उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 6
उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय
उच्च न्यायालय राज्य की न्यायपालिका के शीर्ष पर है, और उसके नीचे जिला तथा अधीनस्थ न्यायालयों का ढांचा है, जहां भारत के अधिकांश मामले वास्तव में शुरू और समाप्त होते हैं। न्यायिक कार्यभार का बड़ा हिस्सा यही उठाते हैं।
उच्च न्यायालय
- अनुच्छेद 214 से 231 उच्च न्यायालयों से संबंधित हैं। हर राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय है, पर संसद दो या अधिक राज्यों या किसी संघ राज्यक्षेत्र के लिए साझा उच्च न्यायालय बना सकती है।
- पहले तीन उच्च न्यायालय कलकत्ता, बंबई और मद्रास में 1862 में स्थापित हुए, संविधान से बहुत पहले।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और अन्य न्यायाधीशों के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद करते हैं।
- योग्यताएं - भारत का नागरिक, जिसने दस वर्ष न्यायिक पद धारण किया हो या दस वर्ष उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, जबकि उच्चतम न्यायालय की 65 वर्ष।
- किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद करते हैं।
उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
| प्रकार | विषय |
|---|---|
| मूल | राजस्व, नौवहन, अवमानना और चुनाव याचिकाओं से जुड़े मामले |
| रिट, अनुच्छेद 226 | अनुच्छेद 32 से व्यापक - मूल अधिकारों और किसी भी अन्य विधिक अधिकार के लिए |
| अपीलीय | अधीनस्थ न्यायालयों से सिविल और दांडिक अपील |
| पर्यवेक्षी, अनुच्छेद 227 | अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण, सैन्य अधिकरण छोड़कर |
| अधीनस्थ न्यायपालिका पर नियंत्रण | जिला न्यायपालिका की तैनाती, पदोन्नति और अनुशासन |
| अभिलेख न्यायालय | कार्यवाही साक्ष्य के रूप में, और अवमानना पर दंड की शक्ति |
अधीनस्थ न्यायालय
- अनुच्छेद 233 से 237 अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित हैं। जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करके करते हैं।
- सिविल पक्ष में पदानुक्रम जिला न्यायाधीश से अवर न्यायाधीशों होते हुए मुंसिफ न्यायालय तक जाता है।
- दांडिक पक्ष में यह सत्र न्यायाधीश से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट होते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट तक जाता है।
- सत्र न्यायाधीश विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंड दे सकते हैं, पर मृत्युदंड की पुष्टि उच्च न्यायालय से आवश्यक है।
- जिला न्यायपालिका पर नियंत्रण उच्च न्यायालय के पास है, जो अनुच्छेद 50 के अंतर्गत न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग रखने का व्यावहारिक रूप है।
नियमित न्यायालयों के विकल्प
- लोक अदालतें, जिन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 से वैधानिक आधार मिला, विवाद समझौते से निपटाती हैं; निर्णय बाध्यकारी होता है, अपील नहीं होती, और कोई न्यायालय शुल्क नहीं लगता।
- जो वहन नहीं कर सकते उन्हें नि:शुल्क विधिक सहायता अनुच्छेद 39क से मिलती है, जो राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर के विधिक सेवा प्राधिकरणों से दी जाती है।
- 42वें संशोधन से जोड़े गए अनुच्छेद 323क और 323ख ने सेवा मामलों, कर, औद्योगिक विवाद और अन्य विशेषीकृत क्षेत्रों के लिए अधिकरणों को संवैधानिक दर्जा दिया।
- ग्राम न्यायालय और परिवार न्यायालय न्याय को वादी के पास लाते हैं और नियमित न्यायालयों का बोझ घटाते हैं।
- पूरी व्यवस्था की मुख्य समस्या लंबित मामले और विलंब है, जिसके लिए अधिक न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय, वैकल्पिक विवाद समाधान और कंप्यूटरीकरण अपनाए गए हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न उच्च न्यायालय न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु, जिला न्यायाधीश की नियुक्ति, और लोक अदालत को वैधानिक दर्जा देने वाला अधिनियम पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में अनुच्छेद और क्षेत्राधिकार जुड़ते हैं। कथन-आधारित प्रश्न अनुच्छेद 32 और 226 की तुलना करते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
अनुच्छेद 227 और जिला न्यायपालिका पर उच्च न्यायालय के नियंत्रण के पीछे की संवैधानिक रचना समझिए - यह निचले न्यायालयों को राज्य कार्यपालिका से अलग रखता है और अनुच्छेद 50 को मूर्त करता है। लंबित मामलों पर मानक विश्लेषणात्मक बिंदु हैं - न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात, रिक्तियां, प्रक्रियागत विलंब और सरकारी मुकदमों का ऊंचा अनुपात।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति उच्च न्यायालय करता है | ✓ नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करके करते हैं
✗ सत्र न्यायाधीश का मृत्युदंड तुरंत प्रभावी होता है | ✓ उसकी पुष्टि उच्च न्यायालय से आवश्यक है
✗ हर राज्य का अपना अलग उच्च न्यायालय होना ही चाहिए | ✓ संसद दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय बना सकती है
एक नजर में
- अनुच्छेद 214 से 231 उच्च न्यायालयों के; साझा उच्च न्यायालय दो या अधिक राज्यों के लिए संभव।
- कलकत्ता, बंबई और मद्रास उच्च न्यायालय 1862 में स्थापित हुए।
- योग्यता दस वर्ष न्यायिक पद या दस वर्ष अधिवक्ता; सेवानिवृत्ति 62 वर्ष पर।
- अनुच्छेद 226 की रिट शक्ति अनुच्छेद 32 से व्यापक; अनुच्छेद 227 पर्यवेक्षी शक्ति देता है।
- जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करके करते हैं।
- सत्र न्यायाधीश के मृत्युदंड की पुष्टि उच्च न्यायालय से आवश्यक है।
- 1987 के अधिनियम से लोक अदालत, अनुच्छेद 39क से विधिक सहायता, 323क-323ख से अधिकरण।
