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हड़प्पा अर्थव्यवस्था, लिपि और पतन

Harappan Economy, Script and Decline

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NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 1

हड़प्पा अर्थव्यवस्था, लिपि और पतन

हड़प्पाई अर्थव्यवस्था खेती, शिल्प उत्पादन और दूरगामी व्यापार पर टिकी थी, जिसे मानक बाट और मुहरें जोड़े रखती थीं। लिपि आज भी अपठित है, और लगभग 1900 ईसा पूर्व तक नगर उजड़ गए, जिसके कारणों पर बहस जारी है।

कृषि और पशु

  • मुख्य फसलें गेहूं, जौ, मटर, मसूर, तिल और सरसों थीं; चावल के अंश लोथल और रंगपुर (गुजरात) से मिले हैं।
  • हड़प्पाई संभवतः कपास उगाने वाले विश्व के पहले लोग थे; यूनानियों ने बाद में इसे सिंध के नाम पर सिंडन (Sindon) कहा।
  • कालीबंगा में जुता हुआ खेत सुरक्षित है, जिसमें दो दिशाओं की हलरेखाएं समकोण पर कटती हैं - एक ही खेत में दो फसलें।
  • पालतू पशु - कूबड़दार बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर, कुत्ता, और कहीं-कहीं हाथी और ऊंट।
  • घोड़े के प्रमाण निर्णायक नहीं हैं; यह अत्यधिक विवादित बिंदु है। शेर नहीं मिलता, पर बाघ, गैंडा और हाथी मिलते हैं।

शिल्प, बाट और मुहरें

  • चन्हूदड़ो और लोथल मनका निर्माण के केंद्र थे, जहां कार्नेलियन, एगेट, सेलखड़ी, जैस्पर और शंख प्रयोग होते थे।
  • बाट चर्ट पत्थर के, प्रायः घनाकार और बिना किसी निशान के थे। छोटे मान दोगुने होते थे - 1, 2, 4, 8, 16, 32 - और बड़े मान 16 के गुणकों में चलते थे।
  • मुहरें अधिकतर वर्गाकार और सेलखड़ी (steatite) की थीं, जिन पर पशु आकृति और लिपि की एक पंक्ति रहती थी। एकशृंगी (unicorn) सबसे आम आकृति है।
  • मोहनजोदड़ो की पशुपति मुहर में सींगदार मुकुट पहने बैठी आकृति है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंस हैं और नीचे हिरण।
  • प्रसिद्ध वस्तुएं - कांसे की नर्तकी और सेलखड़ी का पुरोहित राजा, दोनों मोहनजोदड़ो से, हड़प्पा से नहीं।

व्यापार

  • व्यापार वस्तु विनिमय से होता था - कोई सिक्का नहीं मिला।
  • मेसोपोटामियाई अभिलेखों में मेलुहा का उल्लेख है, जिसे आमतौर पर हड़प्पाई क्षेत्र माना जाता है, और बीच के पड़ाव दिलमुन (बहरीन) तथा मगन (ओमान)।
  • मेसोपोटामिया के ऊर में हड़प्पाई मुहरें मिली हैं।
  • कच्चे माल के स्रोत - तांबा खेतड़ी (राजस्थान) और ओमान से, लाजवर्द (lapis lazuli) शोर्तुगई (अफगानिस्तान) से, सोना कर्नाटक से, शंख गुजरात तट से।
  • लोथल का गोदीबाड़ा और तटीय स्थल खाड़ी मार्ग से समुद्री व्यापार की ओर संकेत करते हैं।
सामग्रीस्रोत क्षेत्र
तांबाखेतड़ी, राजस्थान; ओमान भी
लाजवर्दशोर्तुगई, अफगानिस्तान
सोनाकोलार क्षेत्र, कर्नाटक
कार्नेलियनलोथल और गुजरात
शंखगुजरात तट, नागेश्वर और बालाकोट

