जल प्रदूषण
Water Pollution
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues" | NCERT कक्षा 8 • Science • अध्याय "Pollution of Air and Water"
जल प्रदूषण
जल प्रदूषण का अर्थ है जल में किसी ऐसे पदार्थ का जुड़ना जो उसे उसके इच्छित उपयोग के अयोग्य बना दे। चूंकि जल इतने पदार्थ घोलता है और पूरे भूभाग में बहता है, एक बिंदु का संदूषण उससे कहीं आगे फैलकर पेयजल और फसलों दोनों तक पहुंच जाता है।
स्रोत और सूचक
- घरेलू मलजल भारत में सबसे बड़ा स्रोत है और कार्बनिक अपशिष्ट, अपमार्जक तथा रोगकारक जीव लाता है।
- औद्योगिक बहिःस्राव पारा, सीसा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं तथा अम्ल, क्षार और रंजक लाता है।
- कृषि बहाव उर्वरक, कीटनाशक और पशु अपशिष्ट नदियों, झीलों और भूजल में ले जाता है।
- जैव ऑक्सीजन मांग वह ऑक्सीजन मात्रा है जो सूक्ष्मजीवों को किसी जल नमूने का कार्बनिक पदार्थ अपघटित करने में चाहिए।
- अधिक जैव ऑक्सीजन मांग का अर्थ भारी कार्बनिक प्रदूषण है, क्योंकि अधिक ऑक्सीजन खर्च हो रही है।
- सुपोषण उर्वरक बहाव से होने वाली शैवाल की अत्यधिक वृद्धि है; शैवाल मरकर सड़ने पर ऑक्सीजन घट जाती है और मछलियां दम तोड़ देती हैं।
- तापीय प्रदूषण विद्युत संयंत्रों से गर्म जल का छोड़ा जाना है, जो जल की घुलित ऑक्सीजन धारण क्षमता घटा देता है।
प्रभाव और नियंत्रण
- दूषित जल हैजा, टाइफॉइड, हेपेटाइटिस, पेचिश और अन्य जलजनित रोग फैलाता है।
- भारी धातुएं शरीर में जमा होकर तंत्रिका, वृक्क और अस्थि को दीर्घकालिक हानि पहुंचाती हैं।
- कीटनाशक जैव आवर्धन से गुजरकर शीर्ष उपभोक्ताओं में सर्वाधिक सांद्रता तक पहुंचते हैं।
- फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट से भूजल संदूषण कई क्षेत्रों में गंभीर समस्या है।
- नियंत्रण मलजल और बहिःस्राव का निस्सरण से पहले शोधन करने से शुरू होता है, बाद में नहीं।
- शोधन के प्राथमिक भौतिक, द्वितीयक जैविक और तृतीयक रासायनिक चरण होते हैं।
- उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग घटाना, जलग्रहण प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और नदी सफाई कार्यक्रम इस उत्तर को पूरा करते हैं।
| स्रोत | मुख्य प्रदूषक | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| घरेलू मलजल | कार्बनिक अपशिष्ट, रोगकारक | जलजनित रोग |
| औद्योगिक बहिःस्राव | भारी धातु, अम्ल | दीर्घकालिक विषाक्तता |
| कृषि बहाव | उर्वरक और कीटनाशक | सुपोषण, जैव आवर्धन |
| विद्युत संयंत्र | गर्म जल | घुलित ऑक्सीजन में कमी |
सुपोषण — पोषक तत्वों की अधिकता से किसी जल निकाय में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि, जो अन्य जीवों के लिए उपलब्ध ऑक्सीजन घटा देती है।
Hindi me samjhein
सुपोषण में उर्वरक सीधे विष नहीं होता, पर वह शैवाल बढ़ाकर ऑक्सीजन खा जाता है और मछलियां मर जाती हैं। इसीलिए पोषक तत्व भी विष जितना घातक हो सकता है।
Exam me kaise aata hai
- उर्वरक बहाव से शैवाल की अत्यधिक वृद्धि — सुपोषण
- कार्बनिक पदार्थ अपघटन में लगी ऑक्सीजन कहलाती है — जैव ऑक्सीजन मांग
- नदी में गर्म जल छोड़ना कहलाता है — तापीय प्रदूषण
- अधिक जैव ऑक्सीजन मांग क्या दर्शाती है — भारी कार्बनिक प्रदूषण
UPSC/State PSC ke liye
- सुपोषण मछलियों को विष देकर नहीं बल्कि ऑक्सीजन हटाकर मारता है, इसीलिए कोई पोषक तत्व भी विष जितना घातक हो सकता है।
- अधिक जैव ऑक्सीजन मांग अप्रत्यक्ष माप है: वह दिखाती है कि सूक्ष्मजीव कितनी ऑक्सीजन खर्च करेंगे, और इसलिए जलीय जीवन के लिए कितनी कम बचेगी।
Yahan confuse hote hain
✗ जल में उर्वरक हानिरहित है क्योंकि वह पोषक तत्व है | वह सुपोषण और ऑक्सीजन हानि करता है | ✓
✗ अधिक जैव ऑक्सीजन मांग का अर्थ स्वच्छ जल है | अधिक मांग भारी कार्बनिक प्रदूषण दर्शाती है | ✓
✗ तापीय प्रदूषण जल में रसायन जोड़ता है | वह ऊष्मा जोड़ता है, जो घुलित ऑक्सीजन घटा देती है | ✓
Ek nazar me
- मलजल, औद्योगिक बहिःस्राव और कृषि बहाव मुख्य स्रोत हैं।
- अधिक जैव ऑक्सीजन मांग भारी कार्बनिक प्रदूषण दर्शाती है।
- सुपोषण और तापीय प्रदूषण दोनों घुलित ऑक्सीजन घटाकर हानि करते हैं।
- नियंत्रण का अर्थ निस्सरण से पहले शोधन और रसायन उपयोग घटाना है।
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