चुंबकत्व और धारा का चुंबकीय प्रभाव
Magnetism and Magnetic Effect of Current
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Magnetic Effects of Electric Current" | NCERT कक्षा 6 • Science • अध्याय "Fun with Magnets"
चुंबकत्व और धारा का चुंबकीय प्रभाव
चुंबक लोहा, निकल और कोबाल्ट को आकर्षित करता है और उसके सदैव दो ध्रुव होते हैं जो अलग नहीं किए जा सकते। इस विषय की बड़ी खोज यह है कि विद्युत धारा भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, जिसका अर्थ है कि विद्युत और चुंबकत्व एक ही परिघटना के दो पक्ष हैं।
चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं
- चुंबकीय क्षेत्र चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र है जिसमें उसका बल अनुभव किया जा सके।
- क्षेत्र रेखाएं चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर और भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर चलती हैं।
- क्षेत्र रेखाएं कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं, क्योंकि एक बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएं असंभव हैं।
- जहां क्षेत्र रेखाएं सघन हों वहां क्षेत्र प्रबल है; जहां दूर-दूर हों वहां दुर्बल।
- स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक सदैव उत्तर दक्षिण दिशा में ठहरता है, और यही दिक्सूचक का सिद्धांत है।
- समान ध्रुव प्रतिकर्षित और असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं, तथा प्रतिकर्षण चुंबकत्व की अधिक निश्चित कसौटी है।
धारा का चुंबकीय प्रभाव
- ओर्स्टेड ने देखा कि धारावाही तार के पास रखी दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है, जिससे सिद्ध हुआ कि धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
- सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएं संकेंद्री वृत्त होती हैं जिनकी दिशा दक्षिण हस्त अंगूठा नियम से मिलती है।
- उस नियम में अंगूठा धारा की दिशा में रखा जाता है और मुड़ी उंगलियां क्षेत्र की दिशा देती हैं।
- परिनालिका तार की लंबी कुंडली है; धारा बहने पर यह उत्तरी और दक्षिणी सिरे वाले छड़ चुंबक जैसा व्यवहार करती है।
- परिनालिका के भीतर नर्म लोहे का क्रोड रखने पर विद्युत चुंबक बनता है, जो प्रबल है और बंद किया जा सकता है।
- चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है, जिसकी दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम से मिलती है।
- यही बल विद्युत मोटर का कार्य सिद्धांत है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
| नियम | किसके लिए |
|---|---|
| दक्षिण हस्त अंगूठा नियम | सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र की दिशा |
| फ्लेमिंग वाम हस्त नियम | क्षेत्र में चालक पर बल की दिशा |
| फ्लेमिंग दक्षिण हस्त नियम | जनित्र में प्रेरित धारा की दिशा |
विद्युत चुंबक — नर्म लोहे के क्रोड वाली परिनालिका, जो केवल धारा बहने तक प्रबल चुंबक की तरह काम करती है।
Exam me kaise aata hai
- धारा का चुंबकीय प्रभाव किसने खोजा — ओर्स्टेड
- चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएं किधर जाती हैं — उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव
- नर्म लोहे के क्रोड वाली परिनालिका क्या बनाती है — विद्युत चुंबक
- क्षेत्र में चालक पर बल किस नियम से मिलता है — फ्लेमिंग वाम हस्त नियम
UPSC/State PSC ke liye
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं, क्योंकि प्रतिच्छेद का अर्थ होता कि दिक्सूचक सुई एक ही बिंदु पर दो दिशाएं दिखाए।
- प्रतिकर्षण चुंबकत्व की अधिक निश्चित कसौटी है क्योंकि अचुंबकित लोहे का टुकड़ा भी चुंबक से आकर्षित होता है, पर प्रतिकर्षित कभी नहीं।
Yahan confuse hote hain
✗ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को काट सकती हैं | क्षेत्र रेखाएं कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं | ✓
✗ आकर्षण चुंबकत्व की सबसे निश्चित कसौटी है | प्रतिकर्षण अधिक निश्चित कसौटी है | ✓
✗ अकेला चुंबकीय ध्रुव रह सकता है | ध्रुव सदैव युग्म में ही रहते हैं | ✓
Ek nazar me
- क्षेत्र रेखाएं बाहर उत्तर से दक्षिण जाती हैं और कभी नहीं कटतीं।
- ओर्स्टेड ने दिखाया कि धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।
- दक्षिण हस्त अंगूठा नियम सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र देता है।
- फ्लेमिंग वाम हस्त नियम बल देता है, जो विद्युत मोटर चलाता है।
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