भारत की जलवायु, मृदा एवं प्राकृतिक वनस्पति
भारत की जलवायु, मृदा एवं प्राकृतिक वनस्पति
इस अध्याय से प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — मानसून की क्रियाविधि, मिट्टी का प्रकार और उसका क्षेत्र, और वनस्पति का प्रकार तथा उसकी वर्षा सीमा। तीनों में क्षेत्र और प्रकार की जोड़ी बनती है, इसलिए तालिका के रूप में याद कीजिए।
मानसून की क्रियाविधि
भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी है। मानसून का मूल कारण स्थल और जल के असमान गर्म होने में है — गर्मियों में स्थल जल्दी गर्म होकर निम्न दाब बना देता है और समुद्र से नम हवा उसकी ओर खिंच आती है।
| ऋतु | अवधि | विशेषता |
|---|---|---|
| शीत ऋतु | दिसंबर से फ़रवरी | उत्तर-पूर्वी मानसून; पश्चिमी विक्षोभ से वर्षा |
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च से मई | लू; कालबैसाखी |
| वर्षा ऋतु | जून से सितंबर | दक्षिण-पश्चिम मानसून; अधिकांश वर्षा |
| लौटता मानसून | अक्टूबर-नवंबर | तमिलनाडु में वर्षा |
दक्षिण-पश्चिम मानसून की दो शाखाएँ होती हैं — अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा। बिहार में वर्षा मुख्यतः बंगाल की खाड़ी शाखा से मिलती है, जो हिमालय से टकराकर पश्चिम की ओर मुड़ जाती है।
तमिलनाडु में अधिकांश वर्षा लौटते मानसून से होती है, इसीलिए वहाँ बाकी देश से अलग समय पर वर्षा होती है। यह तथ्य सीधे पूछा जाता है।
✗ पूरे भारत में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही होती है | ✓ तमिलनाडु में अधिकांश वर्षा लौटते मानसून से होती है, और उत्तर भारत में सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ से भी वर्षा मिलती है
भारत की मिट्टियाँ
| मिट्टी | क्षेत्र | विशेषता और फ़सल |
|---|---|---|
| जलोढ़ | उत्तरी मैदान | सबसे उपजाऊ; धान, गेहूँ, गन्ना |
| काली | दक्कन का पठार | नमी रोकती है; कपास |
| लाल | पूर्वी और दक्षिणी पठार | लोहे के अंश से लाल; मोटे अनाज |
| लैटेराइट | अधिक वर्षा वाले क्षेत्र | चाय, कॉफ़ी, काजू |
| मरुस्थलीय | राजस्थान | बलुई; बाजरा |
| पर्वतीय | हिमालयी ढाल | चाय, फल |
काली मिट्टी को रेगुर भी कहा जाता है और वह ज्वालामुखीय चट्टान से बनी है। उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह नमी बहुत देर तक रोकती है, इसीलिए कपास के लिए सबसे उपयुक्त है। यह प्रश्न लगभग हर बार आता है।
जलोढ़ मिट्टी भारत में सबसे अधिक क्षेत्र पर फैली है और बिहार लगभग पूरा इसी पर टिका है।
प्राकृतिक वनस्पति
| वनस्पति | वर्षा | क्षेत्र और वृक्ष |
|---|---|---|
| उष्ण सदाबहार | बहुत अधिक | पश्चिमी घाट, अंडमान; महोगनी, आबनूस |
| पर्णपाती | मध्यम | सबसे विस्तृत; सागौन, साल, शीशम |
| कँटीली | बहुत कम | राजस्थान; बबूल, कीकर |
| पर्वतीय | ऊँचाई के अनुसार | चीड़, देवदार |
| मैंग्रोव | डेल्टा क्षेत्र | सुंदरबन; सुंदरी वृक्ष |
पर्णपाती वन भारत में सबसे अधिक क्षेत्र पर फैले हैं और इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है, क्योंकि ये सूखे मौसम में पत्तियाँ गिरा देते हैं। साल बिहार और झारखंड के वनों का प्रमुख वृक्ष है।
मैंग्रोव वन खारे जल में उगते हैं और वे तट को तूफ़ान तथा कटाव से बचाते हैं। सुंदरबन का नाम वहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्ष से पड़ा है।
मिट्टी और वनस्पति दोनों में एक ही तर्क काम करता है — वर्षा कितनी है और भूमि किस चट्टान से बनी है। इन दो प्रश्नों के उत्तर से क्षेत्र की मिट्टी और वनस्पति दोनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
TRE संकेत: काली मिट्टी और कपास वाली जोड़ी लगभग हर बार आती है। तमिलनाडु में लौटते मानसून से वर्षा भी तयशुदा है। पर्णपाती वन सबसे विस्तृत और सुंदरबन में मैंग्रोव भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी है।
- मानसून का कारण स्थल और जल का असमान गर्म होना है।
- तमिलनाडु में अधिकांश वर्षा लौटते मानसून से होती है।
- काली मिट्टी नमी रोकती है और कपास के लिए सबसे उपयुक्त है।
- जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक क्षेत्र पर फैली और सबसे उपजाऊ है।
- पर्णपाती वन भारत में सबसे विस्तृत हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानसून क्यों चलता है?
इसका मूल कारण स्थल और जल का असमान गति से गर्म होना है। गर्मियों में स्थल जल्दी गर्म होकर निम्न दाब बना देता है, इसलिए समुद्र की नम हवा उसकी ओर खिंचकर आती है और वर्षा करती है। सर्दियों में स्थल जल्दी ठंडा हो जाता है और हवा की दिशा उलट जाती है।
काली मिट्टी कपास के लिए क्यों उपयुक्त है?
क्योंकि वह नमी बहुत देर तक रोक कर रखती है, और कपास को लंबे समय तक धीमी नमी चाहिए। यह मिट्टी ज्वालामुखीय चट्टान से बनी है, इसमें लोहा, चूना और मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में हैं, और सूखने पर उसमें दरारें पड़ जाती हैं जिससे नीचे तक हवा पहुँच जाती है।
तमिलनाडु में बाकी देश से अलग समय पर वर्षा क्यों होती है?
क्योंकि वहाँ अधिकांश वर्षा लौटते मानसून से होती है, जो अक्टूबर और नवंबर में चलता है। बंगाल की खाड़ी से लौटती हुई हवा नमी लेकर तमिलनाडु के तट पर पहुँचती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में पड़ जाता है।
मैंग्रोव वन क्यों महत्वपूर्ण हैं?
वे खारे जल और दलदली भूमि में उग सकते हैं, जहाँ दूसरे पेड़ नहीं टिकते। उनकी घनी जड़ें तट को लहरों और चक्रवात से बचाती हैं तथा मिट्टी का कटाव रोकती हैं। साथ ही वे अनेक मछलियों और पक्षियों का आश्रय भी हैं, इसलिए उनका पारिस्थितिक महत्व बहुत बड़ा है।
