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किशोरावस्था एवं जीवन चक्र

By ExamAtlas · 29/8/2026

किशोरावस्था एवं जीवन चक्र

इस अध्याय से प्रश्न प्रायः तथ्यात्मक होते हैं — किशोरावस्था की आयु सीमा, कौन-सा हार्मोन किस ग्रंथि से निकलता है, और मनुष्य में लिंग निर्धारण किस गुणसूत्र से होता है। तीनों बिंदु स्पष्ट हैं और इनसे प्रश्न लगभग हर बार आ जाता है।

किशोरावस्था और यौवनारंभ

जीवन की वह अवस्था जिसमें शरीर बालक से वयस्क बनने की ओर बढ़ता है, किशोरावस्था कहलाती है। यह सामान्यतः ग्यारह से उन्नीस वर्ष तक मानी जाती है। इसी दौर में शरीर में तेज़ वृद्धि होती है और उसे यौवनारंभ कहा जाता है।

  • लंबाई और भार में तेज़ वृद्धि होती है।
  • स्वरयंत्र बढ़ने से आवाज़ में बदलाव आता है।
  • स्वेद और तेल ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं।
  • सोच, भावनाएँ और व्यवहार भी विकसित होते हैं।

इस अवस्था में हर व्यक्ति की वृद्धि की गति अलग होती है और यह पूरी तरह सामान्य बात है। किसी की लंबाई पहले बढ़ती है, किसी की बाद में, और अंततः सब लगभग अपनी स्वाभाविक ऊँचाई तक पहुँच जाते हैं।

हार्मोन की भूमिका

ये सारे परिवर्तन अंतःस्रावी ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन के कारण होते हैं। हार्मोन सीधे रक्त में मिलते हैं और लक्ष्य अंग तक पहुँचकर काम करते हैं।

ग्रंथिहार्मोनकार्य
पीयूषवृद्धि हार्मोनशरीर की वृद्धि और अन्य ग्रंथियों का नियंत्रण
थायरॉइडथायरॉक्सिनउपापचय; कमी से घेंघा
अग्न्याशयइंसुलिनरक्त शर्करा का नियंत्रण
अधिवृक्कएड्रीनैलिनआपात स्थिति में हृदय गति बढ़ाना

कीटों में भी हार्मोन काम करते हैं — रेशम कीट में इल्ली से वयस्क बनने की क्रिया हार्मोन से ही नियंत्रित होती है, और मेंढक में टैडपोल का वयस्क बनना थायरॉक्सिन पर निर्भर करता है।

मनुष्य में लिंग निर्धारण

मनुष्य की हर कोशिका में तेईस जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र होता है। स्त्री में XX और पुरुष में XY होते हैं।

माता से सदैव X गुणसूत्र ही मिलता है, जबकि पिता से X या Y में से कोई एक। इसलिए संतान का लिंग पिता से आए गुणसूत्र पर निर्भर करता है, माता पर नहीं। यह वैज्ञानिक तथ्य सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।

संतान का लिंग माता पर निर्भर करता है  |   यह पिता से आए गुणसूत्र पर निर्भर करता है, क्योंकि माता से सदैव X ही आता है

इस अवस्था में स्वास्थ्य

  • संतुलित आहार आवश्यक है, जिसमें दूध, दाल, फल और हरी सब्ज़ियाँ हों।
  • स्वच्छता का ध्यान रखना ज़रूरी है, क्योंकि पसीना अधिक आता है।
  • नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद वृद्धि में सहायक हैं।
  • नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

आयरन की कमी से रक्ताल्पता हो सकती है, इसलिए हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गुड़ और चना आहार में रखना चाहिए। इस उम्र में शरीर तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए पोषण की माँग भी अधिक होती है।

इस अध्याय का सार यही है कि किशोरावस्था के सारे परिवर्तन हार्मोन से नियंत्रित होते हैं और वे स्वाभाविक हैं। परीक्षा में प्रश्न प्रायः हार्मोन-ग्रंथि की जोड़ी या लिंग निर्धारण पर ही बनते हैं।

TRE संकेत: संतान का लिंग पिता के गुणसूत्र से तय होता है — यह लगभग हर बार आता है। स्त्री में XX और पुरुष में XY वाला तथ्य सीधे पूछा जाता है। थायरॉक्सिन से टैडपोल वयस्क बनता है और आयरन की कमी से रक्ताल्पता भी आ चुके हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • किशोरावस्था सामान्यतः ग्यारह से उन्नीस वर्ष तक मानी जाती है।
  • इस अवस्था के परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं।
  • पीयूष मास्टर ग्रंथि है और थायरॉक्सिन उपापचय नियंत्रित करता है।
  • मनुष्य में तेईस जोड़े गुणसूत्र होते हैं।
  • स्त्री में XX तथा पुरुष में XY लिंग गुणसूत्र होते हैं।
  • संतान का लिंग पिता से आए गुणसूत्र पर निर्भर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतान का लिंग पिता से ही क्यों तय होता है?

माता की हर कोशिका में दोनों लिंग गुणसूत्र X होते हैं, इसलिए वह संतान को X ही दे सकती है। पिता में एक X और एक Y होता है, इसलिए उससे या तो X आएगा या Y। X आने पर संतान लड़की और Y आने पर लड़का होगा, इसलिए निर्धारण पिता की ओर से ही होता है।

हार्मोन काम कैसे करते हैं?

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ देती हैं, क्योंकि उनमें नलिका नहीं होती। रक्त उन्हें पूरे शरीर में पहुँचाता है, पर वे केवल अपने लक्ष्य अंग पर ही असर करते हैं। बहुत थोड़ी मात्रा में भी वे शरीर की बड़ी क्रियाओं को नियंत्रित कर लेते हैं।

इस उम्र में संतुलित आहार क्यों ज़रूरी है?

किशोरावस्था में शरीर बहुत तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन की माँग बढ़ जाती है। दूध, दाल, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ और फल इस माँग को पूरा करते हैं। पोषण की कमी रह जाए तो वृद्धि रुक सकती है और रक्ताल्पता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मेंढक के टैडपोल का वयस्क बनना किस पर निर्भर करता है?

यह थायरॉक्सिन हार्मोन पर निर्भर करता है, जो थायरॉइड ग्रंथि से निकलता है। इस हार्मोन के बनने के लिए पानी में आयोडीन का होना ज़रूरी है। यदि आयोडीन न मिले तो थायरॉक्सिन नहीं बनेगा और टैडपोल वयस्क मेंढक में नहीं बदल पाएगा।