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कोयला, पेट्रोलियम एवं दहन

By ExamAtlas · 29/8/2026

कोयला, पेट्रोलियम एवं दहन

यह भाग पर्यावरण और विज्ञान दोनों से जुड़ा है, इसलिए प्रश्न दोनों तरफ़ से आ सकता है। सबसे अधिक पूछे जाने वाले बिंदु हैं — पेट्रोलियम के उत्पादों के नाम, दहन के लिए आवश्यक तीन शर्तें, और आग बुझाने में कौन-सा साधन कहाँ काम आता है।

जीवाश्म ईंधन

कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को जीवाश्म ईंधन कहते हैं, क्योंकि ये करोड़ों वर्ष पहले दबे हुए जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के अवशेषों से बने हैं। ये समाप्य संसाधन हैं, इसलिए इनका सोच-समझकर उपयोग आवश्यक है।

कोयले को हवा की अनुपस्थिति में गर्म करने पर कोक, कोलतार और कोल गैस मिलती है। कोक लगभग शुद्ध कार्बन है, जबकि कोलतार से रंग और दवाइयाँ बनती हैं।

पेट्रोलियम को प्रभाजी आसवन से अलग-अलग उत्पादों में बाँटा जाता है, इसीलिए उसे काला सोना कहा जाता है।

उत्पादउपयोग
पेट्रोलहल्के वाहनों का ईंधन, शुष्क धुलाई
डीज़लभारी वाहन, जनित्र
मिट्टी का तेलस्टोव, विमान का ईंधन
स्नेहकमशीनों में चिकनाई
पैराफ़िन मोममोमबत्ती, वैसलीन
बिटुमेनसड़क निर्माण

दहन और उसकी शर्तें

किसी पदार्थ का ऑक्सीजन से क्रिया करके ऊष्मा और प्रकाश देना दहन कहलाता है। इसके लिए तीन चीज़ें एक साथ चाहिए — ज्वलनशील पदार्थ, ऑक्सीजन और ज्वलन ताप। इनमें से एक भी हटा दी जाए तो आग बुझ जाएगी।

ज्वलन ताप वह न्यूनतम ताप है जिस पर पदार्थ जलना शुरू करता है। इसीलिए काग़ज़ जल्दी जल जाता है पर लकड़ी देर लेती है। सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस का ज्वलन ताप इतना कम है कि वह हवा में स्वयं जल उठता है।

  • तीव्र दहन — रसोई गैस का जलना।
  • स्वतःदहन — फ़ॉस्फ़ोरस का स्वयं जल उठना।
  • विस्फोट — पटाखे का फूटना।

आग पर नियंत्रण

आग बुझाने का हर तरीका इन्हीं तीन शर्तों में से किसी एक को हटाता है। पानी ताप घटाकर काम करता है, इसलिए वह लकड़ी और काग़ज़ की आग पर सबसे अच्छा है।

  • बिजली की आग पर पानी कभी नहीं — पानी चालक है और झटका लग सकता है।
  • तेल की आग पर भी पानी नहीं — तेल हल्का होने से ऊपर तैरकर आग फैला देगा।
  • कार्बन डाइऑक्साइड दोनों स्थितियों के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति काट देती है और उपकरण को नुकसान नहीं पहुँचाती।
  • रेत या कंबल डालना भी ऑक्सीजन रोकने का ही तरीका है।

हर तरह की आग पानी से बुझाई जा सकती है  |   बिजली और तेल की आग पर पानी खतरनाक है; वहाँ कार्बन डाइऑक्साइड या रेत का प्रयोग होता है

ज्वाला और ईंधन क्षमता

मोमबत्ती की ज्वाला के तीन भाग होते हैं। सबसे भीतरी काला भाग अजला होता है, बीच का पीला भाग आंशिक दहन के कारण चमकीला होता है, और सबसे बाहरी नीला भाग सबसे गर्म होता है क्योंकि वहाँ पूरा दहन होता है। इसीलिए सुनार बाहरी भाग का प्रयोग करते हैं।

अच्छे ईंधन के गुण हैं — ऊँचा कैलोरी मान, कम धुआँ और उचित मूल्य। हाइड्रोजन का कैलोरी मान सबसे अधिक होता है। जीवाश्म ईंधन जलने से कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, जो वैश्विक तापन का कारण है, और अपूर्ण दहन से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड अत्यंत विषैली गैस है।

आग बुझाने का प्रश्न हल करने का सीधा तरीका — पहले देखिए कि आग किस चीज़ की है। लकड़ी-काग़ज़ पर पानी, बिजली या तेल पर कार्बन डाइऑक्साइड या रेत। यही एक नियम अधिकांश प्रश्न हल कर देता है।

TRE संकेत: ज्वाला का सबसे बाहरी भाग सबसे गर्म होता है — यह लगभग तय प्रश्न है। बिजली की आग पर कार्बन डाइऑक्साइड वाला बिंदु भी बार-बार आया है। हाइड्रोजन का कैलोरी मान सर्वाधिक और पेट्रोलियम को काला सोना कहते हैं — दोनों सीधे पूछे गए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं और समाप्य हैं।
  • पेट्रोलियम को प्रभाजी आसवन से अलग-अलग उत्पादों में बाँटा जाता है।
  • दहन के लिए ज्वलनशील पदार्थ, ऑक्सीजन और ज्वलन ताप तीनों चाहिए।
  • बिजली और तेल की आग पर पानी नहीं डाला जाता।
  • ज्वाला का सबसे बाहरी नीला भाग सबसे गर्म होता है।
  • हाइड्रोजन का कैलोरी मान सभी ईंधनों में सबसे अधिक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिजली की आग पर पानी क्यों नहीं डालना चाहिए?

साधारण पानी विद्युत का सुचालक होता है, इसलिए वह आग तक धारा पहुँचाकर बुझाने वाले व्यक्ति को तेज़ झटका दे सकता है। ऐसी आग पर कार्बन डाइऑक्साइड वाला अग्निशामक प्रयोग किया जाता है, जो ऑक्सीजन की आपूर्ति काट देता है और विद्युत उपकरणों को नुकसान भी नहीं पहुँचाता।

ज्वाला का बाहरी भाग सबसे गर्म क्यों होता है?

बाहरी भाग में ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में मिलती है, इसलिए वहाँ ईंधन का पूर्ण दहन होता है और अधिकतम ऊष्मा निकलती है। भीतरी भाग तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है, इसलिए वहाँ दहन अधूरा रहता है और वह अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। इसी कारण सुनार बाहरी भाग से धातु गलाते हैं।

कार्बन मोनोऑक्साइड इतनी खतरनाक क्यों है?

यह गैस ईंधन के अपूर्ण दहन से बनती है और रंगहीन तथा गंधहीन होने के कारण पता ही नहीं चलती। साँस के साथ भीतर जाकर यह रक्त के हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन की तुलना में कहीं अधिक मज़बूती से जुड़ जाती है, जिससे शरीर तक ऑक्सीजन पहुँचना बंद हो जाता है। बंद कमरे में अंगीठी जलाना इसीलिए जानलेवा होता है।

पेट्रोलियम को काला सोना क्यों कहा जाता है?

क्योंकि कच्चा पेट्रोलियम देखने में गाढ़ा और काला होता है, पर उसका आर्थिक महत्व सोने जैसा है। उससे पेट्रोल, डीज़ल, मिट्टी का तेल, स्नेहक, मोम और बिटुमेन जैसे अनेक उपयोगी उत्पाद मिलते हैं, और उन्हीं पर आधुनिक परिवहन तथा उद्योग टिके हुए हैं।