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गुप्त युग: विज्ञान, कला और समाज

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2

गुप्त युग: विज्ञान, कला और समाज

गणित, खगोल, संस्कृत साहित्य और मंदिर स्थापत्य की उपलब्धियों के कारण गुप्त काल को प्रायः स्वर्ण युग कहा जाता है। यह नाम विवादित है, क्योंकि इसी काल में स्त्रियों और शूद्रों की सामाजिक स्थिति गिरी।

गणित और खगोल

  • आर्यभट ने आर्यभटीय लिखा और बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन-रात होते हैं, और ग्रहण छाया से होते हैं, किसी राक्षस से नहीं।
  • उन्होंने पाई का निकट मान दिया और त्रिभुज के क्षेत्रफल तथा वर्ग-घनमूल पर काम किया।
  • वराहमिहिर ने विश्वकोश जैसा बृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका लिखा, जो यूनानी सहित पांच खगोल पद्धतियों का सार है।
  • स्थानीय मान सहित दशमलव पद्धति प्रचलित थी, और शून्य की अवधारणा इसी परंपरा में परिपक्व हुई।

चिकित्सा और धातुकर्म

  • चिकित्सा में चरक और शल्य में सुश्रुत की परंपरा पढ़ी और आगे बढ़ाई गई; बाद में वाग्भट ने दोनों का सार दिया।
  • इस काल का दिल्ली के महरौली का लौह स्तंभ हजार वर्ष से अधिक समय से जंग नहीं पकड़ा - उन्नत धातुकर्म का प्रमाण।
  • बिहार में मिली विशाल तांबे की सुल्तानगंज बुद्ध प्रतिमा बड़े पैमाने की धातु ढलाई दिखाती है।

साहित्य

रचयिताकृतिप्रकार
कालिदासअभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूतनाटक और गीतिकाव्य
कालिदासरघुवंश, कुमारसंभवमहाकाव्य
विशाखदत्तमुद्राराक्षसराजनीतिक नाटक
शूद्रकमृच्छकटिकम्सामाजिक नाटक
अमरसिंहअमरकोशसंस्कृत कोश
विष्णु शर्मापंचतंत्रपशु कथाएं
  • संस्कृत दरबार, अभिलेख और साहित्य की भाषा बन गई और सरकारी प्रयोग में प्राकृत की जगह ले ली।
  • पुराणों ने वर्तमान रूप लिया, और दोनों महाकाव्य इसी काल में अंतिम रूप तक पहुंचे।

कला और स्थापत्य

  • मंदिर की नागर शैली शुरू होती है, जिसमें वर्गाकार गर्भगृह और स्तंभयुक्त मंडप होता है; देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भीतरगांव का ईंट मंदिर प्रमुख उदाहरण हैं।
  • उपदेश मुद्रा में सारनाथ की बुद्ध प्रतिमा, अपने सादे पारदर्शी वस्त्र और प्रभामंडल के साथ, गुप्त मूर्तिकला की श्रेष्ठ कृति है।
  • अजंता की कई गुफा चित्रकारियां इसी युग की हैं, जिनमें प्लास्टर की गई चट्टान पर प्राकृतिक रंग, प्रवाहमान रेखाएं और जातक विषय हैं।
  • धातु और मिट्टी की कला, तथा विदिशा के पास उदयगिरि गुफाएं जिनमें विशाल वराह पट्ट है, चित्र पूरा करती हैं।

समाज और स्वर्ण युग की बहस

  • वर्ण अधिक कठोर हुआ, और नए समूह तथा शिल्प समुदाय जुड़ने से जातियों की संख्या बढ़ी।
  • शूद्रों की स्थिति थोड़ी सुधरी, क्योंकि उन्हें कृषक बनने और महाकाव्य तथा पुराण सुनने की अनुमति मिली।
  • अस्पृश्यता कठोर हुई, और फाहियान लिखता है कि चांडाल नगर के बाहर रहते थे और आते समय संकेत देना पड़ता था।
  • स्त्रियों की स्थिति गिरी - कम आयु में विवाह फैला, संपत्ति अधिकार सिमटे, और भारत में सती का पहला स्पष्ट अभिलेखीय प्रमाण इसी काल का एरण अभिलेख है।
  • इसलिए स्वर्ण युग का नाम साहित्य, विज्ञान और कला पर ठीक बैठता है, सामाजिक व्यवस्था पर नहीं।

परीक्षा में कैसे आता है

रचयिता और कृति का सुमेलित कीजिए लगभग निश्चित है। तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि पृथ्वी के घूमने की बात किसने कही, नागर शैली का मंदिर कौन सा है, और जंगरहित लौह स्तंभ कहां है। कथन-आधारित प्रश्न स्वर्ण युग के दावे को स्त्रियों की स्थिति से जांचते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

संतुलित उत्तर के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक रिकॉर्ड अलग कीजिए। आर्थिक बिंदु भी जोड़िए - फाहियान समृद्ध और शांत समाज बताता है, पर व्यापार का ह्रास, सिक्कों की घटती शुद्धता और भूमि दान का फैलाव दिखाते हैं कि भौतिक आधार पहले ही कमजोर पड़ रहा था।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

आर्यभटीय वराहमिहिर ने लिखा  |   आर्यभटीय आर्यभट ने; बृहत्संहिता वराहमिहिर ने लिखी

महरौली लौह स्तंभ मौर्यों ने बनवाया  |   यह गुप्त काल का है

गुप्त युग में स्त्रियों की स्थिति सुधरी  |   स्थिति गिरी; सती का पहला अभिलेखीय प्रमाण एरण अभिलेख है

एक नजर में

  • आर्यभट ने पृथ्वी का घूमना और ग्रहण समझाए; वराहमिहिर ने बृहत्संहिता लिखी।
  • स्थानीय मान वाली दशमलव पद्धति और शून्य की अवधारणा इसी परंपरा में परिपक्व हुई।
  • महरौली लौह स्तंभ और सुल्तानगंज की तांबे की बुद्ध प्रतिमा धातुकर्म कौशल दिखाते हैं।
  • कालिदास, विशाखदत्त, शूद्रक, अमरसिंह और विष्णु शर्मा प्रमुख रचयिता हैं।
  • नागर मंदिर शैली शुरू; देवगढ़, भीतरगांव, सारनाथ बुद्ध और अजंता प्रमुख उदाहरण।
  • स्वर्ण युग कला-विज्ञान पर ठीक, समाज पर नहीं - वर्ण कठोर हुआ, स्त्री स्थिति गिरी।

अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।

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