अपक्षय, अपरदन और वृहत् संचलन
NCERT Class 11 - Fundamentals of Physical Geography, Chapters 5 and 6
अपक्षय, अपरदन और वृहत् संचलन
बहिर्जात प्रक्रियाएं धरातल को घिसती हैं। ये क्रम में काम करती हैं - अपक्षय चट्टान को उसी जगह तोड़ता है, वृहत् संचलन ढीले पदार्थ को गुरुत्व से ढलान के नीचे ले जाता है, और अपरदन उसे नदियों, हिम, पवन तथा लहरों से हटाकर ढोता है।
अपक्षय और अपरदन का अंतर
- अपक्षय चट्टान का यथास्थान टूटना है, यानी पदार्थ का कोई परिवहन नहीं होता।
- अपरदन में घिसाई के साथ किसी गतिशील कारक द्वारा पदार्थ का परिवहन भी होता है।
- इसलिए अपक्षय वह पदार्थ तैयार करता है जिसे अपरदन हटाता है, और इसी कारण उसे अनाच्छादन का पहला चरण कहा जाता है।
- धरातल को घिसने की समग्र प्रक्रिया अनाच्छादन कहलाती है, जिसमें अपक्षय, वृहत् संचलन, अपरदन और परिवहन आते हैं।
अपक्षय के प्रकार
| प्रकार | प्रक्रिया | कहां प्रबल |
|---|---|---|
| तुषार क्रिया | दरारों में जल जमकर फैलता है और चट्टान चटक जाती है | ठंडे पर्वत, ऊंचे अक्षांश |
| तापीय प्रसार | बार-बार गर्म-ठंडा होने से बाहरी परतें उतरती हैं, जिसे अपशल्कन कहते हैं | दैनिक ताप अंतर वाले गर्म मरुस्थल |
| लवण अपक्षय | छिद्रों में नमक के रवे बढ़कर चट्टान को अलग करते हैं | शुष्क और तटीय क्षेत्र |
| भार विमोचन | ऊपरी चट्टान हटने पर नीचे की चट्टान फैलकर चटकती है | गहरे अपरदन और खनन वाले क्षेत्र |
| विलयन | खनिज सीधे जल में घुल जाते हैं | चूना पत्थर और लवण क्षेत्र |
| कार्बोनेटीकरण | वर्षा जल की कार्बन डाइऑक्साइड से बना दुर्बल अम्ल चूना पत्थर को काटता है | कार्स्ट क्षेत्र |
| ऑक्सीकरण | लोहे के खनिज ऑक्सीजन से क्रिया कर लाल पड़ते और भुरभुरे होते हैं | आर्द्र गर्म क्षेत्र |
| जलअपघटन और जलयोजन | खनिज जल से क्रिया करते या उसे सोखकर फूलते हैं | आर्द्र उष्ण कटिबंध |
- भौतिक अपक्षय चट्टान को उसकी रासायनिक बनावट बदले बिना तोड़ता है; रासायनिक अपक्षय खनिजों को ही बदल देता है।
- जैविक अपक्षय दोनों तरह काम करता है - जड़ें दरारें यांत्रिक रूप से चौड़ी करती हैं, और लाइकेन तथा सड़ते पदार्थ के कार्बनिक अम्ल खनिजों पर रासायनिक प्रहार करते हैं।
- रासायनिक अपक्षय गर्म और आर्द्र जलवायु में प्रबल होता है, इसीलिए उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में अपक्षयित परत गहरी होती है।
वृहत् संचलन
- वृहत् संचलन पदार्थ का गुरुत्व के अधीन ढलान से नीचे खिसकना है, जिसमें बहते जल जैसा कोई वाहक माध्यम नहीं होता।
- मृदा सर्पण - मिट्टी का अत्यंत धीमा खिसकना, जो केवल झुके खंभों, मुड़े वृक्षों और चटकी दीवारों से दिखता है।
- सॉलिफ्लक्शन - ठंडे क्षेत्रों में जमी भूमि के ऊपर जल संतृप्त मिट्टी का धीमा प्रवाह।
