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विजयनगर, बहमनी एवं मराठा शक्ति

By ExamAtlas · 29/8/2026

विजयनगर, बहमनी एवं मराठा शक्ति

मध्यकाल की क्षेत्रीय शक्तियों से प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — विजयनगर का सबसे प्रसिद्ध शासक और उसका दरबार, बहमनी राज्य का पाँच सल्तनतों में बँट जाना, और शिवाजी की प्रशासनिक तथा कर व्यवस्था। तीनों बिल्कुल अलग-अलग विषय हैं, इसलिए इन्हें आपस में मिलाइए मत।

विजयनगर

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की। इसकी राजधानी हम्पी थी, जो आज विश्व धरोहर स्थल है और तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित है।

इसका सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेव राय था, जो स्वयं विद्वान था और जिसने आमुक्तमाल्यद नामक ग्रंथ लिखा। उसके दरबार में अष्टदिग्गज नामक आठ तेलुगु कवि थे।

  • विदेशी यात्री डोमिंगो पेस और निकोलो कोंटी ने इस साम्राज्य का वर्णन किया।
  • तालिकोटा का युद्ध 1565 में हुआ, जिसमें दक्कन सल्तनतों ने मिलकर विजयनगर को हराया।
  • उसके बाद हम्पी नष्ट हो गया और साम्राज्य कभी सँभल नहीं सका।

बहमनी राज्य

बहमनी राज्य की स्थापना 1347 में अलाउद्दीन बहमन शाह ने की और उसकी राजधानी पहले गुलबर्गा और बाद में बीदर रही। इसका सबसे प्रसिद्ध प्रशासक महमूद गवाँ था।

पंद्रहवीं शताब्दी के अंत में यह राज्य पाँच सल्तनतों में बँट गया — बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा, बीदर और बरार। इन्हीं पाँचों ने मिलकर तालिकोटा में विजयनगर को हराया, इसलिए दोनों कहानियाँ आपस में जुड़ी हैं।

तालिकोटा का युद्ध विजयनगर और मुगलों के बीच हुआ  |   वह विजयनगर और दक्कन की सल्तनतों के संयुक्त मोर्चे के बीच 1565 में हुआ था

मराठा

मराठा शक्ति के संस्थापक शिवाजी थे, जिनका राज्याभिषेक 1674 में रायगढ़ में हुआ और उन्होंने छत्रपति की उपाधि ली। उनकी सबसे बड़ी शक्ति गुरिल्ला युद्ध पद्धति थी, जिसे गनिमी कावा कहा जाता है।

व्यवस्थाक्या थी
अष्टप्रधानआठ मंत्रियों की परिषद
पेशवाप्रधानमंत्री; बाद में वंशानुगत हुआ
चौथपड़ोसी क्षेत्रों से वसूला जाने वाला एक चौथाई कर
सरदेशमुखीअतिरिक्त दस प्रतिशत कर

शिवाजी के बाद पेशवाओं के हाथ में वास्तविक शक्ति आ गई और मराठा संघ बना। 1761 का पानीपत का तृतीय युद्ध मराठों के लिए भारी पराजय सिद्ध हुआ, जिसमें अहमदशाह अब्दाली ने उन्हें हराया।

क्षेत्रीय शक्तियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं

इनका महत्व यह है कि इन्होंने दिखाया कि भारत का इतिहास केवल दिल्ली का इतिहास नहीं है। विजयनगर ने दक्षिण में एक समृद्ध और सुव्यवस्थित राज्य खड़ा किया, और मराठों ने मुगल शक्ति को निर्णायक रूप से कमज़ोर किया।

परीक्षा की दृष्टि से भी यह अध्याय उपयोगी है, क्योंकि यहाँ तथ्य सीमित हैं और तिथियाँ स्पष्ट — 1336, 1347, 1565, 1674 और 1761। ये पाँच तिथियाँ अधिकांश प्रश्न घेर लेती हैं।

इस अध्याय में तिथियों को कहानी के रूप में जोड़िए — 1336 में विजयनगर बना, 1347 में बहमनी, 1565 में विजयनगर हारा, 1674 में शिवाजी का राज्याभिषेक और 1761 में मराठों की पराजय। क्रम बन जाने पर तिथियाँ अपने आप टिक जाती हैं।

TRE संकेत: कृष्णदेव राय और अष्टदिग्गज सबसे अधिक पूछे जाते हैं। तालिकोटा का युद्ध 1565 भी तयशुदा है। अष्टप्रधान और चौथ तथा 1761 का पानीपत का तृतीय युद्ध भी सीधे आए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • विजयनगर की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की।
  • कृष्णदेव राय इसका सबसे प्रसिद्ध शासक था।
  • 1565 के तालिकोटा युद्ध में विजयनगर पराजित हुआ।
  • बहमनी राज्य आगे चलकर पाँच सल्तनतों में बँट गया।
  • शिवाजी का राज्याभिषेक 1674 में रायगढ़ में हुआ।
  • 1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठे पराजित हुए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तालिकोटा का युद्ध क्यों निर्णायक माना जाता है?

क्योंकि 1565 के इस युद्ध में दक्कन की सल्तनतों ने मिलकर विजयनगर को हराया और उसके बाद राजधानी हम्पी नष्ट कर दी गई। साम्राज्य फिर कभी सँभल नहीं सका। इससे दक्षिण भारत की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई और एक समृद्ध सांस्कृतिक केंद्र समाप्त हो गया।

अष्टप्रधान क्या था?

यह शिवाजी की आठ मंत्रियों की परिषद थी, जिसमें हर मंत्री का अलग विभाग था। इनमें पेशवा प्रधानमंत्री होता था, और अन्य मंत्रियों के पास वित्त, सेना, विदेश और न्याय जैसे दायित्व थे। शिवाजी के बाद पेशवा का पद वंशानुगत हो गया और वास्तविक शक्ति उन्हीं के हाथ में चली गई।

चौथ और सरदेशमुखी क्या थे?

ये मराठा राज्य द्वारा वसूले जाने वाले दो कर थे। चौथ पड़ोसी क्षेत्रों से वसूला जाने वाला उनके राजस्व का लगभग एक चौथाई हिस्सा था, जो सुरक्षा के बदले लिया जाता था। सरदेशमुखी उससे अलग लगभग दस प्रतिशत अतिरिक्त कर था। दोनों मराठा आय के प्रमुख स्रोत थे।

क्षेत्रीय शक्तियों का अध्ययन क्यों ज़रूरी है?

क्योंकि इनके बिना मध्यकालीन भारत की तस्वीर अधूरी रह जाती है। विजयनगर ने दक्षिण में समृद्ध राज्य और स्थापत्य खड़ा किया, बहमनी और उसकी उत्तराधिकारी सल्तनतों ने दक्कन की राजनीति तय की, और मराठों ने मुगल शक्ति को निर्णायक रूप से कमज़ोर किया, जिससे आगे का इतिहास बदला।

Vijayanagara, Bahmani and Marathas | BPSC TRE 4.0 GS — ExamAtlas