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आदिकाल एवं भक्तिकाल: कवि एवं रचनाएँ

By ExamAtlas · 29/8/2026

आदिकाल एवं भक्तिकाल: कवि एवं रचनाएँ

यह विषय 2 प्रश्न देता है और भक्तिकाल इसका सबसे बड़ा हिस्सा है। परीक्षा भक्ति की चार शाखाएँ, हर शाखा के प्रमुख कवि, उनकी रचनाएँ और उनकी भाषा — चारों पूछती है, इसलिए शाखा, कवि, रचना और भाषा की चार-स्तंभ तालिका ही सबसे उपयोगी तैयारी है।

आदिकाल की प्रमुख रचनाएँ

रचनारचनाकार
पृथ्वीराज रासोचंदबरदाई
खुमान रासोदलपति विजय
बीसलदेव रासोनरपति नाल्ह
परमाल रासोजगनिक
पदावली, कीर्तिलताविद्यापति

पृथ्वीराज रासो हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है और चंदबरदाई को हिंदी का आदि कवि कहा जाता है। विद्यापति मैथिली के कवि थे और उनकी पदावली शृंगार तथा भक्ति दोनों की सीमा पर खड़ी है।

भक्तिकाल की चार शाखाएँ

धाराशाखाप्रमुख कवि
निर्गुणज्ञानाश्रयी (संत काव्य)कबीर, नानक, रैदास, दादू
निर्गुणप्रेमाश्रयी (सूफी काव्य)जायसी, कुतुबन, मंझन, उसमान
सगुणरामाश्रयीतुलसीदास
सगुणकृष्णाश्रयीसूरदास, मीराबाई, नंददास

यह चार-शाखा वाला ढाँचा भक्तिकाल के लगभग हर प्रश्न का उत्तर दे देता है। ध्यान रहे — निर्गुण की दो शाखाएँ हैं और सगुण की भी दो, कुल चार।

जायसी सगुण भक्ति धारा के कवि हैं  |   वे निर्गुण की प्रेमाश्रयी यानी सूफी शाखा के कवि हैं

प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ

कविप्रमुख रचनाएँ
कबीरबीजक — साखी, सबद, रमैनी
जायसीपद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम
तुलसीदासरामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली
सूरदाससूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी
मीराबाईनरसी जी का मायरा, गीत गोविंद टीका

बीजक कबीर की रचना नहीं बल्कि उनके पदों का संग्रह है, जिसे उनके शिष्यों ने संकलित किया — इसके तीन भाग हैं साखी, सबद और रमैनी। पद्मावत जायसी की सर्वश्रेष्ठ कृति है और अवधी भाषा में लिखी गई है।

भक्तिकाल की एक और बात परीक्षा में काम आती है — निर्गुण और सगुण का बुनियादी अंतर। निर्गुण भक्ति ईश्वर को निराकार मानती है, इसलिए कबीर मूर्ति पूजा और बाहरी आडंबर का विरोध करते हैं। सगुण भक्ति ईश्वर को साकार रूप में स्वीकार करती है, इसलिए तुलसी राम की और सूर कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हैं। यही अंतर पूछे जाने पर पूरा उत्तर बन जाता है।

भाषा भी याद रखिए: तुलसी और जायसी ने अवधी में लिखा, सूर और मीरा ने ब्रजभाषा में, तथा कबीर की भाषा सधुक्कड़ी कहलाती है, जिसमें कई बोलियों के शब्द मिले हैं।

TRE संकेत: चार शाखाओं की तालिका सबसे पहले पक्की कीजिए — यही भक्तिकाल के अधिकांश प्रश्नों का उत्तर है। जायसी निर्गुण की प्रेमाश्रयी शाखा में हैं, यह सबसे आम गलती है। भाषा का जोड़ा भी याद रखिए — तुलसी-जायसी अवधी, सूर-मीरा ब्रज, कबीर सधुक्कड़ी।

60 सेकंड का रिवीजन

  • पृथ्वीराज रासो चंदबरदाई की रचना और हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है।
  • विद्यापति मैथिली कवि थे; उनकी प्रमुख रचना पदावली है।
  • भक्तिकाल की चार शाखाएँ — ज्ञानाश्रयी, प्रेमाश्रयी, रामाश्रयी, कृष्णाश्रयी।
  • कबीर ज्ञानाश्रयी, जायसी प्रेमाश्रयी, तुलसी रामाश्रयी, सूर कृष्णाश्रयी शाखा के हैं।
  • बीजक कबीर के पदों का संग्रह है — साखी, सबद और रमैनी।
  • तुलसी और जायसी की भाषा अवधी, सूर और मीरा की ब्रजभाषा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भक्तिकाल की चार शाखाएँ कौन-सी हैं?

निर्गुण धारा की दो — ज्ञानाश्रयी या संत काव्य और प्रेमाश्रयी या सूफी काव्य; तथा सगुण धारा की दो — रामाश्रयी और कृष्णाश्रयी। कबीर ज्ञानाश्रयी, जायसी प्रेमाश्रयी, तुलसीदास रामाश्रयी और सूरदास कृष्णाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं।

बीजक क्या है?

यह कबीर के पदों का संग्रह है, जिसे उनके शिष्यों ने संकलित किया, क्योंकि कबीर स्वयं अनपढ़ माने जाते हैं। इसके तीन भाग हैं — साखी, सबद और रमैनी। साखी दोहों में, सबद गेय पदों में और रमैनी चौपाई शैली में है।

जायसी किस शाखा के कवि हैं?

निर्गुण धारा की प्रेमाश्रयी या सूफी शाखा के। उन्होंने प्रेम को ईश्वर तक पहुँचने का साधन माना और अवधी भाषा में पद्मावत की रचना की। उन्हें सगुण शाखा में रख देना इस विषय की सबसे आम गलती है, इसलिए यह अलग से याद रखना चाहिए।

तुलसीदास की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?

रामचरितमानस उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति है, जो अवधी में लिखी गई। इसके अतिरिक्त विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली और गीतावली भी उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। विनय पत्रिका ब्रजभाषा में है, जबकि रामचरितमानस अवधी में।