रेखा, कोण एवं समांतर रेखाएँ
रेखा, कोण एवं समांतर रेखाएँ
ज्यामिति से भाग-III में 4 प्रश्न तक आते हैं और यह विषय उन सबका आधार है। कोणों के प्रकार, तिर्यक रेखा से बनने वाले कोणों के जोड़े, और कुछ याद रखने योग्य कोण-योग — तीनों में परिभाषा से अधिक पहचान काम आती है।
कोणों के प्रकार
| कोण | माप |
|---|---|
| न्यून कोण | 90° से कम |
| समकोण | ठीक 90° |
| अधिक कोण | 90° से अधिक, 180° से कम |
| ऋजु कोण | ठीक 180° |
| प्रतिवर्ती कोण | 180° से अधिक, 360° से कम |
दो शब्द अलग से याद रखिए — पूरक कोण वे हैं जिनका योग 90 अंश हो, और संपूरक कोण वे जिनका योग 180 अंश हो। इन्हें उलट देना सबसे आम भूल है।
✗ पूरक कोणों का योग 180° होता है | ✓ पूरक का योग 90° और संपूरक का 180° होता है
तिर्यक रेखा और समांतर रेखाएँ
जब कोई रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है तो आठ कोण बनते हैं, और उनमें कुछ जोड़े बराबर होते हैं तथा कुछ का योग 180 अंश होता है।
| कोणों का जोड़ा | संबंध |
|---|---|
| संगत कोण | बराबर |
| एकांतर अंतःकोण | बराबर |
| एकांतर बाह्य कोण | बराबर |
| तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोण | योग 180° |
| शीर्षाभिमुख कोण | बराबर |
पहचान का सरल तरीका — जो कोण अंग्रेज़ी अक्षर F जैसी स्थिति में हों वे संगत, Z जैसी स्थिति में हों वे एकांतर, और C या U जैसी स्थिति में हों उनका योग 180 अंश होता है। यह चित्रात्मक तरीका सूत्र याद रखने से तेज़ है।
शीर्षाभिमुख कोण तब बनते हैं जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, और वे सदा बराबर होते हैं — इसके लिए समांतर होना ज़रूरी नहीं। यह शर्त अक्सर भुला दी जाती है।
याद रखने योग्य कोण-योग
- त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180°।
- चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360°।
- n भुजा वाले बहुभुज के अंतःकोणों का योग (n − 2) × 180°।
- किसी भी बहुभुज के बाह्य कोणों का योग सदा 360°, चाहे भुजाएँ कितनी भी हों।
अंतिम बिंदु सबसे अधिक पूछा जाता है — बाह्य कोणों का योग भुजाओं की संख्या से नहीं बदलता, वह हमेशा 360 अंश रहता है। यह बात प्रति-सहज लगती है, इसीलिए प्रश्न बनती है।
चित्र बनाकर देखिए। ज्यामिति में अधिकांश गलतियाँ इसलिए होती हैं कि उम्मीदवार बिना आकृति खींचे उत्तर चुन लेते हैं। एक कच्चा चित्र दस सेकंड लेता है और आधी गलतियाँ रोक देता है।
TRE संकेत: पूरक 90 और संपूरक 180 को उलटना सबसे आम भूल है। F, Z और C वाला चित्रात्मक तरीका समांतर रेखाओं के सारे प्रश्न हल कर देता है। और यह याद रखिए कि बाह्य कोणों का योग सदा 360° होता है, भुजाओं की संख्या चाहे जो हो।
60 सेकंड का रिवीजन
- पूरक कोणों का योग 90° और संपूरक का 180° होता है।
- समांतर रेखाओं में संगत और एकांतर कोण बराबर होते हैं।
- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतःकोणों का योग 180° होता है।
- शीर्षाभिमुख कोण सदा बराबर होते हैं, समांतर होना ज़रूरी नहीं।
- n भुजा वाले बहुभुज के अंतःकोणों का योग (n − 2) × 180° होता है।
- बाह्य कोणों का योग सदा 360° रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूरक और संपूरक कोण में क्या अंतर है?
पूरक कोण वे हैं जिनका योग नब्बे अंश होता है, और संपूरक वे जिनका योग एक सौ अस्सी अंश। दोनों नाम मिलते-जुलते हैं इसलिए इन्हें उलट देना बहुत आम भूल है। परीक्षा में दोनों विकल्प साथ रखे जाते हैं।
समांतर रेखाओं के कोण कैसे पहचानें?
चित्र में अक्षरों की आकृति देखिए। F जैसी स्थिति में बने कोण संगत होते हैं और बराबर रहते हैं, Z जैसी स्थिति वाले एकांतर होते हैं और वे भी बराबर रहते हैं, तथा C या U जैसी स्थिति वाले कोणों का योग एक सौ अस्सी अंश होता है।
बहुभुज के बाह्य कोणों का योग क्या होता है?
सदा तीन सौ साठ अंश, चाहे बहुभुज में कितनी भी भुजाएँ हों। यह बात अटपटी लगती है क्योंकि अंतःकोणों का योग भुजाओं के साथ बढ़ता जाता है, पर बाह्य कोणों का योग नहीं बदलता। इसीलिए यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।
शीर्षाभिमुख कोणों के लिए क्या रेखाओं का समांतर होना ज़रूरी है?
नहीं। शीर्षाभिमुख कोण तब बनते हैं जब कोई दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, और वे सदा बराबर होते हैं। समांतर होने की शर्त केवल संगत और एकांतर कोणों के लिए है, शीर्षाभिमुख के लिए नहीं।
