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नीति निर्देशक तत्व एवं भारतीय राज्य

By ExamAtlas · 29/8/2026

नीति निर्देशक तत्व एवं भारतीय राज्य

नीति निर्देशक तत्वों से प्रश्न प्रायः दो बिंदुओं पर आते हैं — वे मौलिक अधिकारों से किस तरह अलग हैं, और कौन-सा तत्व किस अनुच्छेद में है। पहला बिंदु समझने का है और दूसरा याद करने का, इसलिए दोनों को अलग-अलग तैयार कीजिए।

ये क्या हैं

नीति निर्देशक तत्व संविधान के भाग चार में अनुच्छेद 36 से 51 तक दिए गए हैं और वे आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं। ये राज्य के लिए दिशा-निर्देश हैं कि उसे किस प्रकार का समाज बनाना है।

बिंदुमौलिक अधिकारनीति निर्देशक तत्व
प्रकृतिनकारात्मक; राज्य को रोकते हैंसकारात्मक; राज्य से काम माँगते हैं
वाद योग्यतान्यायालय से लागू कराए जा सकते हैंनहीं कराए जा सकते
उद्देश्यराजनीतिक लोकतंत्रसामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र
स्रोतअमेरिकाआयरलैंड

इनके वाद योग्य न होने का अर्थ यह नहीं कि वे महत्वहीन हैं। डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि इनके पीछे जनमत की शक्ति है, और कोई भी सरकार इन्हें लंबे समय तक अनदेखा नहीं कर सकती।

नीति निर्देशक तत्व महत्वहीन हैं क्योंकि वे न्यायालय से लागू नहीं होते  |   वे शासन के मूल सिद्धांत हैं और अनेक बड़े कानून इन्हीं के आधार पर बने हैं

महत्वपूर्ण निर्देशक तत्व

अनुच्छेदविषय
39आजीविका के पर्याप्त साधन; समान कार्य के लिए समान वेतन
40ग्राम पंचायतों का गठन
41काम, शिक्षा और सहायता का अधिकार
44समान नागरिक संहिता
45छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल और शिक्षा
47पोषण स्तर बढ़ाना और मादक पदार्थों पर रोक
48कपर्यावरण और वन्य जीवन की रक्षा
51अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा

अनुच्छेद 40 के आधार पर ही पंचायती राज व्यवस्था बनी और अनुच्छेद 45 शिक्षक के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल और शिक्षा की बात करता है। यही आँगनबाड़ी और पूर्व प्राथमिक शिक्षा का आधार है।

बिहार और अनुच्छेद 47

अनुच्छेद 47 राज्य से कहता है कि वह लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा उठाए तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पदार्थों के सेवन पर रोक लगाए।

बिहार ने 2016 में मद्य निषेध लागू किया और उसका संवैधानिक आधार यही अनुच्छेद है। यह उदाहरण दिखाता है कि निर्देशक तत्व केवल काग़ज़ पर नहीं रहते, वे राज्य की नीति का वास्तविक आधार बनते हैं।

इसी तरह मध्याह्न भोजन योजना अनुच्छेद 47 और 45 दोनों से जुड़ती है, क्योंकि उसका उद्देश्य पोषण और उपस्थिति दोनों बढ़ाना है। शिक्षक के लिए यह जुड़ाव व्यावहारिक रूप से रोज़ सामने आता है।

मौलिक अधिकार और निर्देशक तत्व को विरोधी मत समझिए। पहला यह तय करता है कि राज्य क्या नहीं कर सकता और दूसरा यह कि उसे क्या करना चाहिए। दोनों मिलकर ही संविधान का पूरा उद्देश्य बनाते हैं।

TRE संकेत: नीति निर्देशक तत्व आयरलैंड से लिए गए हैं — यह तयशुदा प्रश्न है। अनुच्छेद 40 और पंचायती राज भी सीधे पूछा जाता है। बिहार से अनुच्छेद 47 और मद्य निषेध तथा शिक्षक के लिए अनुच्छेद 45 भी आ चुके हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • नीति निर्देशक तत्व संविधान के भाग चार में हैं।
  • वे आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं।
  • इन्हें न्यायालय से लागू नहीं कराया जा सकता।
  • अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के गठन की बात करता है।
  • अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों से जुड़ा है।
  • अनुच्छेद 47 पोषण स्तर और मद्य निषेध से संबंधित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति निर्देशक तत्व न्यायालय से लागू क्यों नहीं होते?

क्योंकि उनके लिए धन और साधन चाहिए, जो राज्य की क्षमता पर निर्भर करते हैं। संविधान निर्माताओं ने इन्हें लक्ष्य के रूप में रखा, जिन्हें राज्य अपनी क्षमता के अनुसार क्रमशः पूरा करे। न्यायालय किसी सरकार को साधन के बिना कोई काम करने का आदेश नहीं दे सकता, इसलिए इन्हें वाद योग्य नहीं बनाया गया।

फिर इनका महत्व क्या है?

इनका महत्व यह है कि वे शासन के मूल सिद्धांत हैं और उनसे यह पता चलता है कि संविधान किस प्रकार का समाज चाहता है। भूमि सुधार, पंचायती राज, न्यूनतम मज़दूरी और मध्याह्न भोजन जैसे अनेक बड़े कानून तथा योजनाएँ इन्हीं तत्वों के आधार पर बनी हैं।

बिहार में मद्य निषेध का संवैधानिक आधार क्या है?

अनुच्छेद 47, जो राज्य से कहता है कि वह लोगों का पोषण स्तर तथा जीवन स्तर ऊँचा उठाए और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पदार्थों के सेवन पर रोक लगाए। बिहार में 2016 में लागू किया गया मद्य निषेध इसी निर्देश पर आधारित है और यह निर्देशक तत्वों का व्यावहारिक उदाहरण है।

मौलिक अधिकार और निर्देशक तत्व में टकराव हो तो क्या होता है?

यह प्रश्न न्यायालय के सामने कई बार आया है और उसने दोनों में संतुलन बनाने का रुख अपनाया है। सामान्य सिद्धांत यह माना जाता है कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और उनकी व्याख्या इस तरह की जानी चाहिए कि दोनों साथ चल सकें, क्योंकि दोनों मिलकर ही संविधान का उद्देश्य पूरा करते हैं।