भारत का अपवाह तंत्र एवं जल संसाधन
Drainage System and Water Resources of India
नदियों से प्रश्न लगभग निश्चित है और वह प्रायः तीन बिंदुओं पर आता है — कौन-सी नदी कहाँ से निकलती है, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों का अंतर, और कौन-सी परियोजना किस नदी पर है। तीनों को अलग-अलग याद कीजिए।
हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियाँ
| बिंदु | हिमालयी | प्रायद्वीपीय |
|---|---|---|
| स्रोत | हिमनद | वर्षा |
| प्रवाह | सदानीरा | मौसमी |
| घाटी | गहरी, कटाव करती | उथली, स्थिर |
| गाद | बहुत अधिक | कम |
| डेल्टा | बड़ा डेल्टा बनाती | कुछ ज्वारनदमुख भी बनाती |
सबसे बड़ा अंतर सदानीरा होने का है। हिमालयी नदियाँ हिमनद से निकलती हैं, इसलिए गर्मियों में बर्फ़ पिघलने से भी उन्हें जल मिलता है और वे साल भर बहती हैं। प्रायद्वीपीय नदियाँ केवल वर्षा पर निर्भर हैं, इसलिए गर्मियों में सूख जाती हैं।
गंगा तंत्र
गंगा गंगोत्री हिमनद से निकलती है, जहाँ उसे भागीरथी कहा जाता है, और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है। वह भारत की सबसे लंबी नदी है।
| सहायक नदी | किस ओर से | विशेष |
|---|---|---|
| यमुना | दाएँ | सबसे लंबी सहायक नदी |
| घाघरा, गंडक, कोसी | बाएँ | नेपाल से आती हैं |
| सोन | दाएँ | पठार से आती है |
| चंबल, बेतवा | यमुना की सहायक | बीहड़ के लिए प्रसिद्ध |
गंगा और ब्रह्मपुत्र मिलकर विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा सुंदरबन बनाती हैं। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में त्सांगपो कहलाती है और अरुणाचल में प्रवेश करने पर दिहांग।
✗ यमुना गंगा के बाएँ किनारे से मिलती है | ✓ यमुना गंगा की दाहिनी ओर की सहायक नदी है और प्रयागराज में उससे मिलती है
अन्य तंत्र
- सिंधु तंत्र — सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज।
- पूर्व की ओर बहने वाली प्रायद्वीपीय नदियाँ — महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी; ये डेल्टा बनाती हैं।
- पश्चिम की ओर बहने वाली — नर्मदा और तापी; ये ज्वारनदमुख बनाती हैं, डेल्टा नहीं।
- गोदावरी प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी है, इसीलिए उसे दक्षिण की गंगा कहते हैं।
नर्मदा और तापी भ्रंश घाटी में बहती हैं, इसलिए वे डेल्टा नहीं बनातीं — यह तथ्य परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है। सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी।
जल संसाधन और परियोजनाएँ
| परियोजना | नदी | राज्य |
|---|---|---|
| भाखड़ा नांगल | सतलुज | पंजाब और हिमाचल |
| हीराकुंड | महानदी | ओडिशा |
| नागार्जुन सागर | कृष्णा | तेलंगाना और आंध्र |
| दामोदर घाटी | दामोदर | झारखंड और पश्चिम बंगाल |
| कोसी परियोजना | कोसी | बिहार और नेपाल |
बहुउद्देशीय परियोजनाओं से सिंचाई, बिजली, बाढ़ नियंत्रण और पेयजल — सब एक साथ मिलते हैं, इसीलिए नेहरू ने इन्हें आधुनिक भारत के मंदिर कहा था। पर इनसे विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव की समस्याएँ भी जुड़ी हैं, इसलिए संतुलित उत्तर में दोनों पक्ष आने चाहिए।
नदियों को उनके स्रोत से जोड़कर याद कीजिए — हिमनद से निकली तो सदानीरा और गहरी घाटी वाली, वर्षा से बनी तो मौसमी और उथली। यह एक भेद ही अधिकांश प्रश्नों का उत्तर दे देता है।
TRE संकेत: नर्मदा और तापी डेल्टा नहीं बनातीं सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। गोदावरी दक्षिण की गंगा भी तयशुदा है। कोसी परियोजना बिहार से और भाखड़ा नांगल सतलुज पर भी सीधे आए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- हिमालयी नदियाँ सदानीरा और प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी होती हैं।
- गंगा गंगोत्री हिमनद से निकलती है और भारत की सबसे लंबी नदी है।
- यमुना गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
- गंगा और ब्रह्मपुत्र मिलकर सुंदरबन डेल्टा बनाती हैं।
- नर्मदा और तापी पश्चिम की ओर बहती हैं और डेल्टा नहीं बनातीं।
- गोदावरी प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिमालयी नदियाँ साल भर क्यों बहती हैं?
क्योंकि उनका स्रोत हिमनद है, इसलिए वर्षा न होने पर भी गर्मियों में बर्फ़ पिघलने से उन्हें जल मिलता रहता है। प्रायद्वीपीय नदियाँ केवल वर्षा पर निर्भर करती हैं, इसलिए वर्षा ऋतु के बाद उनका जल घटता जाता है और गर्मियों में कई तो सूख ही जाती हैं।
नर्मदा और तापी डेल्टा क्यों नहीं बनातीं?
क्योंकि वे भ्रंश घाटी में बहती हैं, जिसकी ढलान तीव्र है और किनारे ऊँचे हैं। इससे उनका वेग मुहाने तक बना रहता है और वे अपनी गाद जमा करने के बजाय समुद्र में बहा ले जाती हैं। इसी कारण वहाँ डेल्टा के बजाय ज्वारनदमुख बनता है।
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के दोनों पक्ष क्या हैं?
लाभ यह है कि एक ही परियोजना से सिंचाई, बिजली, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और मत्स्य पालन सब मिल जाते हैं। दूसरी ओर बड़े बाँधों से लोगों का विस्थापन होता है, वन और कृषि भूमि डूबती है, और नदी का प्राकृतिक प्रवाह तथा गाद का बहाव बदल जाता है। संतुलित उत्तर में दोनों आने चाहिए।
गोदावरी को दक्षिण की गंगा क्यों कहते हैं?
क्योंकि वह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और उसका अपवाह क्षेत्र भी सबसे बड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे उत्तर में गंगा का। वह महाराष्ट्र से निकलकर कई राज्यों से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है और एक बड़ा डेल्टा भी बनाती है।
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