सदान और अन्य समाज
Sadan and Other Communities
झारखंड केवल जनजातीय नहीं है। सदान इस क्षेत्र के वे मूल निवासी गैर-जनजातीय समुदाय हैं जो यहां की क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं, और जनजातीय समूहों के साथ मिलकर वे राज्य का मिश्रित समाज बनाते हैं।
सदान — क्षेत्र के मूल गैर-जनजातीय समुदाय | भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया
सदान कौन हैं
- सदान क्षेत्र में लंबे समय से बसे गैर-जनजातीय समुदाय हैं
- वे किसी जनजातीय भाषा के बजाय पठार की क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं
- मुख्य भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया
- इनमें कुड़मी, अहीर या यादव, तेली, लोहार, कुम्हार, सुंडी आदि समुदाय आते हैं
- इन्हें दिकू से अलग माना जाता है, जो क्षेत्र के बाहर से आए लोगों के लिए प्रयुक्त शब्द है
- इन्होंने जनजातीय समूहों के साथ मिलकर राज्य आंदोलन का समर्थन किया
मिश्रित सामाजिक संरचना
| समूह | सामान्य विवरण |
|---|---|
| अनुसूचित जनजाति | जनसंख्या का लगभग 26.2 प्रतिशत, 32 समुदाय |
| सदान | क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले मूल गैर-जनजातीय समुदाय |
| अनुसूचित जाति | जनसंख्या का लगभग 12 प्रतिशत |
| बाद में आए समुदाय | खनन, उद्योग और प्रशासन के साथ आए लोग |
| शहरी औद्योगिक आबादी | जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और रांची में केंद्रित |
क्षेत्रीय भाषाएं
- नागपुरी — रांची और दक्षिणी छोटानागपुर पट्टी में
- खोरठा — उत्तरी छोटानागपुर और संथाल परगना की ओर
- कुरमाली — कोल्हान और मानभूम से लगे जिलों में
- पंचपरगनिया — रांची के पास तमाड़ और बुंडू पट्टी में
- हिंदी राज्य की राजभाषा है और कई अन्य भाषाओं को द्वितीय भाषा का दर्जा मिला है
- ये क्षेत्रीय भाषाएं जनजातीय और सदान समुदायों के बीच साझा माध्यम हैं
सदान क्यों महत्वपूर्ण हैं
- इन्होंने राज्य की मांग को केवल जनजातीय नहीं, क्षेत्रीय मांग बनाया
- आदिवासी महासभा का नाम बदलकर झारखंड पार्टी करना इसी विस्तार को दिखाता है
- बिनोद बिहारी महतो कुड़मी और सदान आधार को JMM में लाए
- क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति जनजातीय तथा सदान दोनों में साझा हैं
- स्थानीयता और स्थानीय आरक्षण की बहस ठीक इसी अंतर पर टिकती है
पूछे जाने वाले बिंदु
- सदान का अर्थ — क्षेत्र के मूल गैर-जनजातीय समुदायबार-बार पूछा जाता है
- दिकू का अर्थ — बाहरी व्यक्ति
- रांची के आसपास की भाषा — नागपुरी
- उत्तरी छोटानागपुर पट्टी की भाषा — खोरठा
- सदान आधार को JMM में लाने वाले नेता — बिनोद बिहारी महतो
द्वितीय राजभाषा का दर्जा
- हिंदी राजभाषा है; सीमावर्ती जिलों में उर्दू, बांग्ला और ओड़िया का व्यापक प्रयोग है
- संथाली राज्य की एकमात्र जनजातीय भाषा है जो आठवीं अनुसूची में है
- कई जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला है
- जनजातीय भाषाओं में संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया और भूमिज आती हैं
- क्षेत्रीय भाषाओं में नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया, मगही, अंगिका और मैथिली आती हैं
- इसी भाषाई विविधता के कारण एक ही राज्य में इतनी मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं
याद रखने की ट्रिक — दो शब्द अलग रखें — सदान = क्षेत्र के मूल गैर-जनजाति, दिकू = बाहर से आया। और चार भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया।
यहां लोग गलती करते हैं — सदान और दिकू एक नहीं हैं।
✗ सदान का अर्थ है खनन के लिए आए बाहरी लोग | ✓ सदान क्षेत्र के मूल गैर-जनजातीय समुदाय हैं; दिकू का अर्थ बाहरी है
✗ खोरठा रांची के आसपास बोली जाती है | ✓ रांची के आसपास नागपुरी; खोरठा उत्तरी छोटानागपुर की ओर
एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में भाषा-क्षेत्र मिलान और सदान का अर्थ सीधे आते हैं। JPSC में स्थानीयता और स्थानीय नीति पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न बनता है, जहां यह अंतर समझना जरूरी है। चार भाषाओं के नाम पक्के कर लें।
एक नजर में
- सदान — क्षेत्र के मूल गैर-जनजातीय समुदाय
- दिकू — बाहरी, ऐतिहासिक रूप से जमींदार या व्यापारी
- सदान भाषाएं — नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया
- नागपुरी — रांची और दक्षिणी छोटानागपुर
- खोरठा — उत्तरी छोटानागपुर और संथाल परगना की ओर
- कुरमाली — कोल्हान और मानभूम से लगे जिले
- ST हिस्सा लगभग 26.2 प्रतिशत; SC हिस्सा लगभग 12 प्रतिशत
- हिंदी राज्य की राजभाषा है
- सदान के समर्थन ने राज्य आंदोलन को व्यापक किया
- बिनोद बिहारी महतो इस आधार को JMM में लाए
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