बिहार के रचनाकार एवं आंचलिक परंपरा
बिहार के रचनाकार एवं आंचलिक परंपरा
बिहार के पत्र में यह विषय 2 प्रश्न तक दे सकता है और इसकी संभावना सामान्य से अधिक रहती है। दिनकर, रेणु, बेनीपुरी और नागार्जुन — चार नाम, उनकी विधा और दो-दो कृतियाँ, बस इतनी तैयारी यहाँ पूरा लाभ दे देती है।
रामधारी सिंह दिनकर
जन्म सिमरिया, बेगूसराय में। वे मुख्यतः कवि हैं, पर उनका गद्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है।
| कृति | विधा |
|---|---|
| रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी | काव्य |
| संस्कृति के चार अध्याय | सांस्कृतिक निबंध |
| अर्धनारीश्वर | निबंध संग्रह |
संस्कृति के चार अध्याय भारतीय संस्कृति के विकास पर लिखी गई उनकी सबसे बड़ी गद्य कृति है और इसे साहित्य अकादमी सम्मान मिला। उर्वशी पर उन्हें 1972 में ज्ञानपीठ मिला।
फणीश्वरनाथ रेणु
जन्म औराही हिंगना, अररिया में। उन्हें आंचलिक उपन्यास की परंपरा का सबसे बड़ा नाम माना जाता है।
- मैला आँचल — 1954; बिहार के एक गाँव का पूरा जीवन-चित्र।
- परती परिकथा — बंजर ज़मीन और उसके लोग।
- मारे गए गुलफाम — इसी कहानी पर तीसरी कसम फ़िल्म बनी।
- ऋणजल धनजल — बाढ़ पर लिखा रिपोर्ताज संग्रह।
आंचलिक उपन्यास का अर्थ है वह उपन्यास जिसमें कोई अंचल यानी क्षेत्र स्वयं एक पात्र की तरह उभरे — उसकी बोली, रीति, त्योहार और संघर्ष सब कथा का हिस्सा हों। मैला आँचल इसकी आदर्श कसौटी माना जाता है।
✗ तीसरी कसम रेणु का उपन्यास है | ✓ यह उनकी कहानी मारे गए गुलफाम पर बनी फ़िल्म का नाम है
बेनीपुरी एवं नागार्जुन
| रचनाकार | स्थान | प्रमुख कृतियाँ |
|---|---|---|
| रामवृक्ष बेनीपुरी | मुजफ्फरपुर | माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब |
| नागार्जुन | तरौनी, दरभंगा | युगधारा, बलचनमा, रतिनाथ की चाची |
माटी की मूरतें बेनीपुरी के रेखाचित्रों का संग्रह है, जिसमें गाँव के साधारण लोग शब्द-चित्र बनकर उभरते हैं। नागार्जुन कवि और उपन्यासकार दोनों थे, और उनका बलचनमा हिंदी का प्रमुख किसान-केंद्रित उपन्यास है।
चारों को एक कड़ी में रखिए — दिनकर का ओज, रेणु का अंचल, बेनीपुरी का रेखाचित्र और नागार्जुन का किसान। एक-एक शब्द से चारों याद आ जाते हैं।
TRE संकेत: मैला आँचल और आंचलिक उपन्यास का जोड़ा सबसे अधिक पूछा जाता है। तीसरी कसम फ़िल्म है, कहानी का नाम मारे गए गुलफाम है — यह भ्रम जान-बूझकर विकल्पों में रखा जाता है। संस्कृति के चार अध्याय दिनकर का गद्य और माटी की मूरतें बेनीपुरी का रेखाचित्र भी याद रखिए।
60 सेकंड का रिवीजन
- दिनकर बेगूसराय के थे और राष्ट्रकवि कहलाते हैं।
- संस्कृति के चार अध्याय दिनकर की गद्य कृति है; उर्वशी पर 1972 में ज्ञानपीठ मिला।
- रेणु अररिया के थे और आंचलिक उपन्यास परंपरा के प्रमुख नाम हैं।
- मैला आँचल 1954 में आया; तीसरी कसम मारे गए गुलफाम कहानी पर बनी फ़िल्म है।
- माटी की मूरतें रामवृक्ष बेनीपुरी के रेखाचित्रों का संग्रह है।
- नागार्जुन दरभंगा के थे; बलचनमा उनका किसान-केंद्रित उपन्यास है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आंचलिक उपन्यास किसे कहते हैं?
उस उपन्यास को जिसमें कोई अंचल यानी क्षेत्र स्वयं एक पात्र की तरह उभरता है — उसकी बोली, रीति-रिवाज, त्योहार और संघर्ष कथा का हिस्सा बन जाते हैं। फणीश्वरनाथ रेणु का मैला आँचल इस परंपरा की सबसे प्रसिद्ध कृति है।
तीसरी कसम और मारे गए गुलफाम में क्या संबंध है?
मारे गए गुलफाम फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी है और तीसरी कसम उसी कहानी पर बनी फ़िल्म का नाम है। परीक्षा में दोनों नाम विकल्पों में साथ रखे जाते हैं, इसलिए यह याद रखना चाहिए कि मूल रचना कहानी है, फ़िल्म बाद में बनी।
दिनकर की प्रमुख गद्य कृति कौन-सी है?
संस्कृति के चार अध्याय, जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति के विकास को चार चरणों में देखा है। इस कृति को साहित्य अकादमी सम्मान मिला। दिनकर मुख्यतः कवि माने जाते हैं, इसलिए यह गद्य कृति अलग से याद रखने योग्य है।
माटी की मूरतें किस विधा की रचना है?
रेखाचित्र की। रामवृक्ष बेनीपुरी ने इसमें गाँव के साधारण लोगों के शब्द-चित्र खींचे हैं। बेनीपुरी मुजफ्फरपुर के थे और उनकी दूसरी प्रसिद्ध कृति गेहूँ और गुलाब है, जो निबंध और रेखाचित्र दोनों का मिश्रण मानी जाती है।
अगला कदम: गद्य में अंक लेखक और कृति के जोड़े याद रखने से बनते हैं। इस अध्याय को ExamAtlas के BPSC TRE 4.0 मॉक टेस्ट में परखिए — पाँच विकल्प, −1/3 ऋणात्मक अंकन, बिहार-केंद्रित।
