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झारखंड के राजकीय प्रतीक

State Symbols of Jharkhand

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झारखंड के राजकीय प्रतीक हैं — हाथी, कोयल, साल वृक्ष और पलाश पुष्प। आज प्रयोग में आ रहा राज्य चिह्न 15 अगस्त 2020 को अपनाया गया और इसने वर्ष 2000 के मूल चिह्न की जगह ली — यहीं अधिकांश अभ्यर्थी अंक गंवाते हैं।

पशु — हाथी | पक्षी — कोयल | वृक्ष — साल | पुष्प — पलाश

चार प्राकृतिक प्रतीक

प्रतीकनामचयन का कारण
राजकीय पशुभारतीय हाथीदलमा और पलामू प्रमुख हाथी क्षेत्र हैं
राजकीय पक्षीकोयलक्षेत्र को कोयलांचल नाम; दो नदियां कोयल नाम से
राजकीय वृक्षसाल (Sal)प्रमुख वन प्रजाति; जनजातीय अनुष्ठान में पवित्र
राजकीय पुष्पपलाश (Palash)पठार के वसंत का लाल फूल; सरहुल में प्रयुक्त

राज्य चिह्न (State Emblem)

  • वर्तमान चिह्न 15 अगस्त 2020 को अपनाया गया
  • जनवरी 2020 में घोषित सार्वजनिक डिजाइन प्रतियोगिता से चयनित
  • बाहरी वलय — हरे रंग पर हाथी, शक्ति और वन-संपदा के प्रतीक
  • मध्य वलय — पलाश पुष्प, वनस्पति और संस्कृति के प्रतीक
  • भीतरी वलय — पारंपरिक झारखंडी चित्रशैली में मानव आकृतियां
  • केंद्र — अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष तथा सत्यमेव जयते
  • 2000 से 2020 वाले चिह्न में अशोक चक्र के चारों ओर 'J' आकार की चार आकृतियां थीं

प्रतीकों से जुड़े परीक्षा-उपयोगी तथ्य

  • साल को स्थानीय भाषा में सखुआ कहते हैं, इसके पत्तों से पत्तल बनते हैं
  • पलाश सरहुल का फूल है, जो सबसे बड़ा जनजातीय वसंत पर्व है
  • हाथी जमशेदपुर के पास दलमा वन्यजीव अभयारण्य की प्रमुख प्रजाति है
  • कोयल के नाम पर ही उत्तरी कोयल और दक्षिणी कोयल नदियां हैं
  • राज्य की वन-संपदा के कारण ही राजकीय पशु और वृक्ष दोनों वन प्रजातियां हैं

इन्हें आपस में न मिलाएं

  • राजकीय पुष्प पलाश है और राजकीय वृक्ष साल — दोनों वन प्रजाति हैं पर श्रेणी अलग है
  • चिह्न 2020 में बदला, चारों प्राकृतिक प्रतीक नहीं बदले
  • राजकीय पशु हाथी है, बाघ नहीं — बाघ पलामू टाइगर रिजर्व से जुड़ा है जो संरक्षित क्षेत्र है, प्रतीक नहीं

झारखंड बनाम राष्ट्रीय प्रतीक

श्रेणीझारखंडभारत
पशुहाथीबाघ
पक्षीकोयलमोर
वृक्षसालबरगद
पुष्पपलाशकमल

पेपर में अक्सर झारखंड का प्रतीक राष्ट्रीय प्रतीक के साथ रखकर पूछा जाता है कि कौन-सा युग्म सही है। दोनों स्तंभ साथ याद कर लें तो यह जाल काम नहीं करता।

याद रखने की ट्रिक — चारों प्रतीक का जोड़ — को-सा-प-हा: कोयल (पक्षी), साल (वृक्ष), पलाश (पुष्प), हाथी (पशु)। चारों वन से जुड़े हैं — इसीलिए 'झारखंड' नाम सटीक बैठता है।

झारखंड के जनजीवन में साल और पलाश

  • साल राज्य के वनों में प्रमुख है और इसका फूलना सरहुल के मौसम की शुरुआत बताता है
  • साल के पत्तों से पत्तल और दोना बनते हैं — ग्रामीण आय का बड़ा गैर-काष्ठ स्रोत
  • साल बीज का तेल और साल की धूना (राल) लघु वनोपज के रूप में बिकते हैं
  • पलाश फागुन में खिलता है और पठार को वसंत का लाल-नारंगी रंग देता है
  • पलाश के फूल उबालकर होली का प्राकृतिक रंग बनाने की परंपरा है
  • जिस सरना स्थल पर साल वृक्ष खड़े होते हैं, वही जनजातीय गांव का पूजा-स्थल है

यहां लोग गलती करते हैं — चिह्न की तिथि सबसे अधिक गलत होती है।

✗ राज्य चिह्न 15 नवंबर 2000 को अपनाया गया  |  ✓ वर्तमान चिह्न 15 अगस्त 2020 को अपनाया गया

✗ राजकीय पशु बाघ है  |  ✓ राजकीय पशु हाथी है

एग्जाम पॉइंटर — JSSC CGL, JTET और झारखंड पुलिस में यह टॉपिक सबसे अधिक आता है — सीधा मिलान या वन-लाइनर, यानी पक्के अंक। JPSC प्रारंभिक में कम आता है, पर जब आता है तो चिह्न के तत्वों या अपनाने के वर्ष पर, केवल नाम पर नहीं।

एक नजर में

  • राजकीय पशु — हाथी
  • राजकीय पक्षी — कोयल
  • राजकीय वृक्ष — साल (स्थानीय नाम सखुआ)
  • राजकीय पुष्प — पलाश
  • वर्तमान चिह्न 15 अगस्त 2020 को अपनाया गया
  • चिह्न सार्वजनिक डिजाइन प्रतियोगिता से चुना गया
  • चिह्न के वलय — हाथी, पलाश, मानव आकृति, केंद्र में सिंह शीर्ष
  • पुराना चिह्न (2000-2020) — अशोक चक्र और चार 'J' आकृतियां
  • पलाश सरहुल का फूल है
  • हाथी दलमा अभयारण्य की प्रमुख प्रजाति

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