पृथ्वी की गतियाँ, अक्षांश-देशांतर एवं समय
Earth's Motions, Latitude, Longitude and Time
इस भाग से प्रश्न लगभग निश्चित है और वह प्रायः तीन बिंदुओं पर होता है — घूर्णन और परिक्रमण का अंतर, संक्रांति तथा विषुव की तिथियाँ, और भारतीय मानक समय की देशांतर रेखा। तीनों संख्याएँ पक्की कर लीजिए।
घूर्णन और परिक्रमण
| बिंदु | घूर्णन | परिक्रमण |
|---|---|---|
| क्या | अपनी धुरी पर घूमना | सूर्य के चारों ओर चक्कर |
| समय | लगभग 24 घंटे | लगभग 365 दिन 6 घंटे |
| परिणाम | दिन और रात | ऋतु परिवर्तन |
परिक्रमण में बचे हुए छह घंटे चार वर्षों में जुड़कर एक दिन बनाते हैं, इसीलिए हर चौथे वर्ष अधिवर्ष होता है और फ़रवरी में एक दिन बढ़ जाता है। पृथ्वी की धुरी अपने कक्षा तल पर साढ़े तेईस अंश झुकी है और यही झुकाव ऋतु परिवर्तन का असली कारण है।
✗ ऋतु परिवर्तन इसलिए होता है कि पृथ्वी कभी सूर्य के पास और कभी दूर होती है | ✓ उसका मुख्य कारण पृथ्वी की धुरी का झुकाव है, दूरी का अंतर नहीं
संक्रांति और विषुव
| तिथि | घटना | विशेषता |
|---|---|---|
| 21 जून | कर्क संक्रांति | उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन |
| 22 दिसंबर | मकर संक्रांति | उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन |
| 21 मार्च | बसंत विषुव | दिन और रात बराबर |
| 23 सितंबर | शरद विषुव | दिन और रात बराबर |
इन चार तिथियों में 21 जून और 22 दिसंबर सबसे अधिक पूछी जाती हैं। ध्यान रखिए कि दक्षिणी गोलार्ध में स्थिति ठीक उल्टी रहती है, इसलिए प्रश्न में गोलार्ध ज़रूर देखिए।
अक्षांश और देशांतर
| बिंदु | अक्षांश | देशांतर |
|---|---|---|
| दिशा | पूर्व-पश्चिम में समांतर | उत्तर-दक्षिण में ध्रुवों को मिलाती |
| संख्या | 181 | 360 |
| मुख्य रेखा | भूमध्य रेखा, शून्य अंश | ग्रीनविच, शून्य अंश |
| लंबाई | भूमध्य रेखा सबसे लंबी | सब बराबर |
प्रमुख अक्षांश रेखाएँ हैं — भूमध्य रेखा शून्य अंश पर, कर्क रेखा लगभग साढ़े तेईस अंश उत्तर, मकर रेखा उतनी ही दक्षिण, और दोनों ध्रुव वृत्त लगभग साढ़े छियासठ अंश पर। कर्क रेखा भारत के आठ राज्यों से होकर गुज़रती है।
समय और तिथि रेखा
पृथ्वी चौबीस घंटे में तीन सौ साठ अंश घूमती है, इसलिए एक घंटे में पंद्रह अंश और एक अंश में चार मिनट का अंतर आता है। यही गणना समय के हर प्रश्न का आधार है।
1 घंटा = 15 अंश देशांतर; 1 अंश = 4 मिनट
भारतीय मानक समय 82 अंश 30 मिनट पूर्वी देशांतर से लिया जाता है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के पास से गुज़रता है। यह ग्रीनविच समय से साढ़े पाँच घंटे आगे है।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180 अंश देशांतर पर है और उसे पार करते समय तिथि बदलनी पड़ती है। पूर्व से पश्चिम जाने पर एक दिन जोड़ा जाता है और पश्चिम से पूर्व जाने पर एक दिन घटाया जाता है।
समय के प्रश्न में पहले देशांतर का अंतर निकालिए, फिर उसे चार मिनट से गुणा कीजिए। पूर्व की ओर जाने पर समय आगे और पश्चिम की ओर पीछे होगा — यही दो नियम पूरे भाग के प्रश्न हल कर देते हैं।
TRE संकेत: भारतीय मानक समय 82 अंश 30 मिनट पूर्व लगभग हर बार आता है। 21 जून सबसे लंबा दिन भी तयशुदा है। एक अंश पर चार मिनट का अंतर और धुरी का साढ़े तेईस अंश झुकाव भी सीधे पूछे गए हैं।
60 सेकंड का रिवीजन
- घूर्णन से दिन-रात और परिक्रमण से ऋतु परिवर्तन होता है।
- पृथ्वी की धुरी साढ़े तेईस अंश झुकी है और यही ऋतुओं का कारण है।
- 21 जून उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है।
- 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन-रात बराबर होते हैं।
- एक घंटे में पंद्रह अंश और एक अंश में चार मिनट का अंतर आता है।
- भारतीय मानक समय 82 अंश 30 मिनट पूर्वी देशांतर से लिया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऋतु परिवर्तन का असली कारण क्या है?
पृथ्वी की धुरी का साढ़े तेईस अंश झुका होना, न कि सूर्य से दूरी का बदलना। झुकाव के कारण वर्ष के अलग-अलग समय में सूर्य की सीधी किरणें अलग-अलग गोलार्ध पर पड़ती हैं। जिस गोलार्ध पर सीधी किरणें पड़ती हैं वहाँ गर्मी और दूसरे पर सर्दी होती है।
भारतीय मानक समय कहाँ से लिया जाता है?
82 अंश 30 मिनट पूर्वी देशांतर से, जो उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के पास से गुज़रता है। यह ग्रीनविच समय से साढ़े पाँच घंटे आगे है। इतने बड़े देश के लिए एक ही मानक समय इसलिए लिया गया कि रेल, प्रशासन और संचार में एकरूपता बनी रहे।
अधिवर्ष क्यों होता है?
पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में तीन सौ पैंसठ दिन और लगभग छह घंटे लगते हैं। सुविधा के लिए वर्ष तीन सौ पैंसठ दिन का माना जाता है, और बचे हुए छह घंटे चार वर्षों में जुड़कर एक पूरा दिन बना देते हैं। इसीलिए हर चौथे वर्ष फ़रवरी में एक दिन जोड़ दिया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा क्यों बनाई गई?
क्योंकि पृथ्वी गोल है और पूर्व की ओर बढ़ते जाने पर समय लगातार आगे बढ़ता जाता है। यदि कोई सीमा न हो तो पूरा चक्कर लगाने पर तिथि का हिसाब गड़बड़ा जाएगा। इसीलिए लगभग एक सौ अस्सी अंश देशांतर पर यह रेखा तय की गई, जिसे पार करते समय तिथि बदल दी जाती है।
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