संवाद, कहानी एवं विज्ञापन लेखन
Dialogue, Story and Advertisement Writing
ये तीनों रचनात्मक रूप हैं और इनसे प्रश्न इसलिए पूछे जाते हैं कि शिक्षक को कक्षा में इन्हीं का प्रयोग करना पड़ता है। तीनों में सामग्री से अधिक ढाँचा और उपयुक्तता देखी जाती है, इसलिए नियम पहले समझ लीजिए, कल्पना बाद में।
संवाद लेखन
संवाद दो या अधिक व्यक्तियों की बातचीत है और उसमें भाषा बोलचाल की होनी चाहिए, लिखित निबंध जैसी नहीं। यही उसकी सबसे बड़ी शर्त है।
- हर वक्ता का नाम बाईं ओर लिखकर विराम चिह्न लगाइए।
- वाक्य छोटे रखिए, जैसे लोग वास्तव में बोलते हैं।
- संक्षिप्त रूप प्रयोग कीजिए, जैसे can't और I'm।
- संवाद का आरंभ और अंत स्वाभाविक होना चाहिए।
- दोनों वक्ताओं को लगभग बराबर बोलने का अवसर दीजिए।
सबसे आम भूल यह होती है कि एक वक्ता लंबा भाषण देता रहता है और दूसरा केवल हाँ कहता है। ऐसा संवाद वास्तविक नहीं लगता और उसके अंक कटते हैं।
✗ संवाद में औपचारिक लिखित भाषा का प्रयोग करना | ✓ संवाद बोलचाल की भाषा में होता है; छोटे वाक्य और संक्षिप्त रूप उसे स्वाभाविक बनाते हैं
कहानी लेखन
परीक्षा में प्रायः संकेत बिंदु या आरंभिक पंक्ति देकर कहानी पूरी करने को कहा जाता है। यहाँ मौलिकता से अधिक यह देखा जाता है कि कहानी में ढाँचा है या नहीं।
- आरंभ — पात्र और परिस्थिति का परिचय।
- घटना — कोई समस्या या मोड़।
- विकास — तनाव बढ़ना।
- चरम — निर्णायक क्षण।
- अंत — समाधान और यदि माँगा गया हो तो सीख।
कहानी भूतकाल में लिखी जाती है और उसमें दिए गए सारे संकेत बिंदु आने चाहिए। यदि शीर्षक और सीख माँगी गई हो तो उन्हें देना न भूलिए, क्योंकि उनके अलग अंक होते हैं।
विज्ञापन लेखन
विज्ञापन बहुत छोटा होता है और उसका उद्देश्य ध्यान खींचना है। इसलिए वहाँ पूरे वाक्य ज़रूरी नहीं और भाषा संक्षिप्त रहती है।
| प्रकार | क्या होना चाहिए |
|---|---|
| वर्गीकृत | क्या, किसके लिए, संपर्क विवरण |
| व्यावसायिक | आकर्षक शीर्षक, विशेषताएँ, संपर्क |
| खोया-पाया | वस्तु का विवरण, स्थान, तिथि, संपर्क |
| नियुक्ति | पद, योग्यता, अनुभव, आवेदन का तरीका |
हर विज्ञापन में संपर्क विवरण अनिवार्य है और उसे बॉक्स में लिखा जाता है। भाषा में अतिशयोक्ति चल जाती है, पर तथ्य ग़लत नहीं होने चाहिए।
रचनात्मक रूप क्यों पूछे जाते हैं
इसका कारण व्यावहारिक है। मध्य विद्यालय की अंग्रेज़ी कक्षा में शिक्षक को बच्चों से संवाद बुलवाना पड़ता है, कहानी सुनानी और लिखवानी पड़ती है, और विज्ञापन जैसे छोटे लेखन कार्य देने पड़ते हैं।
इसलिए यह भाग केवल परीक्षा का नहीं, आगे की कक्षा का भी अभ्यास है। जो शिक्षक स्वयं अच्छा संवाद लिख सकता है, वही बच्चों से भी लिखवा सकता है।
तीनों रूपों में एक बात समान है — पाठक कौन है, यह पहले तय कीजिए। संवाद में सुनने वाला, कहानी में पढ़ने वाला और विज्ञापन में ग्राहक। यही तय करता है कि भाषा कैसी होगी।
TRE संकेत: संवाद बोलचाल की भाषा में होता है — यह सीधे पूछा जाता है। कहानी भूतकाल में और सारे संकेत बिंदु सहित लिखी जाती है, यह भी तयशुदा है। विज्ञापन में संपर्क विवरण अनिवार्य भी बार-बार आया है।
60 सेकंड का रिवीजन
- संवाद बोलचाल की भाषा में और छोटे वाक्यों में लिखा जाता है।
- दोनों वक्ताओं को लगभग बराबर बोलने का अवसर मिलना चाहिए।
- कहानी भूतकाल में लिखी जाती है।
- कहानी में दिए गए सारे संकेत बिंदु आने चाहिए।
- विज्ञापन संक्षिप्त होता है और उसमें पूरे वाक्य ज़रूरी नहीं।
- हर विज्ञापन में संपर्क विवरण अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संवाद लेखन में सबसे आम भूल क्या है?
एक वक्ता को लंबा भाषण दे देना और दूसरे को केवल हाँ या ठीक है कहने देना। वास्तविक बातचीत में दोनों पक्ष लगभग बराबर बोलते हैं, प्रश्न पूछते हैं और बीच में टोकते भी हैं। दूसरी आम भूल है किताबी भाषा का प्रयोग, जबकि संवाद बोलचाल की भाषा माँगता है।
संकेत बिंदुओं से कहानी लिखते समय क्या ध्यान रखें?
दिए गए सारे बिंदु कहानी में आने चाहिए और उसी क्रम में, क्योंकि वे कथानक का ढाँचा हैं। कहानी भूतकाल में लिखिए, पात्रों के नाम रखिए, और अंत को स्पष्ट कीजिए। यदि शीर्षक और सीख माँगी गई है तो वे अलग से देने होते हैं, क्योंकि उनके अपने अंक होते हैं।
विज्ञापन में पूरे वाक्य क्यों नहीं लिखे जाते?
क्योंकि विज्ञापन का उद्देश्य एक झलक में ध्यान खींचना है। पाठक उसे पढ़ता नहीं, देखता है। इसलिए वहाँ छोटे वाक्यांश, स्पष्ट शब्द और बड़ा शीर्षक काम करते हैं। पर संपर्क विवरण कभी नहीं छोड़ा जाता, क्योंकि उसी से विज्ञापन अपना काम पूरा करता है।
ये रचनात्मक रूप शिक्षक भर्ती परीक्षा में क्यों रखे जाते हैं?
क्योंकि मध्य विद्यालय की अंग्रेज़ी कक्षा में इन्हीं का सबसे अधिक प्रयोग होता है। शिक्षक को बच्चों से संवाद बुलवाना, कहानी लिखवाना और छोटे लेखन कार्य देने पड़ते हैं। जो शिक्षक स्वयं इन रूपों में सहज है, वही बच्चों को ठीक से सिखा सकता है।
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