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विजयनगर प्रशासन और हम्पी

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II, Chapter 7

विजयनगर प्रशासन और हम्पी

विजयनगर का शासन सैनिक देने के बदले भूमि रखने वाले सेनानायकों के माध्यम से चलता था, जिसे अमर-नायक व्यवस्था कहते हैं। इसकी राजधानी, आज हम्पी के खंडहर, यह स्पष्ट दिखाती है - भारी किलेबंद नगर, जिसमें राजकीय और पवित्र केंद्र अलग-अलग हैं।

अमर-नायक व्यवस्था

  • राजा किसी सेनानायक, यानी नायक, को अमरम् नामक क्षेत्र देता था।
  • नायक उस क्षेत्र का राजस्व वसूलता, कुछ हिस्सा रखता, निश्चित संख्या में घोड़े, हाथी और सैनिक रखता, और शेष राजा को भेजता था।
  • उसे उपहारों सहित स्वयं दरबार में उपस्थित होना पड़ता था, विशेषकर महानवमी उत्सव पर, जो निष्ठा की वार्षिक पुनर्पुष्टि थी।
  • यह पद वंशानुगत होता गया, और सत्रहवीं शताब्दी में कई नायकों ने स्वतंत्र राज्य बना लिए - मदुरै, तंजावुर और जिंजी।
  • इतिहासकार इसमें दिल्ली सल्तनत की इक्ता से समानता देखते हैं, हालांकि अमरम् नौकरशाही आवंटन के बजाय स्थानीय भूस्वामित्व में जड़ा था।

गांव और राजस्व

  • अयगार व्यवस्था हर गांव को बारह वंशानुगत कर्मचारी देती थी - लेखाकार, चौकीदार, लोहार, कुम्हार आदि - जिन्हें कर मुक्त भूमि से भुगतान मिलता था।
  • राजस्व वस्तु के साथ नकद भी वसूला जाता था, और कर भारी थे क्योंकि सेना बड़ी और लगातार युद्धरत रहती थी।
  • भूमि, पेशे, विवाह और चराई पर कर थे, तथा सिंचाई पर अलग कर।
  • राजाओं ने जल कार्यों में निवेश किया - कमलापुरम् तालाब और नगर में पानी लाने वाली बड़ी नहरें।

हम्पी की बनावट

कल्पना कीजिए ग्रेनाइट की धूसर चट्टानों से भरी घाटी, जिसके उत्तर में नदी बहती है। पूरा नगर किलेबंदी के सात घेरों के भीतर है, जो बिना गारे के जोड़े गए विशाल पत्थर खंडों से बने हैं, इसलिए दीवारें प्राकृतिक चट्टानों के साथ चलती हैं। बाहरी दीवारें केवल भवन नहीं, खेत और जलाशय भी घेरती हैं, ताकि घेराबंदी में नगर स्वयं को खिला सके। भीतर दो क्षेत्र अलग हैं। उत्तर में नदी के साथ पवित्र केंद्र है, जो मंदिरों और स्तंभयुक्त गलियों से भरा है जहां तीर्थयात्री और व्यापारी मिलते थे। दक्षिण में राजकीय केंद्र है, चारदीवारी वाला क्षेत्र जिसमें चबूतरे, सभा भवन और परकोटे हैं, जिनके प्रवेश द्वार ऐसे मुड़े हैं कि सीधा धावा संभव नहीं।

हम्पी के स्मारक

  • विरुपाक्ष मंदिर सबसे पुराना है और आज भी पूजित है; उसका ऊंचा गोपुरम् कृष्णदेवराय ने जुड़वाया।
  • विट्ठल मंदिर में प्रसिद्ध पाषाण रथ है और वे स्तंभ हैं जिन्हें थपथपाने पर स्वर निकलते हैं।
  • महानवमी डिब्बा विशाल पाषाण चबूतरा है, जहां से राजा नौ रातों का उत्सव देखता था, जिसमें जुलूस, कुश्ती और सेना का प्रदर्शन होता था।
  • कमल महल और हाथीखाना मेहराब तथा गुंबद को भारतीय स्तंभों से जोड़ते हैं - दरबारी भवनों में इंडो-इस्लामिक प्रभाव का प्रमाण, धार्मिक भवनों में नहीं।
  • मंदिर द्वार विशाल रायगोपुरम् में बदल गए, जो प्रायः गर्भगृह से भी ऊंचे होते थे और मंदिर को दूर से दिखाते थे।
  • हम्पी का स्मारक समूह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। उन्नीसवीं शताब्दी में इस स्थल की पहचान अभियंता और पुरातत्वप्रेमी कॉलिन मैकेंजी ने की।
विशेषताविवरण
राजकीय केंद्रपरकोटे, महानवमी डिब्बा, कमल महल
पवित्र केंद्रनदी किनारे विरुपाक्ष और विट्ठल मंदिर
किलेबंदीसात घेरे, बिना गारे की चिनाई, भीतर खेत
मंदिर द्वाररायगोपुरम्, गर्भगृह से ऊंचा

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि अमरम् क्या था, अयगार कर्मचारी कितने थे, और पाषाण रथ किस मंदिर में है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि किलेबंदी के भीतर कृषि भूमि थी या नहीं - थी। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि अमर-नायक व्यवस्था साम्राज्य के बिखराव का कारण कैसे बनी।

UPSC / State PSC के लिए

अमर-नायक व्यवस्था को लाभ-हानि के सौदे की तरह देखिए - इसने राजा को बड़ी नौकरशाही के बिना बड़ी सेना दी, पर भूमि, सैनिक और स्थानीय जड़ों वाले क्षेत्रीय सरदार भी बना दिए। सत्रहवीं शताब्दी के नायक राज्य इसी का सीधा परिणाम हैं, और यही पतन की मानक संरचनात्मक व्याख्या है।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

कमल महल एक मंदिर है  |   यह राजकीय केंद्र का दरबारी भवन है, मंदिर नहीं

हम्पी की दीवारें गारे से बनी थीं  |   पत्थर के खंड बिना गारे के जोड़े गए थे

अमरम् कर मुक्त धार्मिक दान था  |   अमरम् सैनिक रखने के बदले दिया गया राजस्व क्षेत्र था

एक नजर में

  • अमर-नायक व्यवस्था - सैनिक और कर के बदले नायक को अमरम् क्षेत्र।
  • नायक महानवमी उत्सव में निष्ठा दोहराते थे; पद वंशानुगत होते गए।
  • अयगार व्यवस्था में हर गांव को बारह वंशानुगत कर्मचारी, भुगतान कर मुक्त भूमि से।
  • हम्पी में बिना गारे की किलेबंदी के सात घेरे, जिनके भीतर खेत और जलाशय।
  • नदी किनारे पवित्र केंद्र, दक्षिण में राजकीय केंद्र और महानवमी डिब्बा।
  • विरुपाक्ष और विट्ठल मंदिर, पाषाण रथ, कमल महल, हाथीखाना, रायगोपुरम्।

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