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अंग्रेज़ी के स्वर, संयुक्त स्वर एवं व्यंजन

English Vowels, Diphthongs and Consonants

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यह अध्याय चौवालीस ध्वनियों का वर्गीकरण करता है और इससे लगभग दो प्रश्न आते हैं। देखने में यह जटिल लगता है, पर वास्तव में पूरा वर्गीकरण छह प्रश्नों पर टिका है — स्वर के लिए तीन और व्यंजन के लिए तीन। इन छह के उत्तर हर ध्वनि का वर्णन कर देते हैं।

स्वरों का वर्गीकरण

स्वर वह ध्वनि है जिसमें वायु का प्रवाह रुकता नहीं। हर स्वर तीन लक्षणों से वर्णित होता है।

लक्षणप्रश्नसंभावित उत्तर
ऊँचाईजीभ कितनी ऊपर हैसंवृत, मध्य, विवृत
पश्चताजीभ का कौन-सा भाग उठा हैअग्र, मध्य, पश्च
ओष्ठ स्थितिहोंठ गोल हैं या नहींगोल या अगोल

इसलिए see वाला स्वर संवृत, अग्र और अगोल है, जबकि too वाला स्वर संवृत, पश्च और गोल। स्वर दीर्घ या ह्रस्व भी होते हैं और ship तथा sheep वाली जोड़ी में अंतर केवल लंबाई का नहीं, गुण का भी है। यही कारण है कि जो भारतीय शिक्षार्थी केवल लंबाई बदलते हैं, वे फिर भी ग़लत शब्द बोलते सुनाई देते हैं।

संयुक्त स्वर

संयुक्त स्वर वह है जिसमें एक ही अक्षर के भीतर एक स्वर से दूसरे की ओर सरकन होती है। अंग्रेज़ी में इनकी संख्या आठ है और वे दो परिवारों में बँटते हैं।

  • संवृतगामी — संवृत स्वर की ओर सरकने वाले, जैसे day, my, boy, go, now में।
  • मध्यगामी — मध्य स्वर की ओर सरकने वाले, जैसे here, there, poor में।
  • त्रिस्वर में तीन स्वर स्थितियों से होकर सरकन होती है, जैसे fire और hour में।

संयुक्त स्वर ही वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें भारतीय वक्ता सबसे अधिक शुद्ध स्वर बना देते हैं, यानी go और day में सरकन के बजाय एक ठहरी हुई ध्वनि बोल देते हैं। प्रश्न में प्रायः पूछा जाता है कि किस शब्द में संयुक्त स्वर है, और उत्तर वर्तनी से नहीं, सरकन पहचानने से मिलता है।

✗ go में शुद्ध स्वर है  |  ✓ उसमें संयुक्त स्वर है, क्योंकि ध्वनि एक स्थिति से दूसरी की ओर सरकती है

व्यंजनों का वर्गीकरण

व्यंजन में वायु का प्रवाह किसी न किसी रूप में बाधित होता है। हर व्यंजन भी तीन लक्षणों से वर्णित होता है।

लक्षणप्रश्नसंभावित उत्तर
घोषत्वस्वर तंतु कंपते हैं या नहींघोष या अघोष
उच्चारण स्थानबाधा कहाँ बनती हैओष्ठ्य, दंतोष्ठ्य, दंत्य, वर्त्स्य, तालव्य, कंठ्य, स्वरयंत्रीय
उच्चारण प्रयत्नवायु कैसे छोड़ी जाती हैस्पर्श, संघर्षी, स्पर्श संघर्षी, नासिक्य, पार्श्विक, अंतस्थ

हर व्यंजन तीनों लक्षणों से मिलकर नाम पाता है — p अघोष ओष्ठ्य स्पर्श है और z घोष वर्त्स्य संघर्षी। प्रश्न या तो तीन भाग वाला वर्णन देकर ध्वनि पूछता है, या ध्वनि देकर वर्णन।

प्रयत्न के वर्ग

  • स्पर्श वायु को पूरी तरह रोककर छोड़ते हैं — p, b, t, d, k, g।
  • संघर्षी वायु को सँकरी जगह से घर्षण के साथ निकालते हैं — f, v, s, z।
  • नासिक्य में वायु नाक से निकलती है — m, n और ng।
  • पार्श्विक में वायु जीभ के किनारों से निकलती है — l।

वर्गीकरण को रटिए मत, हर ध्वनि बोलकर महसूस कीजिए कि बाधा कहाँ बन रही है और वायु कैसे निकल रही है। यही तरीका परीक्षा में तीन भाग वाला वर्णन तुरंत पहचनवा देता है।

TRE संकेत: अघोष ओष्ठ्य स्पर्श जैसा तीन भाग वाला वर्णन लगभग हर बार आता है। संयुक्त स्वर वाला शब्द पहचानना भी तयशुदा है। आठ संयुक्त स्वर की संख्या तथा नासिक्य ध्वनियाँ m, n और ng भी सीधे पूछी गई हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • स्वर में वायु का प्रवाह बाधित नहीं होता।
  • हर स्वर ऊँचाई, पश्चता और ओष्ठ स्थिति से वर्णित होता है।
  • अंग्रेज़ी में आठ संयुक्त स्वर हैं।
  • संयुक्त स्वर में एक अक्षर के भीतर सरकन होती है।
  • हर व्यंजन घोषत्व, उच्चारण स्थान और प्रयत्न से वर्णित होता है।
  • स्पर्श ध्वनियाँ p, b, t, d, k और g हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुद्ध स्वर और संयुक्त स्वर में क्या अंतर है?

शुद्ध स्वर में जीभ की स्थिति पूरे उच्चारण भर एक ही रहती है, इसलिए ध्वनि ठहरी हुई सुनाई देती है। संयुक्त स्वर में एक ही अक्षर के भीतर जीभ एक स्थिति से दूसरी की ओर सरकती है, इसलिए ध्वनि में गति महसूस होती है। go और day में यही सरकन है।

भारतीय वक्ता संयुक्त स्वर में क्यों चूकते हैं?

क्योंकि भारतीय भाषाओं के अधिकांश स्वर ठहरे हुए होते हैं और उनमें ऐसी सरकन कम मिलती है। इसलिए बोलते समय go और day की सरकन अपने आप एक स्थिर स्वर में बदल जाती है। इसका उपचार यह है कि इन शब्दों को धीरे-धीरे खींचकर बोला जाए, ताकि सरकन स्वयं सुनाई दे।

व्यंजन का तीन भाग वाला नाम कैसे बनता है?

पहले घोषत्व बताया जाता है, फिर उच्चारण स्थान और अंत में प्रयत्न। इसी क्रम से p अघोष ओष्ठ्य स्पर्श कहलाता है और z घोष वर्त्स्य संघर्षी। परीक्षा या तो यह पूरा नाम देकर ध्वनि पूछती है या ध्वनि देकर नाम, इसलिए दोनों दिशाओं में अभ्यास कीजिए।

ship और sheep का अंतर केवल लंबाई का है?

नहीं, यही सबसे आम भ्रम है। दोनों स्वरों में लंबाई का अंतर तो है ही, पर जीभ की स्थिति भी अलग है, यानी गुण भी बदलता है। इसीलिए जो शिक्षार्थी केवल स्वर खींच देते हैं, वे फिर भी सही शब्द नहीं बोल पाते। सही उच्चारण के लिए दोनों लक्षण बदलने पड़ते हैं।

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