भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल अवधारणाएँ
भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल अवधारणाएँ
अर्थव्यवस्था से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और वे परिभाषा स्तर के रहते हैं — कौन-सा क्षेत्र क्या है, जीडीपी का अर्थ क्या है, मुद्रास्फीति किसे कहते हैं। गहराई की ज़रूरत नहीं, पर शब्दों का अर्थ बिलकुल सही होना चाहिए।
अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र
| क्षेत्र | दूसरा नाम | कार्य |
|---|---|---|
| प्राथमिक | कृषि एवं सहवर्ती | खेती, मछली पालन, वानिकी, खनन |
| द्वितीयक | औद्योगिक | विनिर्माण, निर्माण कार्य |
| तृतीयक | सेवा | परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा |
सबसे अधिक पूछा जाने वाला बिंदु यह है कि भारत में तृतीयक क्षेत्र राष्ट्रीय आय में सबसे बड़ा योगदान देता है, जबकि प्राथमिक क्षेत्र सबसे अधिक लोगों को रोज़गार देता है। उत्पादन और रोज़गार का यही बेमेल प्रश्न बनता है।
✗ भारत की राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान सबसे अधिक है | ✓ रोज़गार सबसे अधिक कृषि देती है; आय में सेवा क्षेत्र आगे है
एक और विभाजन भी पूछा जाता है — संगठित क्षेत्र में पंजीकरण, निश्चित घंटे और सामाजिक सुरक्षा होती है; असंगठित क्षेत्र में इनमें से कुछ नहीं होता, और भारत के अधिकांश श्रमिक इसी में हैं।
राष्ट्रीय आय के शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जीडीपी | देश की सीमा के भीतर एक वर्ष में बने अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य |
| जीएनपी | जीडीपी + विदेश से प्राप्त शुद्ध आय |
| एनएनपी | जीएनपी − मूल्यह्रास |
| प्रति व्यक्ति आय | राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या |
केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं, वरना एक ही मूल्य दो बार जुड़ जाएगा — एक बार कच्चे माल के रूप में और दूसरी बार तैयार वस्तु के रूप में। इसे दोहरी गणना से बचाव कहते हैं और जीडीपी के प्रश्नों में यही तर्क पूछा जाता है।
मुद्रा, बैंकिंग एवं मुद्रास्फीति
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1935 में हुई और 1949 में उसका राष्ट्रीयकरण हुआ; मुख्यालय मुंबई में है।
- एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है, बाक़ी सभी नोट रिज़र्व बैंक।
- 1969 में 14 बैंकों और 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।
- मुद्रास्फीति का अर्थ है वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर का लगातार बढ़ना।
मुद्रास्फीति में मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है — उतने ही रुपये में पहले से कम सामान आता है। यह एक पंक्ति ही अधिकांश प्रश्नों का उत्तर है।
नीति आयोग ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग का स्थान लिया और इसके साथ पंचवर्षीय योजनाओं की व्यवस्था समाप्त हो गई। यह हाल का तथ्य है, इसलिए पुरानी किताबें अब भी योजना आयोग छाप रही हैं।
आसान पकड़: उत्पादन में सेवा क्षेत्र आगे, रोज़गार में कृषि आगे। जीडीपी में केवल अंतिम वस्तुएँ। मुद्रास्फीति में क्रय शक्ति घटती है। तीन पंक्तियों में पूरा विषय।
TRE संकेत: उत्पादन बनाम रोज़गार वाला जाल सबसे अधिक आता है — प्रश्न में ध्यान से देखिए कि आय पूछी गई है या रोज़गार। एक रुपये का नोट सरकार जारी करती है तयशुदा प्रश्न है। नीति आयोग 1 जनवरी 2015 ताज़ा तथ्य है और यही बाज़ार की पुरानी सामग्री में सबसे अधिक ग़लत छपा मिलता है।
60 सेकंड का रिवीजन
- प्राथमिक कृषि, द्वितीयक उद्योग, तृतीयक सेवा क्षेत्र है।
- आय में सेवा क्षेत्र आगे, रोज़गार में कृषि आगे।
- जीडीपी में केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं।
- रिज़र्व बैंक 1935 में स्थापित, 1949 में राष्ट्रीयकृत, मुख्यालय मुंबई।
- एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है।
- नीति आयोग ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग की जगह ली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की राष्ट्रीय आय में कौन-सा क्षेत्र सबसे बड़ा है?
तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र, जो उत्पादन में सबसे अधिक योगदान देता है। पर रोज़गार सबसे अधिक प्राथमिक यानी कृषि क्षेत्र देता है। प्रश्न में आय पूछी गई है या रोज़गार, यह ध्यान से पढ़िए क्योंकि दोनों के उत्तर अलग हैं।
जीडीपी में केवल अंतिम वस्तुएँ क्यों गिनी जाती हैं?
क्योंकि कच्चे माल को अलग से गिनने पर उसका मूल्य दो बार जुड़ जाएगा — एक बार कच्चे माल के रूप में और फिर तैयार वस्तु के भीतर। इसे दोहरी गणना कहते हैं, और अंतिम वस्तुओं तक सीमित रहना ही इससे बचने का तरीका है।
एक रुपये का नोट कौन जारी करता है?
भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के माध्यम से, और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। बाक़ी सभी मूल्यवर्ग के नोट भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है और उन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। यह अंतर बार-बार पूछा जाता है।
मुद्रास्फीति का सीधा असर क्या होता है?
मुद्रा की क्रय शक्ति घट जाती है, यानी उतने ही रुपये में पहले से कम वस्तुएँ आती हैं। मुद्रास्फीति का अर्थ ही वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर का लगातार बढ़ना है, इसलिए यह असर उसकी परिभाषा से ही निकलता है।
