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छंद: मात्रिक एवं वर्णिक

By ExamAtlas · 29/8/2026

छंद: मात्रिक एवं वर्णिक

छंद से 1 से 2 प्रश्न आते हैं और यह भाग गणना पर टिका है। मात्रा गिनना आ जाए तो दोहा, चौपाई और सोरठा के प्रश्न बिना सोचे हल हो जाते हैं, इसलिए पहले लघु-गुरु का नियम पक्का कीजिए।

मात्रा गिनने का नियम

प्रकारचिह्नमात्राउदाहरण
लघु1ह्रस्व स्वर वाला वर्ण — क, कि, कु
गुरु2दीर्घ स्वर वाला वर्ण — का, की, कू, के

अनुस्वार, विसर्ग और संयुक्त वर्ण से पहले आने वाला लघु वर्ण भी गुरु गिना जाता है। छंद के प्रत्येक भाग को चरण कहते हैं और अधिकांश छंदों में चार चरण होते हैं।

प्रमुख मात्रिक छंद

छंदमात्रा व्यवस्थाकुल मात्राएँ
दोहाविषम चरण 13, सम चरण 1124
सोरठाविषम चरण 11, सम चरण 1324
चौपाईहर चरण 1664
रोलाविषम 11, सम 1324
कुंडलियादोहा और रोला मिलकरछह चरण
बरवैविषम 12, सम 719

दोहा और सोरठा एक-दूसरे के उलटे हैं — दोहे में पहले 13 फिर 11, सोरठे में पहले 11 फिर 13। यही उलटाव सबसे अधिक पूछा जाता है, इसलिए दोनों को साथ याद कीजिए, अलग-अलग नहीं।

सोरठा में विषम चरण में 13 मात्राएँ होती हैं  |   यह दोहे का नियम है; सोरठे में विषम चरण में 11 मात्राएँ होती हैं

कुंडलिया छह चरणों का छंद है, जिसमें पहले एक दोहा और फिर एक रोला आता है, और दोहे का अंतिम शब्द रोले का पहला शब्द बनता है। रामचरितमानस मुख्यतः चौपाई और दोहे में लिखी गई है।

वर्णिक छंद

मात्रिक छंद में मात्राएँ गिनी जाती हैं, वर्णिक छंद में वर्ण। यही दोनों का बुनियादी अंतर है और यह सीधा प्रश्न बनता है।

  • कवित्त या घनाक्षरी — प्रत्येक चरण में 31 वर्ण।
  • सवैया — 22 से 26 वर्ण तक; रीतिकाल में बहुत प्रयुक्त।
  • इंद्रवज्रा और उपेंद्रवज्रा — 11-11 वर्ण के संस्कृत मूल के छंद।
  • मुक्त छंद — मात्रा या वर्ण का बंधन नहीं; निराला इसके प्रवर्तक माने जाते हैं।

गिनने की आसान विधि: पंक्ति को टुकड़ों में तोड़कर हर वर्ण पर लघु या गुरु लिखिए, फिर जोड़ दीजिए। 13 और 11 का जोड़ मिले तो दोहा, 16-16 मिले तो चौपाई।

TRE संकेत: दोहा 13-11 और सोरठा 11-13 — यह उलटा जोड़ा सबसे अधिक पूछा जाता है। चौपाई 16-16, कुल 64 भी तय प्रश्न है। मात्रिक और वर्णिक का अंतर याद रखिए — एक में मात्रा, दूसरे में वर्ण गिने जाते हैं। निराला मुक्त छंद के प्रवर्तक यहाँ भी पूछा जा सकता है।

60 सेकंड का रिवीजन

  • लघु की एक और गुरु की दो मात्रा होती है।
  • दोहे में विषम चरण 13 और सम चरण 11 मात्रा, कुल 24।
  • सोरठा दोहे का उलटा है — विषम 11, सम 13।
  • चौपाई के हर चरण में 16 मात्राएँ, कुल 64।
  • कुंडलिया छह चरणों का छंद है — दोहा और रोला मिलकर।
  • मात्रिक छंद में मात्राएँ और वर्णिक छंद में वर्ण गिने जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दोहा और सोरठा में क्या अंतर है?

दोनों में कुल चौबीस मात्राएँ होती हैं, पर क्रम उलटा रहता है। दोहे के विषम चरण में तेरह और सम चरण में ग्यारह मात्राएँ होती हैं, जबकि सोरठे में विषम चरण में ग्यारह और सम चरण में तेरह। इसीलिए सोरठे को दोहे का उलटा कहा जाता है।

मात्रिक और वर्णिक छंद में क्या भेद है?

मात्रिक छंद में मात्राओं की गिनती से नियम बनता है, जैसे दोहा और चौपाई। वर्णिक छंद में वर्णों की गिनती से नियम बनता है, जैसे कवित्त और सवैया। यही बुनियादी अंतर है और परीक्षा इसे सीधे प्रश्न के रूप में पूछती है।

चौपाई में कितनी मात्राएँ होती हैं?

प्रत्येक चरण में सोलह मात्राएँ और चारों चरण मिलाकर चौंसठ। यह सम मात्रिक छंद है, क्योंकि सभी चरणों में मात्राएँ बराबर रहती हैं। तुलसीदास की रामचरितमानस मुख्यतः चौपाई और दोहे में ही लिखी गई है।

मुक्त छंद क्या है?

वह छंद जिसमें मात्रा या वर्ण की गिनती का बंधन नहीं होता और पंक्तियाँ भाव के अनुसार छोटी-बड़ी होती हैं। हिंदी में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को मुक्त छंद का प्रवर्तक माना जाता है और उनकी कविताएँ इसकी सर्वोत्तम मिसाल हैं।