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चुनाव प्रणाली और सुधार

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 3

चुनाव प्रणाली और सुधार

भारत लोकसभा और विधानसभाओं के लिए सर्वाधिक मत वाली (first past the post) प्रणाली अपनाता है - देश निर्वाचन क्षेत्रों में बंटा है और सबसे अधिक मत पाने वाला उम्मीदवार जीतता है, भले बहुमत न मिले। आनुपातिक प्रतिनिधित्व केवल राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव में है।

सर्वाधिक मत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व

बिंदुसर्वाधिक मत प्रणालीआनुपातिक प्रतिनिधित्व
इकाईएकल सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रबड़ा बहु-सदस्यीय क्षेत्र या सूची
कौन जीतता हैसबसे अधिक मत पाने वाला उम्मीदवारमतों के अनुपात में सीटों का आवंटन
मत और सीट का संबंधकम मत प्रतिशत पर भी अधिक सीटें संभवसीटें मत प्रतिशत के निकट रहती हैं
बनने वाली सरकारप्रायः स्थिर, अक्सर एकदलीयप्रायः गठबंधन, क्योंकि किसी को बहुमत कम मिलता है
भारत में प्रयोगलोकसभा और विधानसभाराज्यसभा, विधान परिषद, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति
  • निर्माताओं ने सर्वाधिक मत प्रणाली इसलिए चुनी कि उस समय कम साक्षरता वाले देश में यह समझने और चलाने में सरल थी, और इससे स्पष्ट विजेता तथा स्थिर सरकार बनती है।
  • इसकी कमजोरी यह है कि कोई दल बहुत कम मत प्रतिशत पर बड़ी संख्या में सीटें जीत सकता है, और बिखरे समर्थन वाले छोटे दलों को बहुत कम प्रतिनिधित्व मिलता है।

आरक्षण और चुनाव प्रक्रिया

  • अनुच्छेद 330 लोकसभा में और अनुच्छेद 332 विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित करता है।
  • आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में सभी मतदाता वोट देते हैं, पर चुनाव केवल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार लड़ सकते हैं।
  • परिसीमन आयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करता है और यह भी कि कौन सी सीटें आरक्षित होंगी।
  • प्रक्रिया अधिसूचना, नामांकन, जांच, वापसी, प्रचार, मतदान, मतगणना और परिणाम घोषणा से गुजरती है।
  • हर उम्मीदवार जमानत राशि सहित नामांकन पत्र और उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद संपत्ति, देनदारी, शैक्षिक योग्यता तथा आपराधिक मामलों का शपथपत्र देता है।
  • मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले प्रचार बंद करना होता है।

चुनाव सुधार और चुनौतियां

  • लागू हो चुके सुधार - 18 वर्ष मताधिकार आयु, मतदाता सत्यापन पर्ची सहित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, शपथपत्र की अनिवार्यता, उम्मीदवार के चुनाव खर्च की सीमा, आदर्श आचार संहिता, और उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद नोटा का विकल्प।
  • सुधार पर विचार करने वाली समितियों में दिनेश गोस्वामी समिति और इंद्रजीत गुप्त समिति शामिल हैं, जिनमें दूसरी ने चुनावों की सरकारी फंडिंग की सिफारिश की।
  • बनी हुई चुनौतियां - धन बल का प्रभाव, राजनीति का अपराधीकरण, सरकारी तंत्र का दुरुपयोग, जाति और संप्रदाय की अपील, पेड न्यूज, और दलों में आंतरिक लोकतंत्र की कमजोरी।
  • विचाराधीन सुझावों में गंभीर आरोपों वाले उम्मीदवारों के लिए कड़ी अयोग्यता, राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता, और आदर्श आचार संहिता को वैधानिक आधार देना शामिल हैं।
  • व्यवस्था की असली उपलब्धि यह है कि इन समस्याओं के बावजूद 1952 से केंद्र और राज्यों में सत्ता कई बार शांतिपूर्वक बदली है।

परीक्षा में कैसे आता है

कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि कौन सा निकाय कौन सी चुनाव प्रणाली अपनाता है। तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि कौन से अनुच्छेद सीटें आरक्षित करते हैं और मतदान से कितने समय पहले प्रचार बंद होता है। व्यावहारिक प्रश्न मत और सीट प्रतिशत देकर प्रणाली पहचानने को कहते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

वर्णनात्मक उत्तर में प्रतिनिधित्व और स्थिरता को तौलिए - आनुपातिक प्रतिनिधित्व मतों को अधिक सटीक दर्शाता है पर प्रायः गठबंधन देता है, जबकि सर्वाधिक मत प्रणाली मत-सीट संबंध बिगाड़ती है पर काम करने लायक बहुमत देती है। यह भी लिखें कि आरक्षित सीटें उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हैं, पृथक निर्वाचक मंडल बनाने के लिए नहीं - स्वतंत्रता पूर्व व्यवस्था से यही मुख्य अंतर है।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

आरक्षित क्षेत्र में केवल अनुसूचित जाति के मतदाता वोट देते हैं  |   सभी मतदाता वोट देते हैं; केवल उम्मीदवार आरक्षित वर्ग से होते हैं

राज्यसभा का चुनाव सर्वाधिक मत प्रणाली से होता है  |   वहां एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व है

नोटा को सबसे अधिक मत मिलने पर चुनाव रद्द हो जाता है  |   नोटा असहमति दर्ज करता है पर परिणाम रद्द नहीं करता

एक नजर में

  • लोकसभा और विधानसभा में एकल सदस्यीय क्षेत्रों से सर्वाधिक मत प्रणाली।
  • राज्यसभा, परिषद और राष्ट्रपति चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व।
  • अनुच्छेद 330 लोकसभा और 332 विधानसभा में अनुसूचित जाति-जनजाति सीटें आरक्षित करते हैं।
  • आरक्षित क्षेत्र सभी मतदाताओं के लिए खुले पर उम्मीदवार आरक्षित वर्ग से।
  • उम्मीदवार को संपत्ति, देनदारी और आपराधिक मामलों का शपथपत्र देना होता है।
  • मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले प्रचार बंद।
  • सुधारों में वीवीपैट सहित ईवीएम, नोटा, खर्च सीमा और आदर्श आचार संहिता।

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