चुंबक एवं चुंबकत्व
चुंबक एवं चुंबकत्व
चुंबक वाला भाग तथ्यों पर टिका है और यहाँ प्रश्न लगभग तय रहते हैं — चुंबक के गुण, चुंबकत्व नष्ट होने के कारण, विद्युत चुंबक का उपयोग और पृथ्वी का चुंबकीय व्यवहार। रटने लायक बिंदु कम हैं, इसलिए यह भाग जल्दी तैयार हो जाता है।
चुंबक के गुण
- चुंबक लोहा, निकल और कोबाल्ट को आकर्षित करता है।
- स्वतंत्र लटकाने पर वह सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- समान ध्रुव प्रतिकर्षित और असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।
- आकर्षण शक्ति ध्रुवों पर सबसे अधिक और बीच में सबसे कम होती है।
- चुंबक के ध्रुव कभी अलग नहीं किए जा सकते।
यदि किसी छड़ चुंबक को बीच से तोड़ दिया जाए तो दो अलग ध्रुव नहीं मिलते, बल्कि दो पूरे चुंबक बन जाते हैं, हर एक में उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव। यही चुंबकत्व का सबसे विशिष्ट गुण है और परीक्षा में यह सीधे पूछा जाता है।
प्रतिकर्षण ही चुंबक की पहचान का पक्का परीक्षण है, आकर्षण नहीं। कारण यह कि लोहे का साधारण टुकड़ा भी चुंबक की ओर आकर्षित हो जाएगा, पर प्रतिकर्षित केवल दूसरा चुंबक ही करेगा।
✗ आकर्षण से पता चल जाता है कि वस्तु चुंबक है | ✓ आकर्षण तो लोहे का टुकड़ा भी दिखाएगा; पक्का परीक्षण प्रतिकर्षण है
चुंबकत्व बनाना और खोना
साधारण लोहे की छड़ को चुंबक बनाने का सरल तरीका एकल स्पर्श विधि है, जिसमें छड़ पर चुंबक का एक ध्रुव बार-बार एक ही दिशा में फेरा जाता है। धारा प्रवाहित करके भी चुंबक बनाया जा सकता है।
- चुंबक को गिराने या पीटने से उसका चुंबकत्व घटता है।
- अधिक गर्म करने पर चुंबकत्व नष्ट हो जाता है।
- ग़लत ढंग से रखने पर शक्ति घटती है, इसलिए छड़ चुंबकों को विपरीत ध्रुव आमने-सामने रखकर बीच में लकड़ी का टुकड़ा लगाया जाता है।
- घोड़े की नाल वाले चुंबक के ध्रुवों पर लोहे की पट्टी लगाकर रखा जाता है।
चुंबक को मोबाइल, घड़ी, टीवी और एटीएम कार्ड से दूर रखना चाहिए, क्योंकि वह उनकी चुंबकीय पट्टी या परिपथ को क्षति पहुँचा सकता है।
विद्युत चुंबक
किसी नरम लोहे की छड़ पर विद्युतरोधी तार लपेटकर उसमें धारा बहाई जाए तो वह चुंबक बन जाती है, इसे विद्युत चुंबक कहते हैं। धारा बंद करते ही उसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है — यही उसकी सबसे बड़ी उपयोगिता है।
- कबाड़ के भारी लोहे के टुकड़े उठाने वाली क्रेन में।
- विद्युत घंटी, पंखा, मोटर, लाउडस्पीकर में।
- डॉक्टर द्वारा आँख से लोहे का कण निकालने में।
धारा बढ़ाने या लपेटों की संख्या बढ़ाने से विद्युत चुंबक की शक्ति बढ़ जाती है। स्थायी चुंबक इस्पात का बनाया जाता है, जबकि विद्युत चुंबक की क्रोड़ नरम लोहे की होती है।
पृथ्वी एक चुंबक की तरह
पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है, इसीलिए दिक्सूचक की सुई सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा दिखाती है। ध्यान देने की बात यह है कि पृथ्वी का चुंबकीय उत्तर ध्रुव भौगोलिक उत्तर के पास नहीं बल्कि उसके निकट चुंबकीय दक्षिण होता है, तभी सुई का उत्तरी सिरा उधर खिंचता है।
विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक का चुनाव सरल है — जहाँ चुंबकत्व को चालू-बंद करना हो वहाँ विद्युत चुंबक, और जहाँ हमेशा चाहिए वहाँ स्थायी चुंबक।
TRE संकेत: चुंबक तोड़ने पर दो पूरे चुंबक बनते हैं — यह लगभग तय प्रश्न है। प्रतिकर्षण ही पक्का परीक्षण है, इसे कथन-कारण में पूछा जाता है। गर्म करने से चुंबकत्व नष्ट होता है और विद्युत चुंबक की क्रोड़ नरम लोहे की होती है — दोनों सीधे आ चुके हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- चुंबक लोहा, निकल और कोबाल्ट को आकर्षित करता है।
- समान ध्रुव प्रतिकर्षित और असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।
- चुंबक तोड़ने पर दो स्वतंत्र ध्रुव नहीं, दो पूरे चुंबक बनते हैं।
- प्रतिकर्षण चुंबक की पहचान का निश्चित परीक्षण है।
- गिराने, पीटने या गर्म करने से चुंबकत्व नष्ट हो जाता है।
- विद्युत चुंबक की क्रोड़ नरम लोहे की होती है और धारा बंद होते ही चुंबकत्व चला जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चुंबक को बीच से तोड़ने पर क्या होता है?
दो अलग-अलग ध्रुव नहीं मिलते। टूटने के बाद दोनों टुकड़े स्वतंत्र चुंबक बन जाते हैं और हर टुकड़े में उत्तर तथा दक्षिण दोनों ध्रुव बन जाते हैं। कितनी भी बार तोड़िए, हर टुकड़ा पूरा चुंबक ही रहेगा, क्योंकि अकेला चुंबकीय ध्रुव प्रकृति में पाया ही नहीं जाता।
विद्युत चुंबक स्थायी चुंबक से बेहतर कब होता है?
जब चुंबकत्व को अपनी इच्छा से चालू और बंद करना हो। कबाड़ उठाने वाली क्रेन धारा चालू करके लोहा उठा लेती है और धारा बंद करके उसे छोड़ देती है, जो स्थायी चुंबक से संभव नहीं। साथ ही धारा या लपेटे बढ़ाकर उसकी शक्ति भी घटाई-बढ़ाई जा सकती है।
दिक्सूचक की सुई उत्तर-दक्षिण में ही क्यों ठहरती है?
क्योंकि पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है और उसका चुंबकीय क्षेत्र सुई पर काम करता है। स्वतंत्र रूप से घूमने पर सुई इसी क्षेत्र के अनुदिश आकर ठहर जाती है, जिससे उसका एक सिरा उत्तर और दूसरा दक्षिण की ओर रहता है।
चुंबक को एटीएम कार्ड और मोबाइल से दूर क्यों रखना चाहिए?
एटीएम कार्ड की काली पट्टी पर सूचना चुंबकीय रूप में दर्ज होती है और मोबाइल तथा घड़ी में संवेदनशील परिपथ होते हैं। तेज़ चुंबक के पास लाने पर यह चुंबकीय सूचना बिगड़ सकती है और उपकरण खराब हो सकता है, इसलिए उन्हें दूर रखा जाता है।
