विधानसभा और राज्यपाल
विधानसभा और राज्यपाल
झारखंड में 81 सीटों वाली एकसदनीय विधायिका है और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त राज्यपाल हैं। यहां राज्यपाल की भूमिका अधिकांश राज्यों से बड़ी है, क्योंकि पांचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों पर उन्हें विशेष शक्तियां देती है।
विधानसभा — 81 सीट | ST आरक्षित 28, SC आरक्षित 9 | विधान परिषद नहीं
विधानसभा
- 81 सीट, सामान्य कार्यकाल पांच वर्षबार-बार पूछा जाता है
- आरक्षित सीट — अनुसूचित जनजाति 28 और अनुसूचित जाति 9
- सदन एकसदनीय है — झारखंड में विधान परिषद नहीं है
- सदन की अध्यक्षता अध्यक्ष (Speaker) करते हैं, सहयोग में उपाध्यक्ष
- बैठकें प्रायः रांची में होती हैं, कुछ वर्षों में एक सत्र दुमका में भी
- झारखंड से 14 लोकसभा सदस्य और 6 राज्यसभा सदस्य जाते हैं
राज्यपाल
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त, पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
- राज्य कार्यपालिका के प्रमुख; समस्त कार्यपालिका कार्य उन्हीं के नाम से होते हैं
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति और उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति
- विधानसभा का सत्र आहूत करना, सत्रावसान और विघटन
- विधेयकों को स्वीकृति देना, रोकना, या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना
- महाधिवक्ता तथा राज्य आयोगों के सदस्यों की नियुक्ति
अनुसूचित क्षेत्रों पर विशेष शक्ति
- पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यपाल की विशेष भूमिका है
- राज्यपाल निर्देश दे सकते हैं कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई कानून वहां लागू न हो या संशोधन के साथ लागू हो
- राज्यपाल उन क्षेत्रों में शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकते हैं
- ऐसे विनियम भूमि हस्तांतरण पर रोक और साहूकारी पर नियंत्रण कर सकते हैं
- राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों पर वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को भेजते हैं
- जनजातीय सलाहकार परिषद इसी संवैधानिक योजना के तहत काम करती है
विधानसभा और राज्यपाल एक नजर में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विधानसभा सीट | 81, एकसदनीय |
| ST आरक्षित सीट | 28 |
| SC आरक्षित सीट | 9 |
| लोकसभा सीट | 14 |
| राज्यसभा सीट | 6 |
| पीठासीन अधिकारी | विधानसभा अध्यक्ष |
| राज्यपाल की नियुक्ति | भारत के राष्ट्रपति द्वारा |
पूछे जाने वाले बिंदु
- विधानसभा सीटों की संख्या — 81
- आरक्षित सीट — 28 ST और 9 SC
- क्या झारखंड में विधान परिषद है — नहीं
- राज्यपाल की विशेष शक्ति का संवैधानिक आधार — पांचवीं अनुसूची
- अनुसूचित क्षेत्रों की रिपोर्ट किसे — राष्ट्रपति को
विधानसभा से जुड़े अन्य तथ्य
- विधानसभा का पहला गठन वर्ष 2000 में राज्य बनने के साथ हुआ
- बहुमत के लिए साधारण रूप से 41 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है
- अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का अनुपात देश में सर्वाधिक में से है
- विधानसभा में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और समितियों की वही व्यवस्था है जो अन्य राज्यों में है
- राज्यपाल का अभिभाषण प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र में होता है
- बजट सत्र में वित्त मंत्री बजट प्रस्तुत करते हैं और सदन उस पर मतदान करता है
याद रखने की ट्रिक — तीन आंकड़े एक साथ — 81 विधानसभा, 14 लोकसभा, 6 राज्यसभा। और दो आरक्षण — ST 28, SC 9।
यहां लोग गलती करते हैं — राज्यपाल की सामान्य शक्ति और पांचवीं अनुसूची वाली विशेष शक्ति अलग हैं।
✗ राज्यपाल राज्य के लिए कोई भी कानून बना सकते हैं | ✓ राज्यपाल केवल अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पांचवीं अनुसूची के तहत विनियम बना सकते हैं
✗ झारखंड में विधान परिषद है | ✓ झारखंड एकसदनीय है, विधान परिषद नहीं है
एग्जाम पॉइंटर — JPSC में राज्यपाल की पांचवीं अनुसूची वाली शक्ति प्रारंभिक और मुख्य दोनों में आती है — इसे TAC और PESA के साथ जोड़कर पढ़ें। JSSC CGL, JTGLCCE और JKCE में सीधा — कितनी सीट, कितनी आरक्षित। यह अध्याय का सबसे आसान टॉपिक है, इसलिए आंकड़े बिलकुल पक्के रखें।
एक नजर में
- विधानसभा — 81 सीट, एकसदनीय
- आरक्षित — 28 ST और 9 SC
- राज्य में विधान परिषद नहीं
- लोकसभा 14, राज्यसभा 6
- पीठासीन अधिकारी — अध्यक्ष
- राज्यपाल की नियुक्ति — राष्ट्रपति
- राज्यपाल राज्य कार्यपालिका के प्रमुख
- पांचवीं अनुसूची से अनुसूचित क्षेत्रों में विशेष शक्ति
- उन क्षेत्रों में कानून रोकने या संशोधित करने का अधिकार
- अनुसूचित क्षेत्रों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को
