बीजीय सर्वसमिकाएँ
Algebraic Identities
सर्वसमिकाओं से 1 से 2 प्रश्न सीधे आते हैं, पर उनका असली महत्व इससे कहीं बड़ा है — वे गुणनखंडन, सरलीकरण और तेज़ मानसिक गणना तीनों में लगती हैं। इसलिए इन्हें रटना नहीं, व्यंजक देखते ही पहचानना सीखना चाहिए, यही यहाँ का असली कौशल है।
मानक सर्वसमिकाएँ
(a + b)² = a² + 2ab + b²
(a − b)² = a² − 2ab + b²
a² − b² = (a + b)(a − b)
(x + a)(x + b) = x² + (a + b)x + ab
तीसरी सर्वसमिकता सबसे अधिक काम आती है, क्योंकि वह दो वर्गों के अंतर को तुरंत गुणनखंडों में बदल देती है। जहाँ भी घटाव में दो वर्ग दिखें, वहीं यह लगती है।
✗ a² + b² = (a + b)² | ✓ (a + b)² में 2ab भी जुड़ता है; a² + b² का सीधा गुणनखंड नहीं होता
ध्यान रखिए कि a² + b² का वास्तविक संख्याओं में गुणनखंड नहीं होता, जबकि a² − b² का होता है। यही भेद परखा जाता है।
तीन पदों वाली सर्वसमिकता
(a + b + c)² = a² + b² + c² + 2ab + 2bc + 2ca
इसे याद रखने का तरीका सरल है — हर पद का वर्ग, और हर जोड़ी का दुगुना गुणनफल। तीन पद हैं तो तीन जोड़ियाँ बनेंगी, इसलिए तीन दुगुने गुणनफल आएँगे।
a³ + b³ = (a + b)(a² − ab + b²)
a³ − b³ = (a − b)(a² + ab + b²)
इन दोनों में चिह्न का क्रम उलटा है और यही जाल बनता है। सूत्र याद रखने का तरीका — पहले कोष्ठक में वही चिह्न, बीच के पद में उल्टा चिह्न।
सर्वसमिकाओं का शॉर्टकट के रूप में प्रयोग
| गणना | सर्वसमिकता | उत्तर |
|---|---|---|
| 98² | (100 − 2)² | 9604 |
| 103 × 97 | (100 + 3)(100 − 3) | 9991 |
| 57² − 43² | (57 + 43)(57 − 43) | 1400 |
| 105² | (100 + 5)² | 11025 |
तीसरी पंक्ति सबसे उपयोगी है — 57² और 43² अलग-अलग निकालने में समय लगता है, पर सर्वसमिकता से यह 100 × 14 = 1400 में बदल जाता है। परीक्षा में यही अंतर बनाता है।
व्युत्क्रम वाला समूह
यदि x + 1/x = k हो, तो x² + 1/x² = k² − 2
यदि x − 1/x = k हो, तो x² + 1/x² = k² + 2
दोनों में चिह्न उलटा है — जोड़ में 2 घटता है और घटाव में 2 जुड़ता है। इसका कारण यही है कि वर्ग करने पर बीच का पद 2 आता है, जो एक बार जुड़ता है और एक बार घटता है।
x³ + 1/x³ = k³ − 3k (जब x + 1/x = k हो)
सर्वसमिकता पहचानने का तरीका: व्यंजक में दो वर्ग और उनके बीच घटाव दिखे तो a² − b² लगाइए; दो वर्ग और बीच में दुगुना गुणनफल दिखे तो (a ± b)² लगाइए।
TRE संकेत: a² − b² = (a+b)(a−b) सबसे अधिक काम आने वाली सर्वसमिकता है, इसे पहचानने का अभ्यास कीजिए। घन वाली दो सर्वसमिकताओं में बीच का चिह्न उल्टा होता है — यही जाल है। x + 1/x वाले समूह में जोड़ पर 2 घटता है और घटाव पर 2 जुड़ता है, यह उल्टापन याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- (a + b)² में 2ab जुड़ता है और (a − b)² में घटता है।
- a² − b² = (a + b)(a − b) — सबसे अधिक काम आने वाली सर्वसमिकता।
- a² + b² का वास्तविक संख्याओं में गुणनखंड नहीं होता।
- (a + b + c)² में हर पद का वर्ग और हर जोड़ी का दुगुना गुणनफल आता है।
- घन की दोनों सर्वसमिकताओं में बीच के पद का चिह्न उल्टा रहता है।
- x + 1/x = k हो तो x² + 1/x² = k² − 2।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
57 का वर्ग घटा 43 का वर्ग जल्दी कैसे निकालें?
दो वर्गों के अंतर वाली सर्वसमिकता लगाइए। यह सत्तावन जोड़ तिरालीस गुणा सत्तावन घटा तिरालीस बन जाता है, यानी सौ गुणा चौदह बराबर एक हज़ार चार सौ। दोनों वर्ग अलग-अलग निकालने में कहीं अधिक समय लगता।
क्या a वर्ग जोड़ b वर्ग का गुणनखंड होता है?
वास्तविक संख्याओं में नहीं। केवल दो वर्गों के अंतर का गुणनखंड होता है, योग का नहीं। यही कारण है कि परीक्षा में a वर्ग जोड़ b वर्ग को a जोड़ b का वर्ग लिख देना सबसे आम गलती मानी जाती है।
x जोड़ एक बटा x का मान दिया हो तो वर्ग वाला मान कैसे निकालें?
दिए गए मान का वर्ग करके उसमें से दो घटा दीजिए। यदि x घटा एक बटा x दिया हो तो वर्ग करके दो जोड़ना पड़ता है। दोनों में चिह्न उल्टा रहता है, क्योंकि वर्ग करने पर बीच का पद एक बार जुड़ता है और एक बार घटता है।
तीन पदों वाली सर्वसमिकता कैसे याद रखें?
हर पद का वर्ग लिखिए और फिर हर जोड़ी का दुगुना गुणनफल जोड़िए। तीन पद होने पर तीन जोड़ियाँ बनती हैं, इसलिए तीन दुगुने गुणनफल आते हैं। यही तर्क चार पदों तक बढ़ाया जा सकता है।
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