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विद्रोहों की तुलना

By ExamAtlas · 19/9/2026

विद्रोहों की तुलना

झारखंड के विद्रोह प्रायः तुलना के रूप में पूछे जाते हैं — कौन नेता, कौन-सा वर्ष, कौन-सा क्षेत्र, क्या परिणाम। यह टॉपिक 1770 के दशक से 1920 तक के हर बड़े आंदोलन को एक ही ग्रिड में रखता है, ताकि पूरा अध्याय मिनटों में दोहराया जा सके।

रटने का क्रम — पहाड़िया, तिल्का, चुआर, कोल, हूल, खेरवार, सरदारी, उलगुलान, ताना भगत

मास्टर तालिका

आंदोलनकालनेतासमुदाय और क्षेत्र
पहाड़िया विद्रोह1770 से 1780 के दशक की शुरुआतराजमहल के पहाड़ी सरदारपहाड़िया, राजमहल पहाड़ी
तिल्का मांझी1784 से 1785तिल्का मांझीराजमहल और भागलपुर पट्टी
चुआर विद्रोह18वीं सदी का उत्तरार्धस्थानीय सरदार और पाइकभूमिज, जंगल महाल
कोल विद्रोह1831 से 1832बुधु भगतमुंडा, हो, उरांव; छोटानागपुर
भूमिज विद्रोह1832 से 1833गंगा नारायण सिंहभूमिज, बड़ाभूम
संथाल हूल1855 से 1856सिदो और कान्हू मुर्मूसंथाल, संथाल परगना
खेरवार / सफा होड़1870 का दशकभगीरथ मांझीसंथाल, संथाल परगना
सरदारी आंदोलन1858 से 1890 का दशकगांव के सरदारमुंडा और उरांव, छोटानागपुर
उलगुलान1899 से 1900बिरसा मुंडामुंडा, खूंटी और रांची पट्टी
ताना भगत1914 सेजतरा भगतउरांव, गुमला और लोहरदगा पट्टी

परिणाम, एक-एक पंक्ति में

  • पहाड़िया विद्रोह — समझौता नीति, हिल रेंजर्स, फिर 1832 में दामिन-ए-कोह
  • कोल विद्रोहदक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी 1834
  • भूमिज विद्रोह — जंगल महाल भंग, मानभूम जिला का गठन
  • संथाल हूलसंथाल परगना गैर-विनियमित जिले के रूप में
  • उलगुलानछोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908
  • ताना भगत — 1920 से राष्ट्रीय आंदोलन में विलय

समय के साथ पद्धति का बदलाव

चरणपद्धतिउदाहरण
पहला चरणबाहरी लोगों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोहकोल विद्रोह, संथाल हूल
मध्य चरणसुधार के साथ लगान से इनकारखेरवार और सफा होड़
कानूनी चरणअर्जी और अदालती मुकदमेसरदारी आंदोलन
जन चरणधार्मिक आधार वाला सशस्त्र आंदोलनउलगुलान
राष्ट्रीय चरणस्वतंत्रता संग्राम के भीतर अहिंसाताना भगत

इन सबके पीछे एक ही शिकायत

  • इस अध्याय का हर आंदोलन एक ही समस्या से शुरू होता है — भूमि का छिनना
  • माध्यम बदलता है — ठेकेदार, महाजन, जमींदार, कॉन्ट्रैक्टर, पर नुकसान वही है
  • ब्रिटिश उत्तर हमेशा प्रशासनिक रहा, कभी भूमि का पुनर्वितरण नहीं
  • इसीलिए विद्रोह सौ साल से अधिक तक लौटते रहे
  • यह श्रृंखला केवल काश्तकारी कानूनों से रुकती है — CNT अधिनियम 1908 और SPT अधिनियम 1949

याद रखने की ट्रिक — क्रम का जोड़ — प-ति-चु-कोल-हूल-खे-सर-उल-ताना। और परिणाम का जोड़ — कोल से 1834, हूल से 1855, उलगुलान से 1908। दो लाइन में पूरा अध्याय।

यहां लोग गलती करते हैं — परिणामों का मेल सबसे अधिक गलत होता है।

संथाल हूल का परिणाम CNT अधिनियम 1908 था  |   हूल का परिणाम संथाल परगना जिला था; CNT अधिनियम उलगुलान के बाद आया

कोल विद्रोह का परिणाम मानभूम जिला था  |   कोल विद्रोह से दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी बनी; मानभूम भूमिज विद्रोह के बाद बना

एग्जाम पॉइंटर — JPSC प्रारंभिक में इस अध्याय का सबसे आम प्रारूप मिलान है — विद्रोह, नेता और वर्ष का मेल। JSSC CGL और JKCE में एक-एक पंक्ति का सीधा प्रश्न। JPSC मुख्य में 'जनजातीय विद्रोहों की प्रकृति कैसे बदली' — इसका उत्तर ऊपर की पद्धति तालिका से सीधे बन जाता है। पूरे झारखंड GK में सर्वाधिक अंक यही अध्याय देता है।

एक नजर में

  • 1770-80 का दशक पहाड़िया | 1784-85 तिल्का मांझी
  • 18वीं सदी उत्तरार्ध चुआर विद्रोह
  • 1831-32 कोल विद्रोह — बुधु भगत
  • 1832-33 भूमिज विद्रोह — गंगा नारायण सिंह
  • 1855-56 संथाल हूल — सिदो और कान्हू
  • 1870 का दशक खेरवार और सफा होड़ — भगीरथ मांझी
  • 1858-1890 का दशक सरदारी आंदोलन — गांव के सरदार
  • 1899-1900 उलगुलान — बिरसा मुंडा
  • 1914 ताना भगत — जतरा भगत
  • परिणाम — 1834 एजेंसी, 1855 जिला, 1908 CNT अधिनियम

अब इन सभी विद्रोहों पर मिश्रित प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में प्रैक्टिस करें — झारखंड GK के JPSC और JSSC दोनों पैटर्न में।

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