आर्द्रता, वर्षा और जलवायु प्रदेश
Humidity, Rainfall and Climatic Regions
NCERT Class 11 - Fundamentals of Physical Geography, Chapters 11 and 12
आर्द्रता, वर्षा और जलवायु प्रदेश
वायु में मौजूद जलवाष्प आर्द्रता है। जब वायु ठंडी होकर अपने ओसांक तक पहुंचती है तो वाष्प संघनित हो जाती है, और बूंदें भारी होने पर वर्षण के रूप में गिरती हैं। वर्ष भर के तापमान और वर्षा का प्रतिरूप ही जलवायु प्रदेश तय करता है।
आर्द्रता और संघनन
- सापेक्ष आर्द्रता मौजूद वाष्प और उस तापमान पर वायु की अधिकतम धारण क्षमता का अनुपात है, जो प्रतिशत में बताई जाती है; वायु गर्म होने पर यह घटती है और ठंडी होने पर बढ़ती है, भले वाष्प जोड़ी न जाए।
- ओसांक वह तापमान है जिस पर वायु संतृप्त हो जाती है और संघनन शुरू होता है।
- धरातल के पास संघनन से ओस बनती है जब ओसांक हिमांक से ऊपर हो, पाला जब वह हिमांक से नीचे हो, और कुहरा या कुहासा जब संघनन वायु के धूलकणों के चारों ओर हो।
मेघ और वर्षण
| मेघ समूह | उदाहरण | स्वरूप |
|---|---|---|
| उच्च मेघ | पक्षाभ, पक्षाभ स्तरी, पक्षाभ कपासी | पतले, रेशेदार और हिम कणों के बने |
| मध्य मेघ | मध्य स्तरी, मध्य कपासी | धूसर चादर या रोल, जो प्रायः सतत वर्षा देते हैं |
| निम्न मेघ | स्तरी, स्तरी कपासी, वर्षा स्तरी | मटमैले धूसर; वर्षा स्तरी लगातार वर्षा देता है |
| ऊर्ध्वाधर मेघ | कपासी, कपासी वर्षी | कपासी वर्षी गरज वाला मेघ है, जो भारी वर्षा, ओले और बिजली लाता है |
- संवहनीय वर्षा - सतह पर गर्म हुई वायु ऊपर उठती, ठंडी होती और संघनित होती है। इससे दोपहर बाद तेज बौछारें आती हैं और यह विषुवतीय पेटी की विशेषता है।
- पर्वतीय वर्षा - आर्द्र वायु पर्वत पर चढ़ने को बाध्य होती है, ठंडी होकर पवनाभिमुख ढाल पर बरसती है; आड़ में पड़ा विमुख ढाल शुष्क रहता है और वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है। पश्चिमी घाट और शिलांग पठार भारतीय उदाहरण हैं।
- चक्रवातीय या वाताग्री वर्षा - वाताग्र पर गर्म वायु ठंडी वायु के ऊपर चढ़ने को बाध्य होती है, जिससे बड़े क्षेत्र में लंबी मध्यम वर्षा होती है, जो शीतोष्ण क्षेत्रों की विशेषता है।
चक्रवात
| बिंदु | उष्णकटिबंधीय चक्रवात | शीतोष्ण चक्रवात |
|---|---|---|
| स्थिति | लगभग 5 से 30 अंश अक्षांश के बीच | लगभग 35 से 65 अंश अक्षांश के बीच |
| ऋतु | अधिकतर ग्रीष्म के अंत और शरद में | अधिकतर शीत ऋतु में |
| उत्पत्ति | गर्म महासागरों पर, समुद्र का तापमान लगभग 27 अंश से ऊपर चाहिए | ध्रुवीय वाताग्र पर जहां वायुराशियां मिलती हैं |
| वाताग्र | वाताग्र नहीं होते | गर्म और ठंडे वाताग्र से बनते हैं |
| आकार और अवधि | छोटे पर कहीं अधिक प्रचंड | बड़े, मंद और अधिक समय तक चलने वाले |
| क्षेत्रीय नाम | भारत में चक्रवात, अमेरिका में हरिकेन, पूर्वी एशिया में टाइफून | अवदाब या शीतोष्ण चक्रवात |
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बीच शांत केंद्र होता है जिसे चक्षु (eye) कहते हैं, और उसके चारों ओर चक्षु भित्ति होती है जहां पवन तथा वर्षा सबसे प्रचंड रहती है।
