वर्षा वितरण और भारतीय जीवन में मानसून
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Climate" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Climate"
वर्षा वितरण और भारतीय जीवन में मानसून
भारत में वर्षा बहुत असमान है। कुछ स्थानों पर वर्ष में चार सौ सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है तो कहीं दस से भी कम। यह असमानता मानसून शाखाओं के मार्ग, पर्वतों की स्थिति और समुद्र से दूरी से बनती है, और तय करती है कि फसलें, आबादी और उद्योग कहां होंगे।
अधिक और कम वर्षा वाले क्षेत्र
- पवनाभिमुख पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर की पहाड़ियों और उप-हिमालयी पूर्वोत्तर में बहुत भारी वर्षा होती है।
- मेघालय के मॉसिनराम और चेरापूंजी पृथ्वी के सर्वाधिक वर्षा वाले स्थानों में हैं।
- गंगा मैदान के अधिकांश भाग, पूर्वी मध्य प्रदेश और पूर्वी दक्कन में मध्यम वर्षा होती है।
- पश्चिमी राजस्थान, लद्दाख तथा गुजरात, हरियाणा और पंजाब के कुछ भागों में कम वर्षा होती है।
- पवनविमुख दक्कन पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में है और शुष्क रहता है।
- गंगा मैदान में वर्षा कोलकाता से दिल्ली की ओर पश्चिम जाते हुए घटती है।
| क्षेत्र | वर्षा | कारण |
|---|---|---|
| पवनाभिमुख पश्चिमी घाट | बहुत अधिक | आर्द्र पवनें ऊपर उठने को विवश |
| पवनविमुख दक्कन | कम | वृष्टि छाया |
| पूर्वोत्तर की पहाड़ियां | बहुत अधिक | कीप जैसी पहाड़ियां पवन रोकती हैं |
| पश्चिमी राजस्थान | बहुत कम | पवनें अरावली के समानांतर चलती हैं |
परिवर्तनशीलता, सूखा और बाढ़
- परिवर्तनशीलता ठीक वहीं सबसे अधिक है जहां वर्षा सबसे कम है, इसलिए शुष्क क्षेत्र सबसे अधिक भुगतते हैं।
- कमजोर या विलंबित मानसून सूखा लाता है, जिससे खरीफ बुवाई और ग्रामीण आय प्रभावित होती है।
- अत्यधिक मानसून असम, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और तटीय ओडिशा में बाढ़ लाता है।
- उत्तर बिहार में हर वर्ष बाढ़ आती है क्योंकि कोसी, गंडक और बागमती नेपाल से भारी जल लाती हैं।
- वर्षा जल संचयन, नहरें और जलाशय इस असमान आपूर्ति को संतुलित करने में सहायक हैं।
मानसून और भारतीय जीवन
- भारतीय कृषि, विशेषकर खरीफ फसल, मानसून के समय पर निर्भर है।
- पूरा देश एक ही वर्षा की प्रतीक्षा करता है, जिससे मानसून को एकता देने वाला माना जाता है।
- कई त्योहार और पारंपरिक कृषि पंचांग मानसून के अनुसार चलते हैं।
- भूजल पुनर्भरण, जलविद्युत और पेयजल आपूर्ति सभी इसी पर निर्भर हैं।
वृष्टि छाया — पहाड़ी के पवनविमुख ओर का शुष्क क्षेत्र जहां उतरती वायु कम वर्षा देती है।
Exam me kaise aata hai
- भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र — मेघालय की पहाड़ियां
- पवनविमुख दक्कन शुष्क क्यों है — वृष्टि छाया
- वर्षा की परिवर्तनशीलता कहां सर्वाधिक है — जहां वर्षा सबसे कम है
- कौन सी फसल मानसून पर सबसे अधिक निर्भर है — खरीफ
UPSC/State PSC ke liye
- अरावली अरब सागर शाखा के लगभग समानांतर है, इसलिए पवनें राजस्थान के ऊपर बिना ऊपर उठे निकल जाती हैं और मरुस्थल शुष्क रहता है।
- एक ही वर्ष में भारत के अलग-अलग भागों में सूखा और बाढ़ दोनों हो सकते हैं, क्योंकि उसी मानसून का स्थानिक वितरण असमान है।
Yahan confuse hote hain
✗ राजस्थान शुष्क है क्योंकि मानसून वहां पहुंचता ही नहीं | मानसून ऊपर से गुजरता है पर ऊपर नहीं उठता, इसलिए वर्षा नहीं देता | ✓
✗ कोलकाता से दिल्ली की ओर वर्षा बढ़ती है | पश्चिम की ओर घटती है | ✓
✗ दक्कन दोनों ओर आर्द्र है | पवनाभिमुख ओर आर्द्र, पवनविमुख ओर शुष्क | ✓
Ek nazar me
- वर्षा अत्यंत असमान; मेघालय सर्वाधिक, पश्चिमी राजस्थान न्यूनतम।
- वृष्टि छाया पवनविमुख दक्कन को शुष्क रखती है।
- परिवर्तनशीलता वहीं सर्वाधिक जहां वर्षा सबसे कम।
- मानसून भारत को जोड़ता है और खरीफ फसल तय करता है।
Ab practice karein
Climate aur monsoon ke questions har exam me pakka aate hain. ExamAtlas ke mock test se apni taiyari abhi jaanchein.
