे राक्षसी-तंगड़ी भी कहते हैं, में विजयनगर को हराया।
- रामराय बंदी बनाकर मारा गया, और राजधानी कई महीनों तक लूटी गई तथा फिर कभी बसाई नहीं गई।
- अरवीडु वंश पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से चलता रहा, पर साम्राज्य एक बड़ी शक्ति के रूप में समाप्त हो गया।
विदेशी यात्री
| यात्री | देश | किसके शासन में आया |
|---|---|---|
| निकोलो द कोंटी | इटली | देवराय प्रथम |
| अब्दुर रज्जाक | फारस | देवराय द्वितीय |
| डोमिंगो पेस | पुर्तगाल | कृष्णदेवराय |
| फर्नाओ नुनिज | पुर्तगाल | अच्युतदेवराय |
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न स्थापना का वर्ष, आमुक्तमाल्यद के रचयिता, और तालीकोटा का वर्ष पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में वंश और शासक, या यात्री और उसका समकालीन राजा जुड़ते हैं। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि विजयनगर-बहमनी संघर्ष धार्मिक था या नहीं।
UPSC / State PSC के लिए
ध्यान दें कि सल्तनतें अलग-अलग समय पर विजयनगर की सहयोगी भी रहीं और आपस में लगातार लड़ती रहीं - देवराय द्वितीय की मुस्लिम घुड़सवार सेना और रामराय के गठबंधन दिखाते हैं कि दक्कन के युद्ध रायचूर दोआब और राजस्व के लिए थे, मत के लिए नहीं। वर्णनात्मक उत्तर में परीक्षक यही बिंदु खोजते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ कृष्णदेवराय संगम वंश का था | ✓ वह तुलुव वंश का था
✗ आमुक्तमाल्यद संस्कृत में लिखी गई | ✓ यह कृष्णदेवराय ने तेलुगु में लिखी
✗ विजयनगर को अकेले बीजापुर ने हराया | ✓ तालीकोटा में चार दक्कनी सल्तनतों की संयुक्त सेना ने हराया
एक नजर में
- विजयनगर की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने तुंगभद्रा तट पर की।
- चार वंश - संगम, सालुव, तुलुव और अरवीडु।
- कृष्णदेवराय का शासन 1509-1529, आमुक्तमाल्यद तेलुगु में लिखी।
- उसके दरबार में अष्टदिग्गज; अल्लसानी पेद्दन आंध्रकवितापितामह कहलाए।
- 1565 में तालीकोटा का युद्ध; संयुक्त दक्कनी सल्तनतों ने आलिया रामराय को हराया।
- यात्री - निकोलो द कोंटी, अब्दुर रज्जाक, डोमिंगो पेस और फर्नाओ नुनिज।