- भूमध्य रेखा के लगभग पांच अंश के भीतर उष्णकटिबंधीय चक्रवात नहीं बनते क्योंकि वहां कोरिऑलिस बल इतना कमजोर होता है कि घूर्णन शुरू ही नहीं हो पाता।
जलवायु प्रदेश
- सबसे प्रचलित वर्गीकरण कोपेन का है, जो तापमान और वर्षा तथा हर संयोजन से पलने वाली वनस्पति पर आधारित है।
- समूह A, उष्णकटिबंधीय - वर्ष भर गर्म; इसमें वर्ष भर वर्षा वाला विषुवतीय प्रकार, स्पष्ट आर्द्र-शुष्क ऋतु वाला मानसून प्रकार, और लंबी शुष्क ऋतु वाला सवाना प्रकार आते हैं।
- समूह B, शुष्क - वाष्पीकरण वर्षा से अधिक; इसमें गर्म मरुस्थल और अर्ध-शुष्क स्टेपी आते हैं।
- समूह C, गर्म शीतोष्ण - इसमें शुष्क ग्रीष्म और आर्द्र शीत वाला भूमध्यसागरीय प्रकार, ग्रीष्म वर्षा वाला चीन प्रकार, और समुद्री पश्चिमी तट प्रकार आते हैं।
- समूह D, शीत हिम वन - कठोर शीत, केवल उत्तरी गोलार्ध में, जहां कोणधारी टैगा वन पलते हैं।
- समूह E, ध्रुवीय - टुंड्रा और हिम टोप; समूह H, पर्वतीय - ऊंचाई के साथ जलवायु तेजी से बदलती है।
परीक्षा में कैसे आता है
वर्षा प्रकार और उदाहरण, तथा चक्रवात प्रकार और उसकी विशेषताओं का सुमेलित कीजिए दोनों आम हैं। तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि सापेक्ष आर्द्रता क्या है और गरज वाला मेघ कौन सा है। व्यावहारिक प्रश्न जलवायु का वर्णन देकर कोपेन समूह पूछते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
सापेक्ष आर्द्रता पर स्पष्ट रहिए - यह तापमान के साथ बदलती है भले वास्तविक वाष्प मात्रा स्थिर रहे, इसीलिए वही वायु दोपहर में शुष्क और भोर में नम लगती है। जलवायु प्रदेशों में भूमध्यसागरीय प्रकार ध्यान से पढ़िए, क्योंकि शुष्क ग्रीष्म और आर्द्र शीत भारतीय प्रतिरूप का उलटा है और इसीलिए बार-बार पूछा जाता है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ पर्वतीय वर्षा मुख्यतः विमुख ढाल पर होती है | ✓ वह पवनाभिमुख ढाल पर होती है; विमुख ढाल वृष्टि छाया है
✗ उष्णकटिबंधीय चक्रवात में गर्म और ठंडे वाताग्र होते हैं | ✓ उनमें वाताग्र नहीं होते; शीतोष्ण चक्रवात वाताग्र पर बनते हैं
✗ भूमध्यसागरीय जलवायु में ग्रीष्म आर्द्र होती है | ✓ उसमें ग्रीष्म शुष्क और शीत आर्द्र होती है
एक नजर में
- वायु गर्म होने पर सापेक्ष आर्द्रता घटती और ठंडी होने पर बढ़ती है।
- ओसांक वह तापमान है जिस पर संघनन शुरू होता है।
- मेघ समूह - उच्च, मध्य, निम्न और ऊर्ध्वाधर; कपासी वर्षी गरज वाला मेघ है।
- वर्षा के प्रकार - संवहनीय, वृष्टि छाया वाली पर्वतीय, और चक्रवातीय या वाताग्री।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात को लगभग 27 अंश से ऊपर समुद्री तापमान चाहिए; उसमें चक्षु होता है।
- शीतोष्ण चक्रवात मध्य अक्षांशों में वाताग्र पर बनते हैं, बड़े पर मंद होते हैं।
- कोपेन समूह - A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C गर्म शीतोष्ण, D शीत हिम वन, E ध्रुवीय, H पर्वतीय।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
Checking your account…
It takes a minute with your WhatsApp number. Reading is free.
Done with this topic?
Lock it in with a quick Practice Set, then move on.