- भूस्खलन - तीव्र संचलन, जिसमें वक्र सतह पर घूमकर खिसकने वाला स्लंप, मलबा स्खलन और शैल स्खलन आते हैं।
- कीचड़ प्रवाह और मलबा प्रवाह - संतृप्त पदार्थ का नाले में तेजी से नीचे बहना, जो हिमालय में भारी वर्षा के बाद आम है।
- शैल पतन और हिमस्खलन - चट्टान का मुक्त गिरना या हिम तथा बर्फ का तेज उतरना।
- कारणों में तीखी ढाल, भारी वर्षा, कमजोर या संतृप्त पदार्थ, वनस्पति का नाश, भूकंप, तथा सड़क कटाई, खनन और अस्थिर ढाल पर निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियां शामिल हैं।
मृदा निर्माण
- मृदा अपक्षयित पदार्थ रेगोलिथ से बनती है, जिसमें कार्बनिक पदार्थ, जल और वायु मिल जाते हैं।
- मृदा निर्माण को नियंत्रित करने वाले पांच कारक हैं - मूल चट्टान, जलवायु, उच्चावच, जीव और समय।
- सामान्यतः जलवायु सबसे महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि तापमान और वर्षा अपक्षय की दर तथा मृदा के भीतर पदार्थ की गति तय करते हैं।
- परिपक्व मृदा में संस्तर दिखते हैं - ऊपर कार्बनिक पदार्थ से भरपूर परत, बीच में वह परत जहां पदार्थ जमा होता है, और नीचे अपक्षयित मूल चट्टान।
परीक्षा में कैसे आता है
कथन-आधारित प्रश्न अपक्षय और अपरदन का अंतर जांचते हैं। सुमेलित कीजिए में अपक्षय प्रक्रिया और उसकी प्रबल जलवायु जुड़ती है। व्यावहारिक प्रश्न किसी ढाल विफलता का वर्णन देकर पूछते हैं कि वह किस प्रकार का वृहत् संचलन है।
UPSC / State PSC के लिए
अपक्षय को संसाधन और आपदा से जोड़िए - आर्द्र उष्ण कटिबंध में गहरा रासायनिक अपक्षय लैटेराइट और बॉक्साइट देता है, जबकि हिमालय में वृहत् संचलन बड़ा आपदा जोखिम है, जिसे वन कटाव और अनियोजित सड़क निर्माण और बढ़ा देते हैं। यही जुड़ाव वर्णनात्मक उत्तर को विश्लेषणात्मक बनाते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ अपक्षय में पदार्थ का परिवहन शामिल है | ✓ परिवहन अपरदन है; अपक्षय यथास्थान होता है
✗ अपशल्कन रासायनिक प्रक्रिया है | ✓ यह भौतिक है, बार-बार गर्म-ठंडा होने से
✗ वृहत् संचलन के लिए बहता जल आवश्यक है | ✓ यह केवल गुरुत्व से होने वाला संचलन है
एक नजर में
- अनाच्छादन में अपक्षय, वृहत् संचलन, अपरदन और परिवहन शामिल हैं।
- अपक्षय चट्टान को यथास्थान तोड़ता है; अपरदन उसे ढोता भी है।
- भौतिक अपक्षय - तुषार क्रिया, तापीय प्रसार, लवण अपक्षय और भार विमोचन।
- रासायनिक अपक्षय - विलयन, कार्बोनेटीकरण, ऑक्सीकरण, जलअपघटन और जलयोजन।
- रासायनिक अपक्षय गर्म आर्द्र जलवायु में प्रबल और गहरी अपक्षयित परत देता है।
- वृहत् संचलन में मृदा सर्पण, सॉलिफ्लक्शन, भूस्खलन, कीचड़ प्रवाह और हिमस्खलन।
- मृदा रेगोलिथ से मूल चट्टान, जलवायु, उच्चावच, जीव और समय के प्रभाव में बनती है।
