अनुप्रास, स्वरमैत्री एवं ध्वन्यात्मकता
अनुप्रास, स्वरमैत्री एवं ध्वन्यात्मकता
ये तीनों अलंकार ध्वनि पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें पहचानने का तरीका भी अलग है — पंक्ति को मन में बोलकर सुनिए, आँख से पढ़कर मत देखिए। जो अंतर देखने में नहीं आता वह सुनने में तुरंत पकड़ में आ जाता है।
तीन ध्वनि अलंकार
| अलंकार | किसकी पुनरावृत्ति | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | शब्दों के आरंभ की व्यंजन ध्वनि | The soft sound of the sea |
| स्वरमैत्री | शब्दों के भीतर की स्वर ध्वनि | The rain in Spain |
| व्यंजनमैत्री | शब्दों के भीतर या अंत की व्यंजन ध्वनि | blank and think |
अनुप्रास में ध्वनि शब्द के आरंभ में लौटती है, जबकि स्वरमैत्री और व्यंजनमैत्री में वह शब्द के भीतर लौटती है। यही तीनों का मूल अंतर है और परीक्षा इसी पर प्रश्न बनाती है।
ध्यान रखिए कि अनुप्रास अक्षर की नहीं, ध्वनि की पुनरावृत्ति है। इसलिए city और cat में अनुप्रास नहीं है, यद्यपि दोनों एक ही अक्षर से शुरू होते हैं, क्योंकि उनकी शुरुआती ध्वनियाँ अलग हैं।
✗ city और cat में अनुप्रास है क्योंकि दोनों c से शुरू होते हैं | ✓ अनुप्रास ध्वनि की पुनरावृत्ति है, अक्षर की नहीं; दोनों की शुरुआती ध्वनि अलग है
ध्वन्यात्मकता
ध्वन्यात्मकता वह अलंकार है जिसमें शब्द स्वयं उसी ध्वनि की नकल करता है जिसका वह अर्थ बताता है। buzz, hiss, crash, murmur, splash और rustle इसके उदाहरण हैं।
इसका प्रभाव यह होता है कि पाठक अर्थ केवल समझता नहीं, सुनता भी है। इसीलिए कविता में इसका प्रयोग दृश्य को जीवंत करने के लिए किया जाता है और बाल साहित्य में यह विशेष रूप से मिलता है।
तुक, लय और पुनरावृत्ति
- तुक — पंक्तियों के अंत में समान ध्वनि; उसका क्रम तुक योजना कहलाता है।
- लय — बलाघात का नियमित क्रम, जिससे कविता में गति बनती है।
- पुनरावृत्ति — किसी शब्द या पंक्ति का जान-बूझकर दोहराया जाना।
- टेक — वह पंक्ति जो हर छंद के अंत में लौटती है।
तुक और अनुप्रास को मिलाइए मत — तुक पंक्ति के अंत में होती है और उसका संबंध दो पंक्तियों से है, जबकि अनुप्रास एक ही पंक्ति के भीतर शब्दों के आरंभ में होता है।
ध्वनि अलंकारों का प्रयोग क्यों
इनका काम केवल सजावट नहीं है। अनुप्रास पंक्ति को याद रखने योग्य बना देता है, इसीलिए कहावतों और विज्ञापनों में उसका खूब प्रयोग होता है। ध्वन्यात्मकता दृश्य को सुनाई देने लायक बनाती है।
लय और तुक कविता को गेय बनाते हैं और यही कारण है कि छोटे बच्चे तुक वाली कविताएँ बहुत जल्दी याद कर लेते हैं। शिक्षक के लिए यह जानकारी कक्षा में सीधे काम आती है।
ध्वनि अलंकार पहचानने का एक ही भरोसेमंद तरीका है — पंक्ति को धीरे-धीरे बोलिए। कौन-सी ध्वनि लौट रही है और वह शब्द के आरंभ में है या भीतर, यह बोलते ही स्पष्ट हो जाता है।
TRE संकेत: अनुप्रास और स्वरमैत्री का अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। अनुप्रास ध्वनि की पुनरावृत्ति है, अक्षर की नहीं वाली बारीकी भी आती रही है। ध्वन्यात्मकता के उदाहरण तथा तुक और अनुप्रास का भेद भी सीधे पूछे गए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- अनुप्रास में शब्दों के आरंभ की व्यंजन ध्वनि लौटती है।
- स्वरमैत्री में शब्दों के भीतर की स्वर ध्वनि लौटती है।
- अनुप्रास ध्वनि की पुनरावृत्ति है, लिखे हुए अक्षर की नहीं।
- ध्वन्यात्मकता में शब्द स्वयं उसी ध्वनि की नकल करता है।
- तुक पंक्ति के अंत में और अनुप्रास पंक्ति के भीतर होता है।
- इन अलंकारों को पहचानने के लिए पंक्ति बोलकर सुनिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुप्रास और स्वरमैत्री में क्या अंतर है?
अनुप्रास में पास-पास आए शब्दों के आरंभ की व्यंजन ध्वनि दोहराई जाती है, जैसे The soft sound of the sea में। स्वरमैत्री में शब्दों के भीतर की स्वर ध्वनि दोहराई जाती है, जैसे The rain in Spain में। एक शब्द के शुरू में लौटता है और दूसरा उसके भीतर।
क्या एक ही अक्षर से शुरू होने वाले शब्दों में हमेशा अनुप्रास होता है?
नहीं। अनुप्रास ध्वनि की पुनरावृत्ति है, लिखे हुए अक्षर की नहीं। city और cat दोनों एक ही अक्षर से शुरू होते हैं, पर उनकी शुरुआती ध्वनियाँ अलग हैं, इसलिए वहाँ अनुप्रास नहीं है। दूसरी ओर know और no एक ही ध्वनि से शुरू होते हैं यद्यपि वर्तनी अलग है।
ध्वन्यात्मकता का कविता में क्या काम है?
वह अर्थ को सुनाई देने लायक बना देती है। जब कवि buzz, hiss या splash जैसे शब्द रखता है तो पाठक दृश्य केवल समझता नहीं, सुनता भी है। इससे कविता अधिक जीवंत लगती है, और यही कारण है कि बाल कविताओं में इन शब्दों का बहुत प्रयोग होता है।
तुक और अनुप्रास को कैसे अलग रखें?
तुक पंक्ति के अंत में होती है और उसका संबंध दो या अधिक पंक्तियों से है, जैसे एक पंक्ति night पर और दूसरी light पर समाप्त हो। अनुप्रास एक ही पंक्ति के भीतर होता है और वहाँ शब्दों के आरंभ की ध्वनि लौटती है। एक को अंत देखना है और दूसरे को आरंभ।