लिपि और धर्म

  • लिपि चित्रात्मक और अपठित है, जिसमें लगभग 375 से 400 चिह्न हैं।
  • यह दाएं से बाएं लिखी जाती थी, और लंबे अभिलेखों में बुस्ट्रोफेडन शैली में - अगली पंक्ति उल्टी दिशा में, जैसे हल मुड़ता है।
  • मिट्टी की स्त्री मूर्तियों को कई विद्वान मातृदेवी पूजा से जोड़ते हैं।
  • मुहरों पर पीपल और कूबड़दार बैल बार-बार आते हैं, जिससे इन्हें पवित्र माना जाता था।
  • कोई मंदिर निश्चित रूप से पहचाना नहीं गया, और केवल पुरातात्विक प्रमाण से पुरोहित वर्ग सिद्ध नहीं होता।

पतन

  • लगभग 1900 ईसा पूर्व तक परिपक्व हड़प्पाई नगर उजड़ गए; विशिष्ट मुहरें, बाट, लिपि और पकी ईंटें गायब हो जाती हैं।
  • मुख्य सिद्धांत - घग्गर-हाकड़ा का सूखना, बार-बार बाढ़, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती शुष्कता, वन कटाव और मिट्टी की थकान, भूगर्भीय हलचल, और मेसोपोटामिया से व्यापार का घटना।
  • कंकालों के आधार पर दिया गया मॉर्टिमर व्हीलर का "आर्य आक्रमण" स्पष्टीकरण अब स्वीकार नहीं किया जाता।
  • अंत क्रमिक और क्षेत्रीय था, एक अचानक घटना नहीं; उत्तर हड़प्पाई ग्रामीण संस्कृतियां पंजाब, हरियाणा और गुजरात में चलती रहीं।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न बाट श्रृंखला, मेलुहा की पहचान और लाजवर्द के स्रोत पर आते हैं। सुमेलित कीजिए में कच्चा माल और क्षेत्र जोड़े जाते हैं। कथन-आधारित प्रश्न घोड़े के प्रमाण, लिपि चिह्नों की संख्या और आक्रमण सिद्धांत की मान्यता जांचते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि एक समान बाट प्रशासन के बारे में क्या बताते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

वर्णनात्मक उत्तर में पतन को बहुकारणीय और चरणबद्ध बताइए, किसी एक सिद्धांत को मत चुनिए। एनसीईआरटी का पद्धतिगत बिंदु भी याद रखें - चूंकि लिपि अपठित है, हड़प्पाई धर्म और शासन के बारे में हर कथन भौतिक अवशेषों की व्याख्या है, प्रमाणित तथ्य नहीं।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ हड़प्पाई व्यापार में सिक्के चलते थे  |  ✓ व्यापार वस्तु विनिमय से होता था; सिक्के नहीं मिले

✗ नर्तकी मूर्ति मिट्टी की है  |  ✓ नर्तकी कांसे की है, मोम विलोपन (lost-wax) विधि से बनी

✗ मेलुहा का अर्थ बहरीन है  |  ✓ मेलुहा हड़प्पाई क्षेत्र है; दिलमुन बहरीन है

एक नजर में

  • फसलें - गेहूं, जौ, मटर, तिल, सरसों; लोथल में चावल; कपास उगाने वाले पहले लोग।
  • कालीबंगा में जुता खेत; घोड़े के प्रमाण अनिश्चित; शेर अनुपस्थित।
  • चर्ट के घनाकार बाट, 1-2-4-8-16 श्रृंखला; सेलखड़ी की मुहरें, एकशृंगी सबसे आम।
  • मेलुहा, दिलमुन और मगन से वस्तु विनिमय व्यापार; ऊर में हड़प्पाई मुहरें मिलीं।
  • लिपि चित्रात्मक, अपठित, 375-400 चिह्न, दाएं से बाएं लिखी जाती थी।
  • लगभग 1900 ईसा पूर्व नगरों का पतन; कारण अनेक; आक्रमण सिद्धांत अस्वीकृत।

अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।

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