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न्यायपालिका की स्वतंत्रता

Independence of the Judiciary

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NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 6

न्यायपालिका की स्वतंत्रता

न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ है कि न्यायाधीश कार्यपालिका, विधायिका या निजी हितों के दबाव से मुक्त होकर विधि और विवेक के अनुसार मामले तय कर सकें। इसका अर्थ जवाबदेही या संविधान से मुक्ति नहीं है।

संवैधानिक संरक्षण

  • कार्यकाल की सुरक्षा - न्यायाधीश को केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर, दोनों सदनों की कठिन विशेष बहुमत प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
  • निश्चित सेवा शर्तें - वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार संसद तय करती है और नियुक्ति के बाद इन्हें न्यायाधीश के प्रतिकूल नहीं बदला जा सकता, वित्तीय आपात को छोड़कर।
  • भारित व्यय - वेतन और प्रशासनिक व्यय संचित निधि पर भारित हैं, इसलिए उन पर संसद का वार्षिक मतदान नहीं होता।
  • विधायिका में चर्चा नहीं - कर्तव्य निर्वहन में न्यायाधीश के आचरण पर संसद या राज्य विधानमंडल में चर्चा नहीं हो सकती, हटाने के प्रस्ताव को छोड़कर।
  • अवमानना पर दंड की शक्ति - अनुच्छेद 129 और 215 उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को अभिलेख न्यायालय बनाते हैं जो अवमानना पर दंड दे सकते हैं।
  • सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोक - सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश भारत में किसी न्यायालय या प्राधिकरण के समक्ष पैरवी नहीं कर सकते।
  • कार्यपालिका से पृथक्करण - अनुच्छेद 50 राज्य को लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने का निर्देश देता है।
  • कर्मचारियों की नियुक्ति की शक्ति स्वयं न्यायपालिका के पास है, और उसका क्षेत्राधिकार साधारण विधान से घटाया नहीं जा सकता।

न्यायिक जवाबदेही

तंत्रकैसे काम करता है
संसद द्वारा हटानाअनुच्छेद 124(4) में सिद्ध कदाचार या असमर्थता पर
अपील और पुनरीक्षाउच्च न्यायालय त्रुटियां सुधारते हैं; उच्चतम न्यायालय अपने निर्णय की पुनरीक्षा कर सकता है
खुला न्यायालय और सकारण निर्णयकार्यवाही सार्वजनिक और निर्णय में कारण देना अनिवार्य
संपत्ति घोषणान्यायाधीश इसे व्यवहार और नीति के रूप में अपनाते हैं
आंतरिक प्रक्रियान्यायाधीशों के विरुद्ध शिकायतों के लिए न्यायपालिका का अपना तंत्र
  • हटाने की कठिनाई जानबूझकर रखी गई है - यह स्वतंत्रता की रक्षा करती है, पर इसी से अब तक कोई न्यायाधीश संवैधानिक प्रक्रिया से नहीं हटाया गया, जिससे जवाबदेही की बहस बढ़ती है।
  • नियुक्तियों में पारदर्शिता इस बहस का दूसरा आधा हिस्सा है, क्योंकि कॉलेजियम बिना वैधानिक ढांचे के काम करता है।

स्वतंत्रता क्यों आवश्यक है

  • न्यायपालिका मूल अधिकारों की संरक्षक है; कार्यपालिका पर निर्भर न्यायालय उसे रोक नहीं सकता।
  • यह संविधान की व्याख्याकार और संरक्षक है, और केंद्र-राज्य विवादों में अंतिम निर्णायक, जिसके लिए दोनों के बीच तटस्थता आवश्यक है।
  • यह कानून के शासन को लागू करती है, जिसके अंतर्गत सरकारी कार्रवाई को विधिक अधिकार चाहिए।
  • निर्माताओं ने अमेरिकी नमूने से स्वतंत्रता सोच-समझकर ली, और ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली रखी - इसीलिए भारत में कानून बनाने में संसदीय सर्वोच्चता और संवैधानिक व्याख्या में न्यायिक सर्वोच्चता साथ चलते हैं, जिन्हें मूल ढांचा सिद्धांत जोड़े रखता है।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि न्यायाधीशों का वेतन किस निधि पर भारित है और अभिलेख न्यायालय किन अनुच्छेदों से बनता है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि न्यायाधीश के आचरण पर संसद में चर्चा हो सकती है या नहीं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि किसी विशेष दबाव से कौन सा संरक्षण बचाता है।

UPSC / State PSC के लिए

निबंध के लिए सबसे तीखा सूत्र यह है कि स्वतंत्रता और जवाबदेही विरोधी नहीं, एक-दूसरे की पूर्वशर्त हैं - जवाबदेही रहित न्यायपालिका जनविश्वास खोती है, और कार्यपालिका पर निर्भर न्यायपालिका अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती। नियुक्तियों की बहस को इसी संतुलन की वर्तमान कसौटी के रूप में रखिए।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ न्यायाधीशों के वेतन पर संसद हर वर्ष मतदान करती है  |  ✓ ये संचित निधि पर भारित हैं और इन पर मतदान नहीं होता

✗ न्यायाधीश के आचरण पर संसद में स्वतंत्र बहस हो सकती है  |  ✓ नहीं हो सकती, हटाने के प्रस्ताव को छोड़कर

✗ न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ न्यायाधीश संविधान से ऊपर हैं  |  ✓ वे उससे बंधे हैं; स्वतंत्रता बाहरी दबाव से मुक्ति है

एक नजर में

  • कार्यकाल की सुरक्षा - हटाना केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता पर।
  • वेतन संचित निधि पर भारित और वार्षिक मतदान से बाहर।
  • नियुक्ति के बाद सेवा शर्तें न्यायाधीश के प्रतिकूल नहीं बदली जा सकतीं।
  • आचरण पर विधायिका में चर्चा नहीं, हटाने के प्रस्ताव को छोड़कर।
  • अनुच्छेद 129 और 215 अवमानना शक्ति देते हैं; सेवानिवृत्त न्यायाधीश वकालत नहीं कर सकते।
  • जवाबदेही हटाने, अपील, खुले न्यायालय और सकारण निर्णयों से चलती है।
  • स्वतंत्रता अधिकारों, संविधान, संघीय संतुलन और कानून के शासन की रक्षा करती है।

अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।

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