चुनाव और निर्वाचन आयोग
NCERT Class 9 - Democratic Politics I, Chapter 3 • NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work
चुनाव और निर्वाचन आयोग
चुनाव वह तंत्र है जिससे जनता अपने शासक चुनती और बदलती है। चुनाव लोकतांत्रिक तभी है जब उसमें वास्तविक विकल्प हो, वह नियमित अंतराल पर हो, और उसे ऐसी संस्था कराए जो तत्कालीन सरकार से स्वतंत्र हो।
चुनाव लोकतांत्रिक कब है
- अनुच्छेद 326 और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के अंतर्गत हर वयस्क नागरिक के पास एक वोट है और हर वोट का मूल्य समान है।
- दलों और उम्मीदवारों का वास्तविक विकल्प हो, ताकि सत्ताधारी दल वास्तव में हार सके।
- यह विकल्प नियमित अंतराल पर मिले - सामान्यतः हर पांच वर्ष में।
- मतदाताओं का पसंदीदा उम्मीदवार वास्तव में निर्वाचित हो और पद संभाल सके।
- चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से हों, बिना डराने, धांधली या सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के।
- मताधिकार की आयु 1989 के 61वें संशोधन से 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
निर्वाचन आयोग
- अनुच्छेद 324 के अंतर्गत यह स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, वैधानिक नहीं।
- अपने प्रारंभिक इतिहास में यह अधिकतर समय एक सदस्यीय निकाय रहा और 1993 से यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा निर्वाचन आयुक्तों वाला बहु-सदस्यीय निकाय है।
- सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को, और यही उनका मुख्य संरक्षण है।
- अन्य निर्वाचन आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटा सकते हैं।
- आयोग की स्वतंत्रता मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल की सुरक्षा, प्रतिकूल न बदली जा सकने वाली सेवा शर्तों, और वैधानिक नहीं बल्कि संवैधानिक आधार पर टिकी है।
आयोग के कार्य
| कार्य | इसमें क्या आता है |
|---|---|
| चुनावों का अधीक्षण | संसद, राज्य विधानमंडल, तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के चुनाव |
| निर्वाचक नामावली | मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण और प्रकाशन |
| कार्यक्रम की अधिसूचना | तिथियों की घोषणा, नामांकन, जांच और वापसी |
| मान्यता और चिह्न | दलों को मान्यता, चुनाव चिह्न आवंटन, और गुटों के विवाद का निपटारा |
| आदर्श आचार संहिता | कार्यक्रम की घोषणा से दलों और उम्मीदवारों पर आचरण नियम लागू करना |
| अयोग्यता पर सलाह | बैठे सदस्यों की अयोग्यता पर राष्ट्रपति या राज्यपाल को सलाह, जो बाध्यकारी है |
| तंत्र का पर्यवेक्षण | प्रेक्षक नियुक्त करना, अधिकारियों का स्थानांतरण, और आवश्यक होने पर पुनर्मतदान |
- स्थानीय निकायों के चुनाव यह आयोग नहीं, बल्कि 73वें और 74वें संशोधन से बना राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।
- आदर्श आचार संहिता की अपनी कोई वैधानिक शक्ति नहीं है, पर यह अनुच्छेद 324 की आयोग की शक्तियों और उल्लंघन की राजनीतिक कीमत से लागू होती है।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि निर्वाचन आयोग किस अनुच्छेद से बना, मुख्य निर्वाचन आयुक्त कैसे हटाए जाते हैं, और मताधिकार की आयु किस संशोधन से घटी। कथन-आधारित प्रश्न भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग का अंतर जांचते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
हटाने की असमानता पर ध्यान दें - मुख्य निर्वाचन आयुक्त को न्यायाधीश जैसा संरक्षण है जबकि अन्य आयुक्त उनकी सिफारिश पर हटाए जा सकते हैं, जिसकी आलोचना यह है कि इससे वे कम सुरक्षित रहते हैं। आदर्श आचार संहिता पर यह बिंदु लिखिए कि उसका अधिकार परंपरागत और प्रतिष्ठा आधारित है, वैधानिक नहीं, और वह इसलिए चलती है क्योंकि दल उसे मानते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ पंचायत चुनाव निर्वाचन आयोग कराता है | ✓ ये राज्य निर्वाचन आयोग कराता है
✗ निर्वाचन आयोग वैधानिक निकाय है | ✓ यह अनुच्छेद 324 का संवैधानिक निकाय है
✗ आदर्श आचार संहिता संसद का बनाया कानून है | ✓ यह अधिनियम नहीं है; यह आयोग की संवैधानिक शक्तियों से लागू होती है
एक नजर में
- चुनाव तभी लोकतांत्रिक है जब वास्तविक विकल्प, नियमित अंतराल और निष्पक्ष संचालन हो।
- अनुच्छेद 326 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार देता है; 61वें संशोधन ने आयु 18 की।
- अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र संवैधानिक निकाय बनाता है।
- 1993 से यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों वाला बहु-सदस्यीय निकाय है।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाए जाते हैं।
- कार्यों में नामावली, कार्यक्रम, चिह्न, आदर्श आचार संहिता और अयोग्यता पर सलाह शामिल हैं।
- स्थानीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।
