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विद्युत धारा के रासायनिक एवं तापीय प्रभाव

By ExamAtlas · 29/8/2026

विद्युत धारा के रासायनिक एवं तापीय प्रभाव

यह भाग छोटा है पर परीक्षा में इसका लाभ बड़ा है, क्योंकि इसमें प्रश्न लगभग एक ही ढाँचे के आते हैं — कौन-सा उपकरण किस प्रभाव पर चलता है, और विद्युत लेपन में कौन-सी वस्तु कैथोड पर लगती है। दोनों बिंदु उदाहरण सहित याद कर लीजिए।

तापीय प्रभाव

जब किसी चालक से धारा बहती है तो वह गर्म हो जाता है, इसी को धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। उत्पन्न ऊष्मा धारा, प्रतिरोध और समय — तीनों पर निर्भर करती है।

H = I² × R × t

इस सूत्र से एक बात साफ़ है — प्रतिरोध जितना अधिक, ऊष्मा उतनी अधिक। इसीलिए हीटर और प्रेस का तार नाइक्रोम का बनाया जाता है, जिसका प्रतिरोध ऊँचा और गलनांक भी ऊँचा होता है।

  • विद्युत हीटर, प्रेस, टोस्टर, गीज़र — सभी तापीय प्रभाव पर चलते हैं।
  • बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है, क्योंकि उसका गलनांक बहुत ऊँचा है।
  • फ़्यूज़ भी इसी प्रभाव पर आधारित सुरक्षा उपकरण है।

साधारण बल्ब में विद्युत ऊर्जा का बड़ा हिस्सा ऊष्मा में बदल जाता है, इसीलिए वह कम कुशल होता है। एलईडी बल्ब में ऊष्मा बहुत कम बनती है, इसलिए वह उतनी ही रोशनी कम बिजली में दे देता है।

रासायनिक प्रभाव

जब धारा किसी विद्युत अपघट्य घोल से गुज़रती है तो उसमें रासायनिक परिवर्तन होते हैं। इसी को धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं। घोल में डूबी छड़ों को इलेक्ट्रोड कहा जाता है।

इलेक्ट्रोडजुड़ावक्या होता है
ऐनोडधनात्मक सिरे सेऑक्सीकरण; धातु घुलती है
कैथोडऋणात्मक सिरे सेअपचयन; धातु जमा होती है

अम्ल मिले जल से धारा गुज़ारने पर वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाता है। कैथोड पर हाइड्रोजन और ऐनोड पर ऑक्सीजन मिलती है, और हाइड्रोजन की मात्रा ऑक्सीजन से दोगुनी होती है, क्योंकि जल के अणु में हाइड्रोजन के दो परमाणु होते हैं।

रासायनिक प्रभाव जाँचने का सरल तरीका है कि परिपथ में एलईडी लगा दी जाए। नमक का घोल धारा बहा देता है और एलईडी जल उठती है, जबकि आसुत जल में वह नहीं जलती।

आसुत जल से धारा गुज़ारने पर भी विद्युत अपघटन हो जाता है  |   आसुत जल कुचालक है; उसमें थोड़ा अम्ल या लवण मिलाने पर ही अपघटन होता है

विद्युत लेपन

किसी धातु पर दूसरी धातु की पतली परत विद्युत धारा से चढ़ाने की विधि विद्युत लेपन कहलाती है। इसमें जिस वस्तु पर परत चढ़ानी है उसे कैथोड पर और जिस धातु की परत चढ़ानी है उसे ऐनोड पर लगाया जाता है, तथा घोल उसी धातु के लवण का लिया जाता है।

वस्तुलेपनकारण
साइकिल का हैंडल, नलक्रोमियमचमक और जंग से बचाव
लोहे की चादरजस्ताजंग से सुरक्षा
आभूषण, बर्तनचाँदी या सोनासुंदरता और कम लागत
खाद्य पदार्थ का डिब्बाटिनलोहे से भोजन की प्रतिक्रिया रोकना

जस्ते की परत चढ़ाने की क्रिया को अलग से यशदलेपन कहा जाता है और यह जंग रोकने का सबसे प्रचलित तरीका है।

कैथोड और ऐनोड की उलझन दूर करने का सरल तरीका — जिस वस्तु को सजाना है, वह ऋणात्मक यानी कैथोड पर लगती है, क्योंकि धातु के धनात्मक आयन उसी की ओर खिंचकर जमा होते हैं।

TRE संकेत: विद्युत लेपन में वस्तु कैथोड पर लगती है — यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला बिंदु है। नाइक्रोम का उपयोग हीटर में तथा टंगस्टन का बल्ब के तंतु में होता है, इसे उलटकर पूछा जाता है। जल के अपघटन में हाइड्रोजन दोगुनी मिलती है, यह भी आ चुका है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • तापीय प्रभाव में उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय पर निर्भर करती है।
  • हीटर और प्रेस में नाइक्रोम तथा बल्ब में टंगस्टन का तार होता है।
  • रासायनिक प्रभाव विद्युत अपघट्य घोलों में दिखाई देता है।
  • कैथोड पर धातु जमा होती है और ऐनोड पर वह घुलती है।
  • जल के अपघटन में हाइड्रोजन ऑक्सीजन से दोगुनी मात्रा में मिलती है।
  • विद्युत लेपन में लेपित की जाने वाली वस्तु कैथोड पर लगाई जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हीटर का तार नाइक्रोम का ही क्यों बनाया जाता है?

नाइक्रोम का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, इसलिए उसमें धारा बहते ही खूब ऊष्मा उत्पन्न होती है। साथ ही उसका गलनांक ऊँचा है और वह गर्म होने पर जल्दी ऑक्सीकृत भी नहीं होता, इसलिए बार-बार बदलना नहीं पड़ता। ताँबे का प्रतिरोध कम होने से वह इस काम के लिए उपयुक्त नहीं है।

विद्युत लेपन क्यों किया जाता है?

मुख्य कारण दो हैं। पहला, सस्ती धातु पर महँगी धातु की पतली परत चढ़ाकर कम लागत में सुंदरता पाई जाती है, जैसे आभूषणों पर सोने या चाँदी का लेपन। दूसरा, परत जंग और रासायनिक प्रतिक्रिया से बचाती है, जैसे लोहे की चादर पर जस्ते और खाद्य डिब्बों पर टिन का लेपन।

जल के विद्युत अपघटन में हाइड्रोजन अधिक क्यों मिलती है?

जल के एक अणु में हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु होता है। इसी अनुपात के कारण अपघटन में कैथोड पर एकत्र हाइड्रोजन गैस का आयतन ऐनोड पर एकत्र ऑक्सीजन से लगभग दोगुना होता है। यह जल के सूत्र की सीधी पुष्टि है।

एलईडी बल्ब साधारण बल्ब से अधिक कुशल क्यों है?

साधारण बल्ब में तंतु को चमकने के लिए बहुत गर्म करना पड़ता है, इसलिए अधिकांश विद्युत ऊर्जा प्रकाश के बजाय ऊष्मा में चली जाती है। एलईडी में प्रकाश बिना अधिक गर्म हुए बनता है, इसलिए उतनी ही रोशनी के लिए बहुत कम बिजली लगती है और बल्ब लंबा चलता है।