वायु प्रदूषण
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues" | NCERT कक्षा 8 • Science • अध्याय "Pollution of Air and Water"
वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण का अर्थ है वायु में किसी पदार्थ की इतनी अधिक सांद्रता कि वह जीवों या संपत्ति को हानि पहुंचाए। चूंकि वायु स्वतंत्र रूप से चलती है, एक स्थान पर छोड़ा गया प्रदूषण वहीं नहीं रहता, जिससे वायु सबसे कठिन माध्यम बन जाती है।
प्रदूषक और उनके स्रोत
- प्राथमिक प्रदूषक सीधे छोड़े जाते हैं, जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और कणिकीय पदार्थ।
- द्वितीयक प्रदूषक प्राथमिक प्रदूषकों की आपसी अभिक्रिया से वायु में बनते हैं, जैसे धरातल पर ओजोन।
- वाहन कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन छोड़ते हैं।
- उद्योग और तापीय विद्युत संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और फ्लाई ऐश छोड़ते हैं।
- फसल अवशेष, ईंधन लकड़ी और कचरा जलाना कई क्षेत्रों में बड़ा मौसमी स्रोत है।
- कणिकीय पदार्थ आकार से मापा जाता है, और महीन कण अधिक खतरनाक हैं क्योंकि वे फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं।
- खराब हवादार कमरों में जैव ईंधन पर पकाने से होने वाला भीतरी वायु प्रदूषण महिलाओं और बच्चों को सर्वाधिक हानि पहुंचाता है।
प्रभाव और नियंत्रण
- स्वास्थ्य प्रभावों में श्वसन रोग, दमा, फेफड़ों की घटती क्षमता, हृदय रोग और आंखों में जलन आते हैं।
- सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड वर्षा जल में घुलकर अम्ल वर्षा बनाते हैं, जो फसलों, भवनों और जलीय जीवन को हानि पहुंचाती है।
- धूम कोहरा (smog) धुएं और कोहरे का मिश्रण है; प्रकाश रासायनिक धूम कोहरा सूर्य प्रकाश में वाहन निकास से बनता है।
- कार्बन मोनोऑक्साइड इसलिए खतरनाक है कि वह ऑक्सीजन से कहीं अधिक प्रबलता से हीमोग्लोबिन से जुड़ जाती है।
- स्रोत पर नियंत्रण में स्वच्छ ईंधन, बेहतर इंजन, उत्प्रेरक परिवर्तक और विद्युतस्थैतिक अवक्षेपक लगते हैं।
- स्क्रबर औद्योगिक निकास से गैसें हटाते हैं और विद्युतस्थैतिक अवक्षेपक कण हटाते हैं।
- सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ रसोई ईंधन, वनरोपण और वायु गुणवत्ता की निगरानी इस उत्तर को पूरा करते हैं।
| प्रदूषक | मुख्य स्रोत | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| कार्बन मोनोऑक्साइड | वाहन निकास | हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन घटाती है |
| सल्फर डाइऑक्साइड | कोयला जलाने वाला उद्योग | अम्ल वर्षा, फेफड़ों को हानि |
| कणिकीय पदार्थ | धूल, धुआं, निर्माण | फेफड़ों में गहरी क्षति |
| धरातलीय ओजोन | द्वितीयक, सूर्य प्रकाश की अभिक्रिया से | आंख और फेफड़ों में जलन |
द्वितीयक प्रदूषक — वह प्रदूषक जो सीधे नहीं छोड़ा जाता बल्कि प्राथमिक प्रदूषकों की अभिक्रिया से वायु में बनता है।
Exam me kaise aata hai
- कौन सी गैस हीमोग्लोबिन से प्रबलता से जुड़ती है — कार्बन मोनोऑक्साइड
- अम्ल वर्षा किन प्रदूषकों से होती है — सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
- औद्योगिक निकास से कण कौन हटाता है — विद्युतस्थैतिक अवक्षेपक
- धरातलीय ओजोन किस प्रकार का प्रदूषक है — द्वितीयक
UPSC/State PSC ke liye
- महीन कणिकीय पदार्थ सर्वाधिक हानिकारक अंश है क्योंकि उसका छोटा आकार उसे शरीर के प्राकृतिक छन्नों से निकलकर फेफड़े के गहरे भाग तक पहुंचा देता है।
- द्वितीयक प्रदूषकों का नियंत्रण कठिन है क्योंकि उन पर छन्ना लगाने को कोई एक चिमनी नहीं होती; उत्तर में पूर्ववर्ती उत्सर्जन ही घटाने पड़ते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ सभी प्रदूषक सीधे छोड़े जाते हैं | द्वितीयक प्रदूषक वायु में ही बनते हैं | ✓
✗ ओजोन सदैव हानिकारक है | ऊपरी वायुमंडल की ओजोन रक्षा करती है; धरातल पर वह प्रदूषक है | ✓
✗ भीतरी वायु बाहरी से सदैव सुरक्षित है | भीतर जैव ईंधन पर पकाना भीतरी वायु को और खराब कर सकता है | ✓
Ek nazar me
- प्राथमिक प्रदूषक सीधे छोड़े जाते; द्वितीयक वायु में बनते हैं।
- वाहन, उद्योग, विद्युत संयंत्र और अवशेष जलाना मुख्य स्रोत हैं।
- प्रभावों में श्वसन रोग, अम्ल वर्षा और धूम कोहरा आते हैं।
- नियंत्रण में स्वच्छ ईंधन, उत्प्रेरक परिवर्तक, स्क्रबर और अवक्षेपक लगते हैं।
