पर्यावरण चुनौतियां
पर्यावरण चुनौतियां
झारखंड की पर्यावरणीय समस्याएं उसी स्रोत से आती हैं जिससे उसकी संपदा आती है। खनन, ताप बिजली और इस्पात ने राज्य की अर्थव्यवस्था बनाई और साथ ही सबसे गंभीर प्रदूषण, भूमि क्षरण तथा विस्थापन भी पैदा किया।
मूल टकराव — खनिज संपदा बनाम वन, जल और बसे हुए समुदाय
खनन से जुड़ी क्षति
- खुली खदानें कोयला और लौह पट्टियों में वन तथा ऊपरी मिट्टी हटा देती हैं
- ओवरबर्डन के ढेर खेती की जमीन घेरते हैं और स्थानीय जल निकास बदल देते हैं
- झरिया दशकों से जल रही भूमिगत कोयला आग के लिए जाना जाता है
- छोड़ी गई खदानों के गड्ढे पानी से भरकर सुरक्षा और स्वास्थ्य का खतरा बनते हैं
- खदानों और ढुलाई सड़कों की धूल खनन जिलों में श्वसन रोग बढ़ाती है
- स्पंज आयरन और पत्थर क्रशर इकाइयां स्थानीय वायु प्रदूषण और बढ़ाती हैं
जल और वायु
- दामोदर में खदान वाशरी का बहाव, फ्लाई ऐश और शहरी मलजल जाता है
- ताप संयंत्रों के आसपास फ्लाई ऐश तालाब मिट्टी और भूजल को दूषित करते हैं
- पठार पर तेज बहाव के कारण राज्य अच्छी वर्षा के बावजूद जल-अभावग्रस्त है
- भूजल स्तर गिरने से गर्मियों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है
- धनबाद और औद्योगिक पट्टी में वायु गुणवत्ता प्रायः खराब दर्ज होती है
वन और भूमि
- खनन और अवसंरचना के लिए वन भूमि का उपयोग सबसे बड़ा कानूनी विवाद है
- सारंडा लौह अयस्क खनन और बड़े साल वन के टकराव का उदाहरण है
- वन आवरण हटे ढलानों पर मृदा अपरदन भारी है
- भू-उपयोग बदलने से हाथी गलियारे संकरे हुए और संघर्ष बढ़ा
- अवैध खनन और अनियंत्रित पत्थर खनन क्षति को और बढ़ाते हैं
विस्थापन और उसके परिणाम
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| खनन परियोजनाएं | खनिज पट्टियों में भूमि और घर की हानि |
| बांध और जलाशय | गांवों तथा खेती की भूमि का जलमग्न होना |
| औद्योगिक टाउनशिप | कृषि और वन भूमि का अधिग्रहण |
| कमजोर पुनर्वास | शहरों की ओर दिहाड़ी मजदूरी के लिए पलायन |
| सामुदायिक भूमि की हानि | चराई और वनोपज तक पहुंच में कमी |
क्या किया जा रहा है
- हर परियोजना के लिए पर्यावरणीय और वन स्वीकृति की अनिवार्यता
- वन अधिकार अधिनियम 2006 समुदायों को भूमि परिवर्तन पर कानूनी आवाज देता है
- पांचवीं अनुसूची और PESA अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा परामर्श अनिवार्य करते हैं
- वृक्षारोपण, चेक डैम और जलग्रहण कार्यक्रम अपरदन तथा जल की समस्या पर काम करते हैं
- खनन के बाद भूमि सुधार अनिवार्य है पर उसका पालन असमान है
- खनन और वन भूमि पर न्यायालय के निर्णय बार-बार राज्य नीति तय करते हैं
याद रखने की ट्रिक — चार समस्या, एक जड़ — प्रदूषण, कटाई, विस्थापन, जल संकट, और जड़ है खनन। यह एक लाइन लिख दें तो पूरा उत्तर बन जाता है।
यहां लोग गलती करते हैं — अधिक वर्षा और जल उपलब्धता एक नहीं हैं।
✗ अच्छी वर्षा का अर्थ है झारखंड में जल समस्या नहीं | ✓ कठोर चट्टान पर तेज बहाव से राज्य गर्मियों में जल-अभावग्रस्त रहता है
✗ विस्थापन केवल बांध से होता है | ✓ विस्थापन खनन, उद्योग और बांध — तीनों से होता है
एग्जाम पॉइंटर — JPSC मुख्य परीक्षा का यह पसंदीदा टॉपिक है — 'खनन और पर्यावरण का संतुलन' पर पूरा प्रश्न आता है, और उत्तर में सारंडा, झरिया तथा दामोदर का उदाहरण देना चाहिए। JSSC और JKCE में सीधा — झरिया किस समस्या के लिए जाना जाता है। करेंट अफेयर्स से भी यह टॉपिक जुड़ जाता है।
एक नजर में
- मूल कारण — खनन और भारी उद्योग
- झरिया — लंबे समय से जल रही भूमिगत कोयला आग
- खुली खदानें वन और ऊपरी मिट्टी हटाती हैं
- दामोदर वाशरी और शहरी बहाव से अत्यधिक प्रदूषित
- फ्लाई ऐश तालाब मिट्टी और भूजल पर असर डालते हैं
- 1,200 से 1,400 मिमी वर्षा के बावजूद जल संकट
- सारंडा — लौह अयस्क खनन बनाम साल वन
- संकरे होते हाथी गलियारे से मानव-वन्यजीव संघर्ष
- खदान, बांध और टाउनशिप से विस्थापन
- उपाय — FRA 2006, PESA, स्वीकृति प्रक्रिया, जलग्रहण कार्य
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