फसल उत्पादन एवं प्रबंधन
फसल उत्पादन एवं प्रबंधन
यह अध्याय बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य की परीक्षा में विशेष महत्व रखता है। प्रश्न प्रायः दो जगह से आते हैं — खरीफ़ और रबी की फसलों की पहचान, तथा खाद और उर्वरक का अंतर। दोनों बिंदु उदाहरण सहित पक्के कर लीजिए।
कृषि की क्रियाएँ क्रम से
- मिट्टी तैयार करना — हल या कल्टीवेटर से जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बनाना।
- बुआई — बीज बोना, जिसके लिए सीड ड्रिल सबसे अच्छी विधि है।
- खाद और उर्वरक देना — पोषक तत्वों की पूर्ति।
- सिंचाई — समय पर पानी देना।
- खरपतवार निकालना — अनचाहे पौधे हटाना।
- कटाई — पकी फसल काटना।
- भंडारण — सुखाकर सुरक्षित रखना।
जुताई से मिट्टी में हवा पहुँचती है, जड़ें गहरी जाती हैं और केंचुए तथा सूक्ष्मजीव सक्रिय हो जाते हैं। सीड ड्रिल से बीज उचित गहराई और दूरी पर बोए जाते हैं, इसलिए बीज बचता है और अंकुरण बेहतर होता है।
खरीफ़ और रबी
| वर्ग | समय | फसलें |
|---|---|---|
| खरीफ़ | जून-जुलाई में बुआई, वर्षा ऋतु | धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन, अरहर |
| रबी | अक्टूबर-नवंबर में बुआई, शीत ऋतु | गेहूँ, चना, मटर, सरसों, मसूर, अलसी |
याद रखने का सरल तरीका — खरीफ़ को पानी चाहिए, इसलिए धान वर्षा ऋतु की फसल है, और रबी को ठंड चाहिए, इसलिए गेहूँ और सरसों जाड़े की। बिहार में दोनों ही मौसमों की खेती बड़े पैमाने पर होती है और यहाँ धान तथा गेहूँ प्रमुख फसलें हैं।
✗ गेहूँ खरीफ़ की फसल है | ✓ गेहूँ रबी की फसल है, जो अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है
खाद और उर्वरक
| बिंदु | खाद | उर्वरक |
|---|---|---|
| स्रोत | गोबर, पौधों के अवशेष | कारखानों में रासायनिक विधि से |
| पोषक तत्व | कम मात्रा में | अधिक और निश्चित मात्रा में |
| मिट्टी पर असर | उर्वरता और बनावट सुधरती है | अधिक प्रयोग से मिट्टी खराब होती है |
| उदाहरण | कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, हरी खाद | यूरिया, एनपीके, सुपर फ़ॉस्फ़ेट |
केंचुओं की सहायता से बनी खाद वर्मी कंपोस्ट कहलाती है। फसल चक्र अपनाने से भी मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, क्योंकि दलहनी फसल नाइट्रोजन लौटा देती है। लगातार एक ही फसल लेने से मिट्टी के वही पोषक तत्व घटते जाते हैं।
सिंचाई, निराई और भंडारण
- परंपरागत विधियाँ — मोट, ढेकली, रहट और नहर।
- आधुनिक विधियाँ — छिड़काव और टपक सिंचाई, जिनमें पानी की बचत होती है।
- टपक सिंचाई बूँद-बूँद जड़ तक पानी पहुँचाती है, इसलिए कम पानी वाले क्षेत्रों में सबसे उपयुक्त है।
- खरपतवार फसल का पोषण और जल छीन लेते हैं, इसलिए उन्हें निकालना ज़रूरी है।
भंडारण से पहले अनाज को अच्छी तरह सुखाना आवश्यक है, क्योंकि नमी रहने पर फफूँदी और कीट लग जाते हैं। बड़े पैमाने पर अनाज साइलो और बखार में रखा जाता है और नीम की सूखी पत्तियाँ प्राकृतिक कीट-रोधी का काम करती हैं।
खरीफ़-रबी की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका मौसम से जोड़ना है। जिस फसल को अधिक पानी चाहिए वह वर्षा में यानी खरीफ़, और जिसे ठंडा मौसम चाहिए वह जाड़े में यानी रबी।
TRE संकेत: धान खरीफ़ और गेहूँ रबी की फसल है — यह लगभग तय प्रश्न है। खाद और उर्वरक का अंतर परिभाषा के रूप में पूछा जाता है। वर्मी कंपोस्ट केंचुओं से बनती है और टपक सिंचाई से पानी बचता है — दोनों सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- कृषि की क्रियाएँ जुताई से शुरू होकर भंडारण पर समाप्त होती हैं।
- सीड ड्रिल से बीज उचित गहराई और दूरी पर बोए जाते हैं।
- खरीफ़ फसलें वर्षा ऋतु की और रबी फसलें शीत ऋतु की होती हैं।
- धान खरीफ़ की तथा गेहूँ और सरसों रबी की फसल हैं।
- खाद प्राकृतिक है और मिट्टी सुधारती है; उर्वरक रासायनिक है।
- टपक सिंचाई में पानी की सबसे अधिक बचत होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाद उर्वरक से बेहतर क्यों मानी जाती है?
उर्वरक पोषक तत्व तो तेज़ी से देता है, पर लगातार प्रयोग से मिट्टी की बनावट बिगड़ जाती है और उसमें रहने वाले लाभदायक सूक्ष्मजीव घट जाते हैं। खाद प्राकृतिक होती है, वह मिट्टी में जीवांश बढ़ाती है, जल धारण क्षमता सुधारती है और सूक्ष्मजीवों को सक्रिय रखती है, इसलिए दीर्घकाल में वह अधिक उपयोगी है।
फसल चक्र अपनाने से क्या लाभ होता है?
एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल लेने से मिट्टी के वही पोषक तत्व लगातार घटते जाते हैं। यदि बीच में दलहनी फसल बो दी जाए तो उसकी जड़ों का राइजोबियम मिट्टी में नाइट्रोजन लौटा देता है। इससे उर्वरक की ज़रूरत घटती है और अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होती है।
टपक सिंचाई किन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है?
उन क्षेत्रों के लिए जहाँ पानी की कमी है। इसमें पतली नलियों से बूँद-बूँद पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुँचाया जाता है, इसलिए बहाव और वाष्पन से होने वाली बर्बादी लगभग समाप्त हो जाती है। फल, सब्ज़ी और बागवानी की फसलों में यह विधि सबसे अधिक लाभदायक सिद्ध हुई है।
अनाज को भंडारण से पहले सुखाना क्यों ज़रूरी है?
गीले अनाज में नमी रह जाती है और नमी पाकर फफूँदी तथा कीट तेज़ी से पनपते हैं, जिससे अनाज सड़ने लगता है और उसमें विषैले पदार्थ तक बन सकते हैं। धूप में अच्छी तरह सुखा देने पर नमी निकल जाती है और अनाज लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
