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भारत में चुनाव एवं निर्वाचन प्रक्रिया

By ExamAtlas · 29/8/2026

भारत में चुनाव एवं निर्वाचन प्रक्रिया

चुनाव से प्रश्न प्रायः तीन बिंदुओं पर आते हैं — निर्वाचन आयोग की संरचना और शक्तियाँ, मताधिकार की आयु और उससे जुड़ा संशोधन, और चुनाव की प्रक्रिया के चरण। तीनों में संख्याएँ महत्वपूर्ण हैं, इसलिए उन्हें विशेष रूप से याद कीजिए।

निर्वाचन आयोग

भारत का निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसका उल्लेख अनुच्छेद 324 में है। उसका काम लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराना है।

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
  • उन्हें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह कठिन प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।
  • आयोग आदर्श आचार संहिता लागू करता है।
  • वह दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न देता है।
  • पंचायत और नगर निकाय के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, यह आयोग नहीं।

अंतिम बिंदु सबसे अधिक जाल बनता है — पंचायत चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं कराता, वह काम राज्य निर्वाचन आयोग का है।

मताधिकार

भारत में वयस्क मताधिकार है, यानी हर वयस्क नागरिक को बिना किसी भेद के वोट देने का अधिकार है। आयु सीमा पहले इक्कीस वर्ष थी और इकसठवें संशोधन, 1988 से उसे अठारह वर्ष कर दिया गया।

यह संशोधन इसलिए महत्वपूर्ण है कि उसने करोड़ों युवाओं को एक साथ मतदाता बना दिया। इक्कीस से अठारह वाला यह बदलाव परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है।

मताधिकार की आयु आरंभ से ही अठारह वर्ष थी  |   वह पहले इक्कीस वर्ष थी और 1988 के इकसठवें संशोधन से अठारह की गई

प्रक्रिया

  1. निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण और परिसीमन।
  2. मतदाता सूची तैयार करना और उसका पुनरीक्षण।
  3. अधिसूचना जारी होना और नामांकन।
  4. नाम वापसी और चुनाव चिह्न का आवंटन।
  5. प्रचार, जो मतदान से अड़तालीस घंटे पहले बंद हो जाता है।
  6. मतदान और फिर मतगणना।

भारत में प्रथम पश्चात् पद प्रणाली अपनाई गई है, यानी जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोट पाए वही जीतता है, चाहे उसे कुल वोटों का बहुमत न मिला हो। यह व्यवस्था सरल है, पर उसकी आलोचना भी होती है।

हाल के जुड़ाव

  • ईवीएम से मतदान अब सामान्य व्यवस्था है।
  • वीवीपैट से मतदाता देख सकता है कि उसका वोट सही जगह गया।
  • नोटा का विकल्प 2013 से मिला, जिससे मतदाता किसी को न चुनने का मत दे सकता है।
  • उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है।

नोटा का व्यावहारिक प्रभाव सीमित है, क्योंकि उससे चुनाव रद्द नहीं होता, पर वह असंतोष दर्ज करने का संवैधानिक रास्ता देता है। यह बारीकी परीक्षा में पूछी जाती है।

चुनाव से जुड़े प्रश्न में सबसे पहले यह देखिए कि बात किस आयोग की हो रही है। संसद और विधानसभा के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है और पंचायत तथा नगर निकाय के राज्य निर्वाचन आयोग।

TRE संकेत: 1988 में मताधिकार की आयु अठारह हुई सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। अनुच्छेद 324 भी तयशुदा है। पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है और नोटा 2013 से भी सीधे आए हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • निर्वाचन आयोग का उल्लेख अनुच्छेद 324 में है।
  • वह संसद, विधानसभा और राष्ट्रपति के चुनाव कराता है।
  • पंचायत और नगर निकाय के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।
  • मताधिकार की आयु 1988 में इक्कीस से घटाकर अठारह की गई।
  • भारत में प्रथम पश्चात् पद प्रणाली अपनाई गई है।
  • नोटा का विकल्प 2013 से उपलब्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मताधिकार की आयु घटाकर अठारह क्यों की गई?

इसका उद्देश्य युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना था, क्योंकि अठारह वर्ष की आयु में व्यक्ति अन्य कानूनी दायित्व भी उठाता है। 1988 के इकसठवें संशोधन से यह बदलाव हुआ और इससे करोड़ों युवा एक साथ मतदाता बन गए, जिससे चुनाव का आधार कहीं व्यापक हो गया।

आदर्श आचार संहिता क्या है?

यह नियमों का वह समूह है जो चुनाव की घोषणा होते ही लागू हो जाता है और मतगणना तक चलता है। इसके तहत सरकार नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर सकती, सरकारी साधनों का चुनाव प्रचार में उपयोग नहीं हो सकता, और प्रचार की भाषा तथा तरीक़ों पर भी सीमाएँ रहती हैं।

नोटा का क्या महत्व है?

नोटा से मतदाता यह दर्ज कर सकता है कि उसे कोई भी उम्मीदवार स्वीकार्य नहीं है, और इसके लिए उसे मतदान से दूर नहीं रहना पड़ता। इसका व्यावहारिक प्रभाव सीमित है, क्योंकि नोटा को सबसे अधिक मत मिलने पर भी चुनाव रद्द नहीं होता, पर वह असंतोष व्यक्त करने का वैध रास्ता ज़रूर देता है।

वीवीपैट क्यों जोड़ा गया?

ताकि मतदाता अपनी आँखों से देख सके कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया, मशीन ने वही दर्ज किया। मशीन एक पर्ची दिखाती है जो कुछ क्षण दिखने के बाद सुरक्षित डिब्बे में गिर जाती है। इससे मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है और आवश्यकता पड़ने पर मिलान भी किया जा सकता है।