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मुगल काल में झारखंड

By ExamAtlas · 19/9/2026

मुगल काल में झारखंड

झारखंड पर मुगल नियंत्रण उथला और बार-बार चुनौती में रहा। इतिहासकार इस क्षेत्र को कोकरह और झारखंड कहते हैं, और अकबर से औरंगजेब तक हर शासनकाल ने अभियान भेजे जिन्होंने युद्ध जीते पर पठार को कभी स्थायी मुगल सूबा नहीं बना सके।

मुगल नाम — कोकरह (खुखरा) और झारखंड | नियंत्रण का स्वरूप — कर, प्रशासन नहीं

शासनकाल के अनुसार

बादशाहझारखंड से जुड़ी घटनापरिणाम
अकबरअभियानों से कोकरह नाममात्र अधीनता मेंकर स्वीकार, स्थानीय शासन जारी
जहांगीर1615 में इब्राहिम खान फतेह जंग ने दुर्जन साल को हरायादुर्जन साल बंदी, बाद में मुक्त
शाहजहांपलामू और कोकरह पर नए सिरे से दबावकर फिर से लागू, स्थायी अधिकार नहीं
औरंगजेब1660 में दाउद खान का पलामू पर आक्रमणकिले गिरे, बाद में मेदिनी राय ने वापस लिया

दुर्जन साल प्रकरण

  • 1615 में इब्राहिम खान फतेह जंग के नेतृत्व में मुगल सेना ने नागवंशी शासक को हराया
  • दुर्जन साल बंदी बनाए गए और वर्षों तक कैद में रहे
  • परंपरा के अनुसार उन्होंने नकली रत्नों में असली हीरा पहचानकर मुक्ति पाई
  • उन्हें शाह उपाधि के साथ बहाल किया गया और वार्षिक कर तय हुआ
  • यह प्रकरण मुगल नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है — अधीन करो, हटाओ मत

पलामू और मुगल शक्ति की सीमा

  • औरंगजेब के समय दाउद खान ने 1660 में पलामू पर चढ़ाई की
  • चेरो किले गिरे और विनाश हुआ, पर कब्जा टिका नहीं
  • मेदिनी राय ने राज्य वापस पा लिया और मुगल उसे दोबारा नहीं ले सके
  • पलामू यही पैटर्न दिखाता है — मुगल अभियान जीत सकते थे, पर क्षेत्र हार जाते थे
  • वन, पहाड़ और राजस्व आधार का अभाव स्थायी कब्जे को अलाभकर बनाता था

मुगल शासन उथला क्यों रहा

  • पठार में कर लेने लायक बड़ा स्थायी कृषि अधिशेष नहीं था
  • भूगोल रक्षक के पक्ष में था — वन आवरण, पहाड़ और बिखरे किले
  • स्थानीय राजा कर देने वाले के रूप में उपयोगी थे, उन्हें सूबेदार से बदलना घाटे का सौदा था
  • मुगल रुचि मुख्यतः हीरा, हाथी और मार्ग सुरक्षा में थी, बंगाल और ओडिशा की ओर
  • परिणामस्वरूप यहां की भू-धृति और ग्राम संस्थाएं ब्रिटिश काल तक अक्षुण्ण रहीं

पक्के करने लायक नाम और शब्द

  • कोकरह / खुखरा — नागवंशी क्षेत्र का मुगल नामबार-बार पूछा जाता है
  • इब्राहिम खान फतेह जंग — 1615 में दुर्जन साल को हराने वाला सेनापति
  • दाउद खान — 1660 में पलामू पर औरंगजेब का सेनापति
  • मेदिनी राय — पलामू वापस पाने वाले चेरो शासक
  • बिहार सूबा — वह मुगल प्रांत जिससे यह क्षेत्र औपचारिक रूप से जुड़ा था

याद रखने की ट्रिक — चार बादशाह, चार याद — अकबर = नाम (कोकरह), जहांगीर = 1615 दुर्जन साल, शाहजहां = दबाव, औरंगजेब = 1660 पलामू। केवल दो साल रटने हैं: 1615 और 1660

यहां लोग गलती करते हैं — दो अभियान और दो वंश अलग हैं।

1615 में पलामू पर हमला हुआ  |   1615 में कोकरह पर हमला, दुर्जन साल (नागवंशी) बंदी बने

1660 में नागवंशी हारे  |   1660 में पलामू के चेरो पर दाउद खान का आक्रमण हुआ

एग्जाम पॉइंटर — JPSC प्रारंभिक में मुगल-झारखंड संबंध पर कथन प्रश्न आता है और मुख्य परीक्षा में 'यहां मुगल शासन गहरा क्यों नहीं हुआ' प्रकार का विश्लेषणात्मक प्रश्न। JSSC CGL, JTGLCCE और JTET में केवल वर्ष और नाम — 1615, 1660, दुर्जन साल, दाउद खान। दो साल और दो नाम पक्के कर लें, अध्याय का यह भाग समाप्त।

एक नजर में

  • क्षेत्र का मुगल नाम — कोकरह / खुखरा
  • औपचारिक रूप से बिहार सूबा से संलग्न
  • 1615 — इब्राहिम खान फतेह जंग ने दुर्जन साल को हराया
  • हीरा परीक्षा के बाद मुक्ति, शाह उपाधि
  • 1660 — औरंगजेब के समय दाउद खान का पलामू पर हमला
  • मेदिनी राय ने पलामू वापस लिया, मुगल दोबारा न ले सके
  • नियंत्रण कर के रूप में था, प्रांतीय प्रशासन के रूप में नहीं
  • बड़ा कृषि अधिशेष न होने से गहरा नियंत्रण अलाभकर था
  • मुगल रुचि — हीरा, हाथी, मार्ग सुरक्षा
  • स्थानीय भू-धृति और ग्राम संस्थाएं ब्रिटिश काल तक बचीं

अब इसी चैप्टर के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में प्रैक्टिस करें — झारखंड GK के JPSC और JSSC दोनों पैटर्न में।

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