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कोयले और लोहे के अलावा झारखंड में सिंहभूम का तांबा, जादूगोड़ा का यूरेनियम, पाट सतहों का बॉक्साइट और कोडरमा का अभ्रक है। इनमें से कई खनिजों में राज्य को देश में एकाधिकार या लगभग एकाधिकार प्राप्त है।

तांबा — सिंहभूम | यूरेनियम — जादूगोड़ा | बॉक्साइट — लोहरदगा पट्टी | अभ्रक — कोडरमा

खनिज और स्थान

खनिजमुख्य क्षेत्रटिप्पणी
तांबाघाटशिला, मोसाबनी, राखा, पूर्वी सिंहभूमभारत के लगभग 18.5 प्रतिशत तांबा अयस्क
यूरेनियमजादूगोड़ा, पूर्वी सिंहभूमभारत की सबसे पुरानी यूरेनियम खदान
बॉक्साइटलोहरदगा, गुमला, लातेहारपाट सतहों की लैटेराइट से
अभ्रककोडरमा, गिरिडीहभारत की उत्कृष्ट अभ्रक पट्टी
क्यानाइटलप्सा बुरू, सिंहभूमउच्चतापसह खनिज
चूना पत्थरपलामू, हजारीबाग, सिंहभूमसीमेंट और इस्पात फ्लक्स
चीनी मिट्टीराजमहल की ओर और सिंहभूमसिरेमिक उद्योग
ग्रेफाइट और एपेटाइटपलामू और सिंहभूमऔद्योगिक और उर्वरक उपयोग

तांबा

  • सिंहभूम तांबा पट्टी भारत के प्राचीनतम कार्यरत तांबा क्षेत्रों में है
  • मुख्य केंद्र — घाटशिला, मोसाबनी और राखा
  • हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड यहां खदानें और स्मेल्टर चलाती है
  • राज्य में भारत के लगभग 18.5 प्रतिशत तांबा अयस्क भंडार हैं
  • इस पट्टी में तांबे का काम प्रागैतिहासिक ताम्र निधि काल तक जाता है

यूरेनियम और अभ्रक

  • पूर्वी सिंहभूम का जादूगोड़ा भारत की सबसे पुरानी यूरेनियम खदान हैबार-बार पूछा जाता है
  • यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) खदानें चलाता है, मुख्यालय जादूगोड़ा
  • बड़े पैमाने पर यूरेनियम उत्पादन करने वाला झारखंड एकमात्र राज्य है
  • कोडरमा को भारत की अभ्रक राजधानी कहा जाता है
  • अभ्रक का उपयोग विद्युत रोधन तथा प्रसाधन और पेंट में होता है
  • अभ्रक पट्टी के पतन से बड़ी संख्या में परित्यक्त खदानें और स्क्रैप संग्रह का काम बचा

बॉक्साइट और शेष

  • बॉक्साइट लोहरदगा, गुमला और लातेहार की ऊंची पाट सतहों की लैटेराइट से आता है
  • यह एल्युमीनियम का अयस्क है और राज्य के बाहर के स्मेल्टरों को जाता है
  • लप्सा बुरू का क्यानाइट उच्चतापसह ईंटों में प्रयुक्त होता है
  • चूना पत्थर और डोलोमाइट सीमेंट संयंत्रों और इस्पात निर्माण को सहारा देते हैं
  • पाइराइट एक और खनिज है जिसका प्रमुख स्रोत झारखंड है

नाम याद रखने लायक सार्वजनिक संस्थान

संस्थानखनिज या भूमिका
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेडघाटशिला में तांबा खनन और गलन
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेडयूरेनियम खनन, मुख्यालय जादूगोड़ा
भारत कोकिंग कोल लिमिटेडझरिया पट्टी में कोकिंग कोल
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेडरांची और करनपुरा पट्टी में कोयला
झारखंड राज्य खनिज विकास निगमराज्य स्तर पर खनिज विकास

ये खनिज राज्य से बाहर क्यों मायने रखते हैं

  • जादूगोड़ा का यूरेनियम राष्ट्रीय परमाणु ईंधन चक्र को पोसता है
  • बॉक्साइट अन्य राज्यों के एल्युमीनियम स्मेल्टरों को सहारा देता है
  • सिंहभूम का तांबा भारत के गिने-चुने स्रोतों में से एक है
  • क्यानाइट और चूना पत्थर स्वयं इस्पात उद्योग की सामग्री हैं
  • इस प्रकार एक ही राज्य कई राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के भीतर बैठा है

याद रखने की ट्रिक — चार नाम, चार जिले — तांबा घाटशिला, यूरेनियम जादूगोड़ा, बॉक्साइट लोहरदगा, अभ्रक कोडरमा। चार जोड़ियां याद, चार प्रश्न पक्के।

यहां लोग गलती करते हैं — दोनों सिंहभूम जिलों में अलग खनिज हैं।

✗ लौह अयस्क पूर्वी सिंहभूम से आता है  |  ✓ लौह अयस्क पश्चिमी सिंहभूम में है; तांबा और यूरेनियम पूर्वी सिंहभूम में

✗ बॉक्साइट लोहे का अयस्क है  |  ✓ बॉक्साइट एल्युमीनियम का अयस्क है

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE, JKCE और JTET में खनिज-जिला मिलान हर बार आता है — सबसे आसान पक्का अंक। JPSC में यूरेनियम के स्वास्थ्य प्रभाव और बॉक्साइट खनन का पर्यावरणीय असर मुख्य परीक्षा में पूछा जा सकता है। तालिका रोज एक बार देखें, यह रटने वाला भाग है।

एक नजर में

  • तांबा — घाटशिला, मोसाबनी, राखा; पूर्वी सिंहभूम
  • तांबा हिस्सा — भारत का लगभग 18.5 प्रतिशत
  • यूरेनियम — जादूगोड़ा, भारत की सबसे पुरानी खदान
  • UCIL का मुख्यालय जादूगोड़ा में
  • बॉक्साइट — लोहरदगा, गुमला, लातेहार, लैटेराइट से
  • बॉक्साइट एल्युमीनियम का अयस्क है
  • अभ्रक — कोडरमा और गिरिडीह; कोडरमा अभ्रक राजधानी
  • क्यानाइट — लप्सा बुरू, सिंहभूम
  • चूना पत्थर — पलामू, हजारीबाग, सिंहभूम
  • लौह अयस्क पश्चिमी सिंहभूम में; तांबा-यूरेनियम पूर्वी में

